Home » Latest » लोग अपने झूठ से हार जाते हैं, अक्सर
Sara Malik, सारा मलिक, लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

लोग अपने झूठ से हार जाते हैं, अक्सर

अपनी-अपनी जगह सही

पता नहीं किसी बात पर दो झूठे,

बहुत देर से अड़े हुए थे

 सही और सच के लिए पूरी ताकत से खड़े हुए थे

 मन से, दिमाग से,  

 चुपचाप दोनों को अलग-अलग सुन रही थी

आमतौर पर लोग सच से हारते नहीं हैं,

क्योंकि वो इतने बहादुर नहीं होते,

इसलिए लोग अपने झूठ से हार जाते हैं, अक्सर

कुछ देर बाद

दोनों एक दूसरे से हंसते हुए बोले

भाई !

आप अपनी जगह सही हो, और मैं अपनी जगह,

 हम इस बहस में किस लिए फंसे हुए हैं?

दोस्त होकर, टाइम खराब कर रहे हैं

मैं डर गई और सोचने लगी उन्हें देखकर,

इन दोनों ने मिलकर सच को मार तो नहीं डाला

मैंने कहा उनसे

आप दोनों की ये सही जगह

 अलग-अलग और एक साथ

 दोनों तरह से, देखना चाहती हूं

यह सुनकर वह दोनों मुझे देखते हुए यूं  उठे, कि जैसे

 ना मैं समाज का हिस्सा हूं ना नागरिक

इसलिए भूख, प्यास और बेरोज़गारी, मेरी ज़रूरतों पर

सरकार की कोई जवाबदेही बनती ही कहां है?

सारा मलिक

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

दिनकर कपूर Dinkar Kapoor अध्यक्ष, वर्कर्स फ्रंट

सस्ती बिजली देने वाले सरकारी प्रोजेक्ट्स से थर्मल बैकिंग पर वर्कर्स फ्रंट ने जताई नाराजगी

प्रदेश सरकार की ऊर्जा नीति को बताया कारपोरेट हितैषी Workers Front expressed displeasure over thermal …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.