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असाधारण ‘परीक्षा’ की साधारण क्लास 

असाधारण ‘परीक्षा’ की साधारण क्लास 

pareeksha on stage app

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"परीक्षा" स्टेज ऐप पर

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Pariksha | Vipan Malawat | Rajasthani Web Series | STAGE APP

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परीक्षा नाम आते ही सबसे पहले ध्यान में क्या आता है? स्कूल के बच्चे और नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए वह ‘परीक्षा’ जिसे पास करके वे जीवन में एक कदम ओर आगे बढ़ते हैं।

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यूँ देखा जाए तो इस दुनिया का हर आदमी हर कदम पर किसी न किसी रूप में परीक्षा में बैठा नजर आता है। कभी संबंधों की, कभी अपनों की, कभी परायों की, कभी दोस्तों की, कभी रिश्तेदारों की। लेकिन आखिर यह कौन सी ‘परीक्षा’ है? जिसमें किसी राज्य विशेष के लाखों बच्चे बैठे हैं फिर वह कोई रिक्शे वाला हो, मजदूर हो या अभी-अभी जिसकी शादी हुई हो। तो जनाब ये परीक्षा है रीट की।

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कुछ अरसे पहले राजस्थान में हुई इस परीक्षा को लेकर जो खबरें आईं उसने पूरे राज्य की साख को राजनीतिक ही नहीं हर तरह से बट्टा लगाया। बस अब इसी परीक्षा के नाम को भुनाने में लगा एक क्षेत्रीय सिनेमा के नाम वाला ओटीटी प्लेटफ़ार्म स्टेज एप्प। नाम तो सुना ही होगा? तो चलिए शुरू करते हैं...

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भाई हरियाणा में खूब नाम हो गया अब राजस्थान की तरफ रूख करें?

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हाँ छोटे करना तो चाहिए आखिर अपना नाम और बिजनेस भी तो और बड़ा करना है। हाँ सही कहा छोटे बहुत हुआ विज्ञापन और शार्क टैंक अब थोड़ा इमोशनल गेम कार्ड खेला जाए! हाँ भाई बात तो सही कह रहे हो। बस फिर क्या देख रहा है वो राजस्थान वाले कंटेंट चुनने वाले को फौरन हाजिर करो और कहो उसे लेकर आये कोई ऐसी तड़कती-भड़कती, ताज़ी कहानी।

ठीक है भईया बोलता हूँ।

हाँ... हाँ...सर जी एक जानकार है मेरा उसको बोलूं? क्या नाम है? सर जी नाम है ‘विपन मालावत’ सुना है एक फिल्म बनाई थी छोटी। छोटी!!! अरे हाँ शॉर्ट फिल्म...! ओ अच्छा.... ठीक है हायर करो उसे।

अच्छा सुनो कंटेंट वाले भाई। ये विपन कहानियां कैसी लिखता है?

लिखता तो अच्छी है इमोशनल ड्रामा पूरा ऐसा कि सामने वाला रो पड़े।

बस... बस... हो गया काम। बजट चार-छ का बोल देना। बाकी देखते हैं।

हाँ ठीक है ओके...

विपन भाई काम लाया मैं तेरे लिए देख एक अच्छी सी इमोशनल कहानी मांग रहा है यार मालिक। अब तू कुछ ऐसा लिख कि वो सुनकर रोने लगे और बजट से तेरी झोली भर दे।

ठीक है...

अरे कंटेंट भाई रीट बड़ा वायरल हुआ था अपने यहाँ और फिर थोड़े टाइम पहले टीवीएफ़ (द वायरल फीवर) वाले भी तो यू पी एस सी कहानी लेकर आये थे। सब पागल हो गये थे संदीप भईया के पीछे।

अरे विपन भाई कमाल हो गया ये तो बस लिख डालो आप तो। पास मैं करवा ही दूंगा।

तो बस ऐसे बनी आपकी रीट हमारी रीट सबकी रीट....

ओ हो! सबकी नहीं भाई निर्माता निर्देशक की। नाम मिला ‘परीक्षा’ पास भी की ‘परीक्षा’ पर दमखम लगाकर नहीं बैठे ना! हो गया बेड़ा गर्क...

इमोशनल कार्ड तो चल जाएगा ही बाकी राजस्थान की जनता तो बस भाई आगे मत कहना कुछ!

तो कुल निचोड़ ये है कि ‘रेडुआ’ से दुःख भरे राग सुनाकर निर्देशक ‘विपन मालावत’ ने जो दिल लूटा था वह ‘परीक्षा’ में लूटा लेकिन उतना अच्छे से नहीं। अरे भाई जब कायदे से कहानी स्क्रिप्ट की शक्ल में ढालकर उसे मथा नहीं जाएगा तो फिर कितनी ही अच्छी एक्टिंग कोई क्यों न कर ले वह जो काम करने आई वो तो नहीं कर पाएगी न!

परीक्षा के तमाम एक्टर्स काम तो अच्छा करते नजर आये लेकिन सिनेमैटोग्राफी और वीएफ़एक्स के साथ मिलकर एडिटर, कैमरामैन, साउंड, म्यूजिक वाले ने जो रचा वह प्रभाव नहीं डाल पाया तो दोष किसका? ऐसा नहीं है कि इस सीरीज के लेखकों ने कहानी ही खराब चुनी।

कहानी तो ए वन क्लास है। बस कुछ संवाद सिनेमा की अपनी पिच, लय, ताल, रिदम के साथ आते और जो रूलाने की कोशिश कर रहे थे सचमुच रुला पाते तो होती यह पास फर्स्ट डिविजन। बस एक जगह है जहाँ नायक परीक्षा देने पहुंचा तो उसे अंदर नहीं घुसने दिया गया। यह पल जरुर थोड़ा भावुक करता है वरना तो बाकी ‘राहगीर’ का लिखा एक गाना ‘ध्यानकी’ बस दिल में उतर जाता है और आप इस हल्की सी इमोशनल कहानी को बिना किसी बोझ के देखते चले जाते हैं। काश की इसके निर्माता, निर्देशक, लेखक आदि पूरी ऊपर से नीचे तक की टीम पूरी तैयारी से परीक्षा देती तो यह उस ‘विपन मालावत’ के सिनेमाई करिश्में को सामने ला पाती जिसके लिए वे जाने जाते हैं।

ऐसी फिल्मों में निर्देशक का कोई दोष नहीं होता। होता है दोष तो ऐसे सिनेमा को बिना किसी पूर्व तैयारी के अच्छे से पढ़े,गुने बिना परीक्षा में बैठ जाने वालों का। निर्देशक का तो क्या है उसे तो निर्माता चाहिए वह जो जितना आदेश करेगा जितना बजट देगा उसी में उसे करना है सब। ऐसी सीरीज बजट की कमियों से अछूती नहीं रहती उसका कारण आप खुद इसे देखकर पता लगायें।

जब असाधारण ‘परीक्षा’ में बैठते समय आपकी तैयारी ही साधारण स्तर की होगी तो सफल कैसे होंगे!

स्टेज वालों को अभी भी समय रहते अपने एप्प्लिकेशन में बहुतेरे बदलाव लाने की आवश्यकता है जब तक वे इसे नहीं समझेंगे अच्छे और गंभीर दर्शक भी उनके यहाँ नहीं आएंगे। बस आपके वही दर्शक रहेंगे जो सबक्रिप्शन लेने को रिचार्ज करना है बोलेंगे।

अपनी रेटिंग – 2.5 स्टार

तेजस पूनियां

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