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Arthritis is a serious disease

जानिए क्या मॉनसून के दौरान बढ़ जाता है अर्थराइटिस का दर्द ?

Know whether the pain of arthritis increases during monsoon?

मानसून के दौरान बहुत सारे लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत बढ़ जाती है जिसे अर्थराइटिस भी कहा जाता है। लेकिन क्या वाकई मौसम का असर हमारे जोड़ों पर पड़ता है? जी हां। आपके जोड़ों का दर्द स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग की तुलना में बदलते मौसम का बेहतर संकेत माना जा सकता है। कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो अर्थराइटिस की समस्या बढ़ा सकते हैं, हालांकि खुराक या खाद्य संवेदनशीलता या अस्वीकार्यता के कारण शायद ही अर्थराइटिस की समस्या होती है।

क्या हैं अर्थराइटिस की चेतावनी देने वाले लक्षण | What are the symptoms warning of Arthritis

अर्थराइटिस की चेतावनी देने वाले लक्षणों में दर्द, सूजन, अकड़न और जोड़ों को मोड़ने में दिक्कत शामिल हैं। अर्थराइटिस के लक्षण (Symptoms of arthritis) धीरे-धीरे या अचानक उभर सकते हैं और कई बार जब अर्थराइटिस पुराना रोग बन जाता है तो इसके लक्षण आते-जाते रहते हैं और लंबे समय तक बरकरार रहते हैं।

अर्थराइटिस की पीड़ा विशेष रूप से एक या अधिक जोड़ों में या इनके आसपास दर्द, कष्ट, जकडऩ और सूजन से समझी जा सकती है जिसे रूमेटिक स्थितियों से पहचाना जाता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे या अचानक से बढ़ सकते हैं।

कुछ रूमेटिक स्थितियों में इम्युन सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) तथा शरीर के विभिन्न अंदरूनी अंगों का भी योगदान रहता है। रूमेटोइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) और लूपस जैसे अर्थराइटिस के कुछ प्रकार कई अंगों को प्रभावित कर सकते हैं और व्यापक लक्षण का कारण बन सकते हैं। यह रोग 50 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले लोगों में अधिक पाया जाता है लेकिन बच्चों समेत हर उम्र के व्यक्तियों को यह रोग प्रभावित कर सकता है।

Seasonal change joint pain

मौसम के बदलाव संबंधी जोड़ों का दर्द आम तौर पर ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) तथा रूमेटोइड अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्तियों में देखा गया है जिन्हें नितंब, घुटने, कुहनी, कंधे तथा हाथ में दर्द की शिकायत हो सकती है। इन जोड़ों में बैरोरिसेप्टर्स नामक संवेदी नाडिय़ां होती हैं जो बैरोमेट्रिक (वायुदाबीय) बदलाव की पहचान कर सकती हैं। ये रिसेप्टर्स खास तौर पर जब प्रतिक्रिया देते हैं जब बैरोमेट्रिक दबाव निम्न रहता है, मसलन जब बारिश की बौछार से पहले मौसम बदल जाता है।

अर्थराइटिस जोड़ के दर्द से पीड़ित व्यक्ति ऐसे बैरोमेट्रिक बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं। निम्न बैरोमेट्रिक दबाव के साथ उच्च नमी का तागुक जोड़ों का दर्द और अकड़न बढऩे से होता है, हालांकि इनमें से कोई एक कारण भी इस दर्द की वजह बन सकता है।

कुल मिलाकर, आंधी-तूफान से पहले निम्न बैरोमेट्रिक दबाव और नमी में वृद्धि जोड़ों के दर्द एवं अकड़न बढ़ाने का कारण बन सकती है। ऐसे में सबसे अच्छी सलाह यही है कि आप पूरे वर्ष किसी भी मौसम में यथासंभव अत्यंत सक्रिय बने रहें। खूब सारा पानी पीयें और बिना वजन उठाने वाला व्यायाम करते हुए अपने जोड़ों को सक्रिय रखें। ओमेगा-3 फैटी एसिड, ग्लूकोसामाइन तथा कोंड्रोइटिन सल्फेट भी ऐसे लोगों के लिए काफी लाभकारी हो सकता है।

अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्तियों को दर्द, कामकाज तथा मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में शारीरिक सक्रियता और व्यायाम के लाभ देखे गए हैं। हल्के-फुल्के व्यायाम से अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्तियों को कार्डियोवैस्क्यूलर रोग, डायबिटीज, मोटापा और शिथिलता की चपेट में आने का खतरा कम हो जाता है। इनमें से कुछ रिस्क फैक्टर्स में सुधार किया जा सकता है जबकि अन्य में नहीं। नहीं सुधारे जा सकने वाले (अपरिवर्तनीय) रिस्क फैक्टर्स: उम्र: ज्यादातर प्रकार के अर्थराइटिस का खतरा उम्र बढऩे के साथ ही बढ़ता जाता है।

लिंग : अर्थराइटिस के ज्यादातर प्रकार महिलाओं में अधिक आम होते हैं। अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में 60 प्रतिशत महिलाएं ही होती हैं, लेकिन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में गठिया की शिकायत अधिक देखी गई है।

