“प्रगतिशील लेखन” एक आंदोलन है

“प्रगतिशील लेखन” एक आंदोलन है

प्रलेसं इंदौर का जिला सम्मेलन संपन्न

इंदौर, 04 अक्तूबर 2022 (हरनाम सिंह): मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ इंदौर इकाई का जिला सम्मेलन ओसीसी होम में संपन्न हुआ। आयोजन में पठन-पाठन, समाज, राजनीति सहित अनेक समसामयिक विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। इस अवसर पर नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।

सच्चाई लिखना भी एक एक्टिविज्म है अपने आप में

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रलेसं के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने कहा कि आज के दौर का लेखक लोकल से ग्लोबल तक जुड़ गई दुनिया से अनभिज्ञ रहकर लेखन नहीं कर सकता। आज लेखक को रूस-यूक्रेन युद्ध, फिलिस्तीन, यमन में हो रहे अत्याचार, श्रीलंका की स्थिति से लेकर हमारे देश-प्रदेश और मोहल्ले की समस्याओं से भी वाकिफ होना जरूरी है। आज के दौर का लेखक इन घटनाओं से विमुख नहीं रह सकता। पिछले दिनों में फादर स्टेन स्वामी, वरवर राव, दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी, गौरी लंकेश आदि पर जो हमले हुए हैं उससे स्पष्ट है कि सच्चाई लिखना भी अपने आप में एक एक्टिविज्म है। प्रगतिशील लेखक संघ की विरासत जरूरी सवाल उठाने की है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से देश में साम्प्रदायिक फासीवादी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है लेकिन किसान आंदोलन ने निराशा के माहौल को तोड़ा भी है। हमें जनांदोलनों के साथ मिलकर उनमें शामिल लोगों के जीवन को अपनी कहानी-कविताओं-लेखों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

 बहुजन संवाद के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत सोनाने (बुलढाणा, महाराष्ट्र) ने कहा कि संवाद विहीन, असंवेदनशील सरकार धर्मांधता और भय की खेती कर रही है। महात्मा फुले जैसे विद्वानों के धर्मनिरपेक्ष विचारों का प्रचार जरूरी है। आमजन से संवाद कायम करने की जरूरत है। इसके लिए इस दिशा में कार्यरत सभी संगठनों को एकजुट होना पड़ेगा।

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे इंदौर इकाई के अध्यक्ष चुन्नीलाल वाधवानी ने अपने संबोधन में कहा कि तलवार के जोर पर कब्जा तो किया जा सकता है लेकिन क्रांतिकारी बदलाव नहीं। यह कार्य साहित्यकार कर सकता है। गांधी, भगत सिंह, अंबेडकर के बगैर भारत की कल्पना नहीं की जा सकती।

म. प्र. प्रलेसं सचिव मंडल की सदस्य सारिका श्रीवास्तव ने संगठन में सक्रियता के साथ युवाओं को वैचारिकता से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्यों को निरंतर अध्ययनरत रहते हुए अपने लेखन के माध्यम से जनता से जुड़ना चाहिए।

वरिष्ठ लेखक राम आसरे पांडे ने कहा कि प्रलेसं की वैचारिकता वामपंथी है लेकिन वह पूर्णता है राजनीतिक नहीं है।

इस अवसर पर लेखकों द्वारा रचना पाठ किया गया। सम्मेलन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किए जा रहे हमलों के विरोध का प्रस्ताव विवेक मेहता ने रखा, जनसामान्य में वैज्ञानिक चेतना बढ़ाने का प्रस्ताव विनम्र मिश्र ने तथा युद्ध विरोधी प्रस्ताव तौफीक ने रखा जिन्हें सर्वानुमति से पारित किया गया। इस अवसर पर इन्दौर के दिवंगत साहित्यकारों एस के दुबे, राहत इंदौरी, प्रभु जोशी के अलावा इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 कार्यकारिणी का गठन

सम्मेलन में कार्यकारिणी का गठन किया गया। जिसमें इंदौर इकाई के लिए अध्यक्ष केसरी सिंह चिडार, उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन, सारिका श्रीवास्तव, अभय नेमा सचिव हरनाम सिंह, कोषाध्यक्ष विवेक मेहता चुने गए। कार्यकारिणी में राम आसरे पांडे, विजय दलाल, जावेद आलम, मुकेश पाटीदार, दीपिका चौरसिया, राज लोगरे, विनम्र मिश्र, महिमा को लिया गया।

अध्यक्ष मंडल में चुन्नीलाल वाधवानी, विनीत तिवारी, उत्पल बैनर्जी, रविंद्र व्यास तथा संरक्षक मंडल में कृष्णकांत निलोसे, आलोