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plasma membrane in hindi

प्लाज्मा झिल्ली : जानिए क्या झिल्लियों के किनारों पर बसता है जीवन?

कोशिका क्या है ?

कोशिका जीवन की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है (Cell is the structural and functional unit of life), यह हम पढ़ते-पढ़ाते रहे हैं। सभी जीव, चाहे पौधों हों या जन्तु, इन्हीं इकाइयों से बने हैं। इसी इकाई से ऊतकों की दहाई-सैकड़ा बनती है और फिर हजारों कोशिकाओं से विभिन्न अंग बनते हैं और ऐसे कई अंग मिलकर एक जीव बनाते है।

जीवित और मृत निर्धारण में कोशिका की भूमिका (Role of cell in living and dead determination)

जीवन को चलाए रखने के लिए लगातार पदार्थ व ऊर्जा की आवश्यकता बनी रहती है। जो कोशिकाएं अपने पर्यावरण के साथ यह आदान-प्रदान करती रहती हैं उन्हें या उनसे बने जीवों को हम जीवित कहते हैं। और जो जीव यह आदान-प्रदान बन्द कर देते हैं उन्हें मृत कहा जाता है। 

प्लाज्मा झिल्ली क्या होती है? | Plasma Membrane in Hindi

जीवों के द्वारा अपने पर्यावरण के घटकों अर्थात मिट्टी, जल और वायु से पदार्थ का जो आदान-प्रदान है वह किसी भी कोशिका की बाहरी झिल्ली द्वारा ही होता है। इसे प्लाज्मा झिल्ली कहते हैं।

प्लाज्मा झिल्ली ही कोशिका के जीवद्रव्य को बाहरी पर्यावरण से अलग करती है। यह ऐसा कैसे कर पाती है?

आखिर प्लाज्मा झिल्ली में ये गुण कैसे आए?

एक पुस्तक में प्लाज्मा झिल्ली के बारे में पढ़ा तो लगा कि ये झिल्लियां तो अद्भुत हैं। लगा कि यदि यह समझना है कि जीवन क्या है (what is life) तो कोशिका झिल्लियों की रचना और कार्य प्रणाली (structure and function of cell membranes) को समझना जरूरी है।

पुस्तक के झिल्ली सम्बंधी अध्याय की पहली लाइन किनारों पर जीवन ही मुझे भा गई और लगा कि जिस जीवन को हम समझना चाहते हैं वह झिल्लियों के आसपास ही तो नहीं। झिल्लियां ही किसी जीव को जीवित बनाती हैं। झिल्लियां अपना काम करना बन्द कर दें तो जीव धीरे-धीरे मर जाता है। जीवित और मृत में यही एक बड़ा अंतर है।

तो आइए झिल्लियों को जाने, जीवन को समझें। झिल्ली क्या है?

प्लाज्मा झिल्ली को जीवन का किनारा कहा गया है। यह वह सीमा है जो कोशिका को उसके परिवेश से अलग करती है। साथ ही कोशिका के अन्दर-बाहर पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है। यह कुछ पदार्थों को अन्य पदार्थों की तुलना में आसानी से आर-पार जाने देती है। इसे चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) कहते हैं। कोशिका द्वारा अपने पर्यावरण के साथ रासायनिक आदान-प्रदान में विभेद करने की क्षमता जीवन के लिए मूलभूत महत्व का गुण है। इस गुण को चयनात्मकता कहते हैं और प्लाज्मा झिल्ली और उसके घटक (Plasma membrane and its components) ही इस चयनात्मकता को सम्भव बनाते हैं।

प्लाज्मा झिल्ली की बनावट (प्लाज्मा झिल्ली की संरचना | Structure of Plasma Membrane)

प्लाज्मा झिल्ली लिपिड्स, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से बनी होती है। अधिकांश झिल्लियों में प्रचुरता से पाए जाने वाले लिपिड फास्फोलिपिड्स (lipid phospholipids) होते हैं। फास्फोलिपिड्स द्वारा झिल्ली बनाने की क्षमता उनकी आणविक संरचना में समाई है।

