पीएमओ की सफाई ने आशंकाओं का समाधान करने की बजाय उन्हें और गहरा कर दिया है

Prime Minister, Shri Narendra Modi paying tributes to the Martyrs during the Virtual Conference with the Chief Ministers, in New Delhi on June 17, 2020.

सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री के बयान पर पीएमओ की  सफाई/व्याख्या (PMO’s clarification / explanation on Prime Minister’s statement in all-party meeting) ने जितना सुलझाया उससे ज्यादा उलझा दिया।

अब उस सफाई पर सफाई की जरूरत !

उस दिन प्रधानमंत्री ने कहा था,

“हमारी जमीन पर न कोई घुसा, न घुसा हुआ है”

अपनी सफाई में पीएमओ ने कहा है कि, ” PM की उक्त टिप्पणी का फोकस 15 जून की गलवान की घटना थी…….PM का यह कहना कि LAC के हमारी तरफ चीनी उपस्थिति नहीं थी, यह उस दिन की परिस्थिति के बारे में है, जो हमारे बहादुर जवानों के शौर्य की वजह से सम्भव हुई थी। हमारे जवानों के बलिदान ने चीनी पक्ष द्वारा उस दिन, LAC के इस बिंदु पर structure खड़ा करने की कोशिश को विफल कर दिया तथा सीमा के अतिक्रमण के प्रयास को नाकाम कर दिया। “

पीएमओ के अनुसार निचोड़ यह है कि “वहां उस दिन जिन लोगों ने हमारी सीमा के अतिक्रमण का प्रयास किया उन्हें हमारे बहादुर धरती पुत्रों ने सही सबक सिखाया”

और अंत में पीएमओ की सफाई कहती है, ” 60 साल में जो हमारी 43000 वर्ग किमी जमीन अवैध कब्जे में गँवा दी गयी है, उसकी परिस्थितियों से देश परिचित है।”

तो क्या पीएमओ यह कहना चाहता है कि प्रधानमंत्री का “न घुसा, न घुसा हुआ है” वाला बयान केवल और केवल 15 जून को गवलान घाटी के उस खास बिंदु के बारे में है ?

तो 15 जून के पूर्व की तथा गवलान घाटी के उस खास प्वाइंट के इतर क्या स्थिति है, इस पर प्रधानमंत्री चुप रहे, उस पर उनका बयान लागू नहीं होता ?

तो क्या 15 जून के महीनों पहले से उस पूरे इलाके में चीनी घुसपैठ की जो बात सेना के तमाम पूर्व अधिकारी, डिफेंस एक्सपर्ट्स कर रहे हैं, वह सच है ?

पीएमओ की इस सफाई ने दरअसल उक्त आशंकाओं का समाधान करने की बजाय उन्हें और गहरा कर दिया है!

लाल बहादुर सिह, नेता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट
लाल बहादुर सिह, नेता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट

क्या प्रधानमंत्री सामने आकर अपने बयान और उस पर अपने कार्यालय की सफाई से राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर प्रश्न पर जो महा confusion पैदा हुआ है, उसे स्पष्ट करेंगे ?

इतिहास के अनुभवों की रोशनी में, वर्तमान परिस्थिति की नजाकत और तात्कालिक तथा भावी राष्ट्रीय हितों की रोशनी में प्रधानमंत्री जैसे भी इस का समाधान करना चाहते हों, जो भी उनका रोडमैप हो, उसे ईमानदारी से, पारदर्शी ढंग से देश की जनता के सामने रखना चाहिए,

अर्धसत्य, सच्चाई से लुकाछिपी, शुतुरमुर्गी चाल हमारे राष्ट्रीय हितों तथा इस क्षेत्र में शान्ति और प्रगति के लिए घातक साबित होगी !

लाल बहादुर सिंह

पूर्व अध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ

पाठकों सेअपील - “हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें