गांधी विचार-दर्शन से दुनिया में बढ़ेगी शांति : प्रहलाद पटेल

Prahlada Patel, Minister of State for Culture and Tourism, Government of India inaugurated the International Seminar on 'Peace and Justice' in Hindi University

Prahlada Patel, Minister of State for Culture and Tourism, Government of India inaugurated the International Seminar on ‘Peace and Justice’ in Hindi University

हिंदी विवि में ‘शांति और न्‍याय’ पर अंतरराष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी उद्घाटित

भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने किया उदघाटन

वर्धा, 29 जनवरी 2020 : जय जगत 2020 न्‍याय और शांति के लिए एक वैश्विक पदयात्रा के वर्धा पड़ाव पर महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में शांति और न्‍याय विषय पर आयोजित अंतरराष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के उदघाटन समारोह में केंद्रीय संस्‍कृति एवं पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद पटेल ने कहा है कि महात्‍मा गांधी विचार दर्शन को स्वीकार करने से भारत ही नहीं अपितु दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी। गांधीजी के विचार को समग्र दृष्टि से देखते हुए नई पीढ़ी में उनके अध्‍यात्‍म के विचारों को संचारित करना चाहिए। राजघाट से जिनेवा तक की जय जगत पदयात्रा के माध्‍यम से दुनिया भर में अमन और शांति का संदेश प्रसारित होगा।

महात्‍मा गांधी की डेढ सौवीं जयंती पर 2 अक्‍तूबर 2019 से आरंभ जय जगत पदयात्रा दिल्‍ली (भारत) से जिनेवा (स्विट्जरलैंड) का वर्धा में दो दिवसीय पड़ाव 28-29 जनवरी है। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में इस अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का उदघाटन मंगलवार 28 को गालिब सभागार, तुलसी भवन में केंद्रीय संस्‍कृति और पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) प्रहलाद पटेल द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने की।

इस अवसर पर मंच पर प्रतिकुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट, गांधी चिंतक राधा भट्ट, यात्रा के संयोजक पी. वी. राजगोपाल, विनोबा चिंतक बालविजय और जिल बहन उपस्थित थे।

कार्यक्रम में प्रो. मनोज कुमार व डॉ. अमित कुमार विश्‍वास द्वारा लिखित पुस्‍तक ‘गांधी की अहिंसा दृष्टि’ और विक्रम नायक द्वारा लिखित‘ जय जगत ऑन नॉन वायलेंस’ पुस्तिका का लोकार्पण तथा 60 देशों के कलाकारों द्वारा बनाए गये कार्टून प्रदर्शनी का उदघाटन संस्‍कृति मंत्री श्री पटेल ने किया।

केंद्रीय राज्‍य मंत्री श्री पटेल के आगमन पर नागार्जुन अतिथि गृह में विश्‍वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों ने उन्‍हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

केंद्रीय राज्‍य मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पदयात्रा धरती से जोड़ने का और लोगों की समस्‍याओं को समझने का प्रभावी रास्‍ता है। उन्‍होंने कहा कि नई पीढ़ी को चरित्रवान बनाने के लिए धर्म और पूजा पद्धति नहीं अपितु हमारे पौराणिक ग्रंथों में जो मूल्‍य संस्‍कार दिए है वहीं आदर्श हो सकते हैं।

उन्‍होंने शांति शिक्षण और शांति विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना को देश की जरूरत बताते हुए कहा कि इसे देश और दुनिया में शांति का माहौल बनेगा।

अध्‍यक्षीय उदबोधन में विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि गांधी की अहिंसा दृष्टि धर्म है। जय जगत पदयात्रा को विधायक दृष्टि का संकल्‍प बताते हुए उन्‍होंने कहा कि आज के दौर में देश और दुनिया को शांति शिक्षा की अत्‍यंत आवश्‍यकता है। नष्‍ट होने से बचाने का एक मात्र रास्‍ता अहिंसा है और वह गां‍धी दर्शन से निकलता है।