फास्फोलिपिड अणु उभय संवेदी होते हैं अर्थात इनका एक हिस्सा जलस्नेही और दूसरा सिरा जलद्वैषी होता है। फास्फोलिपिड का जलस्नेही हिस्सा पानी के संपर्क में रहना चाहता है जबकि जल द्वेषी हिस्सा पानी से दूर रहना चाहता है।

फास्फोलिपिड्स की दोहरी परत बन जाए तो दो जलीय प्रकोष्ठों के बीच एक टिकाऊ अहाता बन जाता है, क्योंकि फास्फोलिपिड के जल द्वेषी हिस्से इस परत में अंदर की ओर जम जाते हैं जबकि इनके जलस्नेही सिरे पानी के सम्पर्क में होते हैं।

झिल्ली में तरह-तरह के प्रोटीन पाए जाते हैं और समूहों में पाए जाते हैं जो लिपिड की दोहरी पर्त में यहां-वहां धंसे रहते हैं।

लाल रक्त कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली में ही अब तक लगभग 50 अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन खोजे जा चुके है। अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में अलग-अलग किस्म के झिल्ली प्रोटीन मिलते हैं। और तो और, एक ही कोशिका की विभिन्न झिल्लियों में भी झिल्ली प्रोटीन अलग-अलग होते हैं।

कितनी तरह के झिल्ली प्रोटीन? | How many types of membrane proteins?

झिल्ली में प्रोटीन की स्थिति के आधार पर दो तरह के प्रोटीन चिन्हित किए गए हैं। अंतरंग प्रोटीन और परिधीय प्रोटीन।

अंतरंग प्रोटीन (intimate protein) झिल्ली की लिपिड की दोहरी परत में आंतरिक जलद्वेषी भाग में अन्दर तक धंसे होते हैं। इनके जलस्नेही भाग झिल्ली के दोनों ओर जलीय विलयनों के सम्पर्क में रहते हैं। कुछ प्रोटीन्स में एक या एक से अधिक जलस्नेही प्रवाह मार्ग होते हैं जो झिल्ली में से जल और जलस्नेही पदार्थों को भी पार होने देते हैं। 

दूसरी ओर, परिधीय प्रोटीन (peripheral protein) लिपिड की दोहरी पर्त में धंसे हुए नहीं होते। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है वे ऊपर-ऊपर रहते हैं। ये झिल्ली की सतह से ढीले-ढाले ढंग से जुड़े रहते हैं और प्राय: अंतरंग प्रोटीन्स के हिस्सों के सम्पर्क में रहते हैं। एक अकेली कोशिका पर ऐसे कई सतही झिल्ली प्रोटीन हो सकते हैं जो अलग-अलग काम करते हैं जैसे कोशिका से परिवहन, एंजाइमी गतिविधि या कोशिका को आसपास की अन्य कोशिकाओं से जोड़ना इत्यादि।

कोशिकाएं एक-दूसरे और अपने पराए की पहचान कैसे करती हैं?

झिल्ली पदार्थों के आवागमन पर नियंत्रण, संदेशों के आदान-प्रदान और आसपास की कोशिकाओं को जोड़ने के अलावा एक महत्वपूर्ण कार्य और करती है। यह है अपने-पराए की पहचान। किसी भी जीव के कामकाज के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन अपना है और कौन पराया। उदाहरण के लिए यह क्षमता जन्तु भ्रूण में कोशिकाओं को ऊतकों और अंगों के रूप में व्यवस्थित करने के लिए जरूरी है। झिल्ली का यह गुण प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा किसी पराई कोशिका को अस्वीकार करने का भी आधार है।

