पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन

पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन

भू-राजनीति को लेकर पोप फ़्रांसिस की दिलचस्पी (Pope Francis’ interest in geopolitics), रूसी विदेश नीति (Russian foreign policy) के प्रति पोप की सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।

Pope, Putin and Ukraine Crisis

(न्यूजक्लिक) अगर वैश्विक राजनीति में पोप की हैसियत (The Pope’s Status in Global Politics) कभी चली गयी थी तो इस समय ऐसा लग रहा है कि उस हैसियत की वापसी हो गयी है। पोप फ़्रांसिस का शुक्रवार का रोम स्थित रूसी दूतावास का दौरे (Pope Francis visits Russian Embassy in Rome) का यह संकेत निस्संदेह कई कारणों से एक उल्लेखनीय घटना है।

पोप फ़्रांसिस की एक ‘उदारवादी पोप’ के तौर पर चिरस्थायी प्रतिष्ठा रही है। उन्हें प्रगतिशील विचारों का श्रेय दिया जाता है। जिस पोप ने कभी पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ मिलने से इनकार कर दिया था, उसी पोप का कीव के बाहरी इलाक़े में पहली बार रूसी टैंकों की क़तार दिखायी देने की ख़बरें आने के कुछ ही घंटों के भीतर होने वाला यह दौरा हैरान करता है।

क्या पोप जो कुछ करते हैं वह संयोग होता है या प्रयोग (Is everything the Pope does a coincidence or an experiment?)

वेटिकन में राजनयिकों और जासूसों, ‘विशेषज्ञ समूहों’ और पत्रकारों की सदियों पुरानी ‘विदेशी सेवा’ रही है।

ऐसा नहीं है कि पोप जो कुछ भी करते हैं, वह महज़ संयोग होता है। वहां भी भारी भरकम वेटिकन नौकरशाही है, जो कि पोप के लिए फ़ैसले लेती है। लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि फ़्रांसिस की शुक्रवार को रूसी दूतावास का वह दौरा उनकी व्यस्तताओं के नियमित दैनिक कार्यक्रम की सूची में नहीं था।

यह दौरा अपनी तरह की ऐसी इकलौती घटना है, जो पहली ही नज़र में पोप से जुड़ा एक ऐसा प्रतीक बन जाता है, जिसकी हाल के दिनों में कोई मिसाल नहीं मिलती।

सीएनएन ने बताया कि पोप रूसी राजदूत के साथ डेढ़ घंटे से ज़्यादा समय तक बात करते रहे।

फ़्रांसिस ने यूक्रेन में संघर्ष के शांतिपूर्ण ख़ात्मे का आह्वान किया है और कैथोलिकों से आग्रह किया है कि वे यूक्रेन में शांति को लेकर उपवास और प्रार्थना के लिए बुद्धवार के दिन को समर्पित कर दें।

यूक्रेन के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि यह है कि 2014 में यूक्रेन में सीआईए प्रायोजित तख़्तापलट के बाद और कीव में नये शासन की तरफ़ से रूसी-विरोधी रुख़ अख़्तियार करने की शुरुआत के बाद रूढ़िवादी ईसाई धर्म में एक दरार आ गयी थी, क्योंकि यूक्रेन ने दिसंबर 2018 में यूक्रेनियन ऑर्थोडॉक्स चर्च (Ukrainian Orthodox Church) नाम से अपने ख़ुद के रूढ़िवादी चर्च की स्थापना करते हुए ख़ुद को रशियन ऑर्थोडॉक्स चर्च (Russian Orthodox Church) से अलग और स्वायत्त कर लिया था।

यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको का वह कथन बहुत मशहूर है, जिसमें उस औपचारिक विभाजन को चिह्नित करने के लिए कीव स्थित सेंट माइकल कैथेड्रल के सुनहरे गुंबदों के नीचे इकट्ठे हुए जश्न मानते आस्थावानों के जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि उनका देश अब ‘मास्को के प्याले से मास्को का ज़हर नहीं पीयेगा’।