आनुवांशिक : कुछ खास प्रकार के जीन्स के साथ रूमेटोइड अर्थराइटिस (आरए), सिस्टमेटिक लुपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) और एंकीलूजिंग स्पांडलाइटिस जैसे कुछ तरह के अर्थराइटिस का खतरा जुड़ा रहता है।

सुधारे जा सकने वाले (परिवर्तनीय) रिस्क फैक्टर्स :

अधिक वजन और मोटापा : अत्यधिक वजन घुटने का ऑस्टियोअर्थराइटिस शुरू होने तथा इसमें वृद्धि में खासा योगदान कर सकता है।

जोड़ों की चोट :

किसी जोड़ पर चोट के कारण वहां ऑस्टियोअर्थराइटिस की समस्या पनप सकती है। संक्रमण: कई माइक्रोबियल एजेंट्स (सूक्ष्म जीवाणु) जोड़ों को संक्रमित कर सकते हैं और अर्थराइटिस के विभिन्न रूपों में विकसित होने का कारण बन सकते हैं। पेशा: कुछ पेशे में बार-बार घुटने को मोडऩा और झुकाना पड़ता है और यह घुटने में ऑस्टियोअर्थराइटिस का कारण बन सकता है।

कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो अर्थराइटिस की समस्या बढ़ा सकते हैं, हालांकि खुराक या खाद्य संवेदनशीलता या अस्वीकार्यता के कारण शायद ही अर्थराइटिस की समस्या होती है।

अर्थराइटिस की चेतावनी देने वाले लक्षणों में दर्द, सूजन, अकड़न और जोड़ों को मोड़ने में दिक्कत शामिल हैं।

अर्थराइटिस के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक उभर सकते हैं और कई बार जब अर्थराइटिस पुराना रोग बन जाता है तो इसके लक्षण आते-जाते रहते हैं और लंबे समय तक बरकरार रहते हैं।

अर्थराइटिस के चार मुख्य चेतावनी भरे लक्षण हैं जिन पर किसी चिकित्सक से चर्चा करनी चाहिए :

दर्द : अर्थराइटिस का दर्द लगातार बना रह सकता है या फिर यह आता-जाता रह सकता है। यह दर्द या तो एक ही जगह बना रह सकता है या फिर शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है।

सूजन : कुछ प्रकार के अर्थराइटिस प्रभावित जोड़ की ऊपरी त्वचा को लाल और सूजन-भरा बना देते हैं जिसे छूने पर गर्माहट का अहसास होता है।

अकड़न : Stiffness

अकड़न अर्थराइटिस का एक विशेष लक्षण होता है, खासकर जब आप सुबह के वक्त टहल रहे हों या लंबे समय बाद डेस्क पर बैठ रहे हों या कार चला रहे हों।

किसी जोड़ को मोड़ने में दिक्कत :

जोड़ को मोड़ने में या कुर्सी से उठने में कठिनाई होती है और यह कष्टकारी होता है।

रूमेटोइड अर्थराइटिस के लक्षण | Symptoms of Rheumatoid Arthritis

आरए (रूमेटोइड अर्थराइटिस) के कुछ लक्षणों में शामिल हैं: सांस लेते वक्त सीने में दर्द की शिकायत, आंख और मुंह का सूखना, आंखों मे जलन, खुजलाहट और पानी आना, त्वचा के अंदर ग्रंथि (अमूमन यह लक्षण अधिक गंभीर बीमारी का है), हाथों और पैरों में संवेदनशून्यता, सिहरन या जलन, नींद आने में परेशानियां अर्थराइटिस को दवाइयों के साथ-साथ उचित गतिविधियों और व्यायाम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। ये दवाइयों रोग में सुधार लाने वाली दवाइयां कहलाती हैं।

अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्ति का खानपान | आर्थराइटिस में क्या नहीं खाना चाहिए? | अर्थराइटिस में खानपान | What to eat and what to avoid in patients with arthritis

जहां तक खानपान की बात है तो अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्ति को डेयरी उत्पादों, गेहूं, मांस, आलू, काली मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी सब्जियों, अल्कोहल, कॉफी, चीनी, सैचुरेटेड फैट, अधिक नमक और बादाम के सेवन से बचना चाहिए। इसकी सूजन और दर्द से राहत पाने के लिए इप्सम सॉल्ट बॉथ की सलाह दी जाती है। जोड़ों पर स्थानीय मिट्टी का लेप भी लगाया जा सकता है। एक कप गर्म पानी में दो चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर इसे नियमित रूप से पीने से बेहतर असर होता है।

यदि कम उम्र में ही इस रोग का पता चल जाता है तो इससे उबारने में दवाइयां तेजी से असर कर सकती हैं। लेकिन बहुत एडवांस चरण में इसका पता लगने पर घुटने या नितंब रिप्लेसमेंट सर्जरी ही इसका एकमात्र इलाज हो सकता है। अर्थराइटिस के अंतिम चरण में पहुंच जाने के कारण हड्डियों में भी विकृति आ सकती है जिनका इलाज असंभव है।

डॉ. विनय गुप्ता

एचओडी (सेंटर फॉर रिपलेसमेंट एंड ओर्थोपेडिक्स)

सरोज सुपरस्पेशैलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली

नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।) 

(देशबन्धु में प्रकाशित लेख का संपादित अंश.)

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