कोशिकाएं एक-दूसरे की पहचान प्लाज्मा झिल्ली की बाहरी सतह पर उपस्थित अणुओं से करती है जो प्राय: कार्बोहाइड्रेट होते हैं। झिल्ली के कार्बोहाइड्रेट आम तौर पर छोटे-छोटे (15 से कम शर्करा इकाइयों वाले) और शाखित होते हैं। कुछ कार्बोहाइडेट्स लिपिड्स से जुड़े होते हैं। इस तरह बने अणुओं को ग्लाइकोलिपिड्स (glycolipids) कहते हैं। वैसे अधिकांश कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन्स से जुड़े होते हैं। इन्हें ग्लाइकोप्रोटीन (glycoprotein) कहते हैं। प्लाज्मा झिल्ली की बाहरी सतह पर उपस्थित कार्बोहाइड्रेट अलग-अलग प्रकार के होते हैं। यहां तक कि एक ही जीव की अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में अलग-अलग कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। ये झिल्ली-कार्बोहाइड्रेट पहचान चिन्ह के रूप में कार्य करते है और एक कोशिका को दूसरी कोशिका से अलग बनाते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य के रक्त समूह (ए, बी, एबी तथा ओ) लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर ग्लायकोप्रोटीन्स की विविधता के कारण है।

झिल्ली प्रोटीन्स और झिल्लियों के प्रमुख कार्य (Membrane proteins and major functions of membranes)

1. परिवहन — जो प्रोटीन झिल्ली की पूरी चौड़ाई में फैले रहते हैं, वे झिल्ली के आर-पार जलस्नेही प्रवाह मार्ग उपलब्ध कराते हैं। कुछ झिल्ली प्रोटीन ऊर्जा के स्रोत के रूप में एटीपी का जल विच्छेदन (ATP hydrolysis) करते हैं और उससे प्राप्त ऊर्जा का उपयोग पदार्थों को आर-पार पहुंचाने में करते हैं।

2. एंजाइमी गतिविधियां (enzymatic activities) — झिल्ली में धंसा हुआ कोई प्रोटीन एंजाइम भी हो सकता है। झिल्ली में कई एंजाइम एक टीम के रूप में व्यवस्थित होते है जो शरीर-क्रिया के चरणों को क्रमिक रूप से अंजाम देते हैं। श्वसन क्रिया के एंजाइम माइटोकाण्ड्रिया की झिल्ली में ही पाए जाते हैं।

3. संदेश प्रसारण —  कुछ झिल्ली प्रोटीन में ऐसे विशिष्ट आकार के जुड़ाव स्थल होते हैं जो किसी संदेशवाहक (जैसे हारमोन) के आकार में फिट हो जाएं। ऐसे प्रोटीन बाहरी संदेशों को कोशिका के अन्दर पहुंचाते हैं।

4. कोशिका की पहचान — प्लाज्मा झिल्ली की सतह पर उपस्थित ग्लायकोप्रोटीन पहचान चिन्ह की तरह काम करते हैं जिन्हें अन्य कोशिकाओं के प्रोटीन पहचानते हैं।

5. कोशिका कंकाल और बाहरी कोशिका मैट्रिक्स — कोशिका कंकाल के सूक्ष्म तंतु अन्य झिल्ली घटकों से जुड़ सकते हैं। ऐसा करने से कोशिका का आकार बना रहता है। जो प्रोटीन्स बाह्य कोशिकीय मैट्रिक्स से जुड़ते हैं वे कोशिका के अन्दर और बाहर होने वाले परिवर्तनों का समन्वय करते हैं।

प्लाज्मा झिल्ली कोशिका के व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने और बाहरी पदार्थों, जीवों को निगल कर अन्दर करने का काम भी करती है। इन क्रियाओं को क्रमश: कोशिका बहिर्वेशन और कोशिका अंतर्वेशन (cell extravasation and cell insertion) कहते हैं।

संक्षेप में कहें तो झिल्लियां ही प्रकृति के विभिन्न तत्वों को अपने अन्दर समेटकर उन्हें जीव द्रव्य का रूप देती है जो हर जीव का एक खास जीवित हिस्सा होता है। झिल्ली संक्रामक जीवों को कोशिका में प्रवेश नहीं करने देती और व्यर्थ हानिकारक पदार्थों को चुन-चुन कर बाहर फेंकती है। झिल्ली ही संदेशों को पढ़ती है, उनका आदान-प्रदान करती है, कोशिका के आंतरिक पर्यावरण पर नियंत्रण रखती है।

डॉ. किशोर पंवार

Web title : Does life live on the edges of membranes?

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