उदघाटन सत्र में पी. वी. राजगोपाल ने प्रस्‍ताव रखा कि देश में शांति विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने के लिए सरकार प्रयास करें। इसे लेकर कुलपति प्रो. शुक्‍ल ने कहा कि इस विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के लिए वर्धा से उपयुक्‍त स्‍थान अन्‍य नहीं हो सकता। यह भारत का केंद्र भौगोलिक है और गांधी की कर्मस्‍थली भी।

यात्रा का विवरण प्रस्‍तुत करते हुए पी. वी. राजगोपाल ने कहा कि अहिंसा के रास्‍ते अन्‍य समस्‍याओं का समाधान किया जा सकता है। भारत अहिंसा की प्रयोगशाला और शांति पर्यटन के लिए एक महत्‍वपूर्ण केंद्र बनना चाहिए।

उन्‍होंने इस यात्रा के उद्देश को बताते हुए कहा कि युवा विद्यार्थियों से संवाद, महिला सशक्तिकरण, आर्गेनिक कृषि आदि को लेकर अहिंसात्‍मक तरीके से जागरूकता फैलाना जय जगत यात्रा का महत्‍वपूर्ण उद्देश है। उन्‍होंने शांति संस्‍थान और शांति विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने की मांग का प्रस्‍ताव केंद्रीय राज्‍य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के समक्ष रखा।

इस अवसर पर जिल बहन ने कहा कि यात्रा में आठ देशों के पंधरा नागरिक सहभागी हुए हैं, जिनमें न्‍यूजिलैंड, केनिया, अर्जेटिना, फ्रांस, जापान, स्‍पेन और केनडा आदि देशों के 15 नागरिक सहभागी हुए हैं। इसके साथ ही भारत के 12 अलग-अलग प्रांतों के 25 भारतीय नागरिक यात्रा में शामिल है। दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं जय जगत गीत के साथ संगोष्‍ठी का प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने राज्‍यमंत्री पटेल का चरखा, अंगवस्‍त्र और सुत माला से स्‍वागत किया।

उदघाटन के बाद केरल के राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान ने स्‍काईप के माध्‍यम से अपना संदेश दिया। उन्‍होंने अपने संदेश में कहा कि गांधी हमारी विरासत है। राजघाट से जिनेवा तक की यात्रा गांधी विचारों का कर्तव्‍यबोध करा रही है। गांधी विचारों से हमारी समस्‍या खत्‍म होगी यह विचार दुनिया मान रही है। एक समय आएगा जब लोग चिल्‍लाकर कहेंगे, गांधी हमारे हैं।

उन्‍होंने कहा कि अंतिम जन को फायदा हो यह गांधी के काम को मापने का असली मापदंड होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि जय जगत यात्रा से समाज और दुनिया में चेतना पैदा होगी। वैर भाव से मुक्ति और वसुधैव कुटुंबकम् यही गांधी की अहिंसा का अर्थ है। हजारों वर्ष की परंपरा का विचार गांधी दर्शन में है।

उन्‍होंने आयोजन कर्ता तथा विश्‍वविद्यालय को शुभकामनाएं दी और कहां कि कुछ व्‍यस्‍तता के चलते मैं इस आयोजन में शामिल नहीं हो सका परंतु मौका मिलते ही वर्धा जरूर आऊंगा। उनके प्रति आभार जताते हुए कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने उन्‍हें विश्‍वविद्यालय आने का निवेदन किया।

कार्यक्रम का संचालन रमेश जी ने किया तथा आभार विश्‍वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट ने माना। इस अवसर पर देश-विदेश के अनेक गांधी चिंतकों सहित डॉ. विभा गुप्‍ता, अजित सक्‍सेना, डॉ. भरत महोदय, बसव राज, महेंद्र पांडे, सुभाष लोमटे, अनुराधा समेत आदि उपस्थित थे। उदघाटन सत्र के बाद विनोबा जी के शिष्‍य बालविजय ने अपने विचार व्‍यक्‍त किए और विदेश तथा भारतीय प्रतिनिधियों ने यात्रा के अनुभवों को लेकर अपनी बात रखी। विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

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