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कोविड मरीजों में सांस की तकलीफ हो सकती है दिल की बीमारी का संकेत- अध्ययन

Shortness of breath may be a sign of heart problem in long covid patients – study

यूरोइको 2021, यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) की एक वैज्ञानिक कांग्रेस {EuroEcho 2021, a scientific congress of the European Society of Cardiology (ESC)} में प्रस्तुत एक छोटे से अध्ययन “‘Persistent dyspnea 1 year after COVID-19 infection in apparently healthy subjects: a potential indicator of subclinical cardiac dysfunction’” में कहा गया है कि संक्रमण से उबरने के एक साल बाद भी शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस की तकलीफ जारी रखने वाले कोविड​​-19 रोगियों को दिल की क्षति हो सकती है।

कोविड के ऐसे मरीज जिन्हें इस बीमारी से ठीक हुए एक वर्ष हो चुका है लेकिन अधिक शारीरिक गतिविधियों के दौरान सांस लेने संबंधी दिक्क्तें इस बात का संकेत हो सकती है कि इस बीमारी ने उनके दिल को नुकसान पहुंचाया है।

long covid : दिल की बीमारियों में हो रही बढ़ोत्तरी

बेल्जियम में यूनीवर्सिटी हॉस्पिटल ब्रुसेल्स की शोधकर्ता डॉ. मारिया- लुइजा लुचियान (Luchian Maria Luiza, Research and non-invasive cardiac imaging fellow) के नेतृत्व में किए गए शोध में इस बात का खुलासा किया गया है कि कोविड-19 की वजह से लोगों में दिल की बीमारियों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है और इसकी वजह से उन्हें लंबी अवधि तक सांस लेने में दिक्कतें हो सकती है जिन्हें लंबा कोविड (long covid) कहा जाता है।

इस दल ने पता लगाने की कोशिश की कि क्या ऐसे मरीजों में दिल की कोई असामान्यता अधिक देखी जा रही है।

इस अध्ययन ने जांच की कि क्या डिस्पेनिया के लंबे कोविड रोगियों (long COVID patients with dyspnoea) में उपनैदानिक ​​हृदय असामान्यताएं अधिक सामान्य थीं – जिससे संभावित रूप से उनके लक्षणों का कारण बताया गया।

डॉ. मारिया- लुइजा लुचियान ने कहा हमारे अध्ययन से पता चला है कि कोविड के एक तिहाई से अधिक ऐसे मरीज जिन्हें इस बीमारी से पहले दिल या फेंफड़ों की कोई बीमारी नहीं थी लेकिन कोविड से ठीक होने के एक वर्ष बाद उनमें सांस लेने में दिक्कतें देखने को मिली और इससे यह पता चल सकता है कि आखिर उनमें सांस लेने में दिक्कतों का क्या कारण हो सकता है। इसका संबंध कहीं न कहीं दिल के स्वास्थ्य से जुड़ा हो सकता है।

इस शोध में ऐसे 66 मरीजों को शामिल किया गया जिनमें पहले दिल या फेंफड़ों की कोई बीमारी नहीं थीं लेकिन जिन्हें मार्च और अप्रैल 2020 के दौरान कोविड की बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था ।

इन्हें अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के एक वर्ष बाद उनके स्पाइरोमीटर टेस्ट (spirometer test) तथा सीटी स्कैन (CT scan) के अलावा दिल का अल्ट्रासाउंड किया गया और इसमें नयी इमेजिंग तकनीक को इस्तेमाल किया गया था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि उनके दिल की कार्यप्रणाली में कोई असामान्यता तो नहीं आ गई है। इसमें जिन मरीजों को शामिल किया गया था उनकी औसत आयु 50 वर्ष थी तथा इनमें से 67 प्रतिशत पुरूष थे। एक वर्ष बाद लगभग 23 मरीजों को सांस लेने में दिक्कतें देखीं गई थी।

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

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