जनसंघ के दिये को जलाने का फरमान तो यही बताता है, गोदी मीडिया की मेहरबानी से फिर बंटवारे की तैयारी है ?

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गोदी मीडिया की मेहरबानी से फिर बंटवारे की तैयारी हैभूखे बेरोज़गार जन गण के मनोरंजन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्बोधित कर रहे हैं ?

Prime Minister’s address to the nation so ridiculous?

 प्रधानमंत्री का राष्ट्र को सम्बोधन इतना हास्यास्पद? बहुत दुःखद। जब अर्थव्यवस्था खत्म है। मुक्तबाज़ारी शेयर बाजार धड़ाम है। रोज़ निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब रहे है।उद्योग धंधे, कारोबार, कल कारखाने, रोज़गार बन्द है। खेती खत्म है। 38 करोड़ लोग लॉक डाउन के तुगलकी फरमान से बेरोज़गार हैं। जनजीवन स्तब्ध है। कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है विदेश से लौटे 15 लाख लोगों की भी जांच नहीं हुई है। महानगरों की घनी आबादी से लेकर गांव गांव फैल रही है महामारी।

करोड़ों लोग नए सिरे से शरणार्थी बन गए हैं। भारत विभाजन,बंगाल के अकाल और बांग्लादेशी शरणार्थियों के सैलाब के दृश्य एकाकार हैं। ऐसे राष्ट्रीय संकट के परिदृष्य में देश दुनिया को संकट के मुकाबले दिशा दिखाने के बजाय किसी बाबा की तरह खालिस प्रवचन।

लॉक आउट से निकलने या महामारी और भुखमरी को रोकने की किसी कारगर योजना या नीति के ऐलान के बजाय लॉक डाउन तोड़ने वालों को जेल भेजने का फरमान? महानगरों से पलायन करने वाले करोड़ों लोगों में से कितनों को रोक लिया?

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग
पलाश विश्वास
जन्म 18 मई 1958
एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय
दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक।

भूखी जनता को अनिश्चित काल तक रोजी रोटी से वंचित करके यह प्रवचन कब तक चलेगा? भाजपा का चोला भी उतार फेंकने का समय आ गया क्या? सबकुछ स्थगित है। रामनवमी पर रोक नहीं। राम मंदिर का निर्माण चल रहा है।

क्या हमारी ज़िंदगी रोकने के लिए लॉकडाउन है या बिना प्रतिरोध सड़क पर पुलिस सेना उतारकर मनुस्मृति शासन लागू करने के हिन्दूराष्ट्र के एजेंडे को अमल में लाने के लिए देश को आपरेशन टेबल पर एनेस्थीसिया देकर रखा गया है?

हिंदुत्व के एजेंडे के साथ बने जनसंघ के दिये को जलाने का फरमान तो यही बताता है।

गोदी मीडिया की मेहरबानी से विभाजन की तरह देश के फिर बंटवारे की तैयारी है। तब भी कल कारखाने, उद्योग धंधे, बाजार, कारोबार, खेती किसानी, रोटी रोजी पर रोक नहीं थी। यह विभाजन और भुखमरी से भी बुरी हालत हैं। प्लेग से जब लोग चूहों की तरह मर रहे थे, तब भी यह हालत नहीं थी। इससे पहले ताली और थाली बजाने का फरमान जारी हुआ था। क्या भूखे बेरोज़गार जन गण के मनोरंजन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्बोधित कर रहे हैं ?

पलाश विश्वास

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