2018 के आख़िर और 2019 की शुरुआत तक, जब यूक्रेन में रूढ़िवादी ईसाइयों ने रूस की ऑर्थॉडॉक्स पैट्रियार्क से स्वतंत्रता, या बाहरी और ख़ास तौर पर पितृसत्तात्मक अधिकार से आज़ादी का ऐलान कर दिया था, तब आम तौर पर रूसी मूल के लोग सदमे और तबाही जैसी दो एहसास के बीच बीच फंसकर रह गये थे।

कॉन्स्टेंटिनोपल का ऑर्थोडॉक्स चर्च तुरंत हर हाल में यूक्रेनी रूढ़िवादी चर्च की इस स्वतंत्रता को मान्यता देने के लिहाज़ से हरक़त में आ गया था, जबकि रूसी ऑर्थोडॉक्स नेताओं ने इस ख़ारिज कर कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि इस समय यूक्रेन में दो विरोधी ऑर्थोडॉक्स गुट हैं।

ऑर्थोडॉक्स चर्च इस फूट के भंवर में है कि फ़्रांसिस ने इस मामले में दखल दिया है। कोई शक नहीं कि वह इसे लेकर गहरे तौर पर सचेत रहे होंगे। वास्तव में ऐसी सोच है कि रूस और यूक्रेन के बीच राजनीतिक दरार धार्मिक क्षेत्र तक भी फैली हुई है या फिर धार्मिक दरार राजनीतिक क्षेत्र तक फैला हुई है। यह देखते हुए कि राष्ट्रपति पुतिन ख़ुद ही एक कट्टर रूढ़िवादी ईसाई हैं और निजी तौर पर मॉस्को के पैट्रियार्क किरिल के क़रीबी हैं, ऐसे में यह सोच इस बात पर निर्भर करती है कि कोई इसे किस तरह देखता है।  

यूक्रेन में कैथोलिक की संख्या कितनी है? (How many Catholics are there in Ukraine?)

यूक्रेन में कैथोलिकों की आबादी तक़रीबन 4-5 मिलियन है, जो कुल आबादी का लगभग 9% है। यूक्रेनी कैथोलिक धर्म पर लैटिन संस्कार वाले कैथोलिकों के मुक़ाबले ग्रीक कैथोलिकों का असर ज़्यादा है।

यूक्रेनी कैथोलिक चर्च पूर्वी संस्कार वाला एक ऐसा कैथोलिक चर्च है, जो अपने प्रमुख के तौर पर पोप को मान्यता तो देता है, लेकिन उनकी प्रार्थना पद्धति बीजान्टिन वाली है।

फ़्रांसिस को रिश्तों, निजी भेंट-मुलाक़ातों और विश्वव्यापी प्रतीकों के ज़रिये दुनिया के इसाइयों और चर्चों के बीच की एकजुटता को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है। असल में 1054 में इसाइयों के बीच ब़ड़ा फूट पड़ गया था और इसका नतीजा यह हुआ था कि कैथोलिक चर्च और ऑर्थोडॉक्स चर्च बतौर समुदाय अलग-अलग हो गये थे। उस घटना के लम्बे समय वाद फ़्रांसिस ही वह पोप हैं, जिन्होंने पहली बार पैट्रियार्क ऑफ़ द रशियन चर्च (Patriarch of the Russian Church – ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्चों में सबसे बड़े चर्च) के मुखिया से मुलाक़ात की थी। वह फ़रवरी 2016 में क्यूबा के हवाना के पास स्थित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक वीआईपी कमरे में एक पूर्व निश्चित बैठक में पैट्रिआर्क किरिल से मिले थे। (इस मौक़े पर भाग लेने वाले क्यूबा के जाने माने लोगों में राष्ट्रपति राउल कास्त्रो भी शामिल थे।) दो घंटे की उस निजी मुलाक़ात के बाद उन्होंने कई मामलों पर उस संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किये थे, जो ईसाई चर्च की एकजुटता और ‘ईसाई धर्म में आस्था रखने वाले बिरादरियों’ के रूप में उनकी अनूठी भूमिका पर केंद्रित था।’

विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति पुतिन ने विश्व मंच पर रूस के प्रभाव और पैट्रिआर्क किरिल के साथ अपने ‘राजनीतिक सम्बन्ध’ पर ज़ोर दिया था, इसके देखते हुए पैट्रिआर्क किरिल के साथ फ़्रांसिस की उस मुलाक़ात का एक भू-राजनीतिक आयाम भी था। इसे कुछ और समझने की ज़रूरत है।

यह सबको मालूम है कि पैट्रिआर्क किरिल की नीतियों ने पिछले दो दशकों में रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च को रूसी सरकार के क़रीब ला दिया है।

2012 में रूस के राष्ट्रपति चुनाव (Russian presidential election) में उन्होंने खुले तौर पर पुतिन का समर्थन किया था, उन्होंने पुतिन के राष्ट्रपति होने के कार्यकाल की तुलना ‘किसी ईश्वरीय चमत्कार’ से की थी।

अब यह कोई रहस्य वाली बात तो रह नहीं गयी है कि मॉस्को पैट्रिआर्केट ने रूसी अंतर्राष्ट्रीय नीति (Russian International Policy) के एक हथियार के रूप में काम किया है और यह क्रेमलिन के राजनीतिक हितों के लिहाज़ से उसके पक्ष को दुनिया भर में एक असरदार तरीक़े से पहुंचाने का ज़रिया रहा है।

असल में ख़ुद को मुखर करने के लिए उत्सुक रूस की ओर से फ़्रांसिस के ख़ुद के इस्तेमाल किये जाने की अनुमति देने के सिलसिले में पोप फ़्रांसिस की आलोचना (Criticism of Pope Francis) भी हुई थी। लेकिन, फ़्रांसिस ने अपनी इस आलोचना का जवाब तैयार कर लिया था। जब उनसे रूस और चीन की यात्रा करने वाले पहले पोप होने की संभावना को लेकर सवाल किया गया था, तो फ़्रांसिस ने एक बार अपने दिल की ओर इशारा करते हुए कहा था, ‘चीन और रूस, मेरे पास यहां हैं। प्रार्थना करें।’

पुतिन पोप से कितनी बार मिले?

पुतिन तीन बार फ़्रांसिस से मिल चुके हैं। अगर पहले कभी ऐसा हुआ हो, तो अलग बात है, लेकिन किसी विश्व स्तर के राजनेता के लिए पोप के साथ मुलाक़ातों की यह तिकड़ी बेहद दुर्लभ संयोग है। वे दोनों राजनीति पर चर्चा करने के लिए जाने जाते हैं।

कहा जाता है कि कैथोलिक चर्च के किसी भी नेता ने अभी तक रूसी ऑर्थॉडॉक्सी क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है,जबकि रूसी ऑर्थॉडॉक्सी क्षेत्र पोप की यात्रा का एक प्रतिष्ठित गंतव्य बना हुआ है।

फ़्रांसिस को रूस में एक बड़ा सम्मान हासिल है, और कुछ हद तक किरिल को अर्जेंटीना के पोप की लोकप्रियता से भी जलन हो सकती है।

पुतिन की फ़्रांसिस के साथ वेटिकन में हुई दूसरी मुलाक़ात 50 मिनट तक चली थी (जहां तक पोप के साथ मुलाक़ात की समयावधि की बात है, तो यह पर्याप्त रूप से लम्बी समयावधि वाली मुलाक़ात थी)।

यह मुलाक़ात क्रीमिया के रूस वापसी के महीनों के भीतर जून 2015 में हुई थी। वेटिकन ने उस समय कहा था कि फ़्रांसिस ने यूक्रेन में ‘शांति के लिए गंभीर और व्यापक प्रयासों’ की मांग की है और इस जोड़ी ने इस बात पर सहमति जतायी थी कि ‘बातचीत का माहौल’ बहाल करना होगा और ‘सभी पक्षों’ को मिन्स्क समझौतों का पालन करना होगा।

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को हुई बैठक में फ़्रांसिस ने क्रेमलिन को यूक्रेन के घटनाक्रम के सिलसिले में भी कुछ संदेश दिये हैं। रूसी दूतावास में चली उस लम्बी बैठक के मूल में भी यही संदेश था। दरअसल, ऐसा तब हुआ, जब कीव के बाहरी इलाक़े में रूसी टैंकों की पहली क़तार को देखा गया।

हालांकि, फ़्रांसिस कभी भी रूस के राजदूत को अपने पास बुला सकते थे और इस तरह का चलन रहा भी है,लेकिन भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस के दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह निजी दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है। 

M.K. Bhadrakumar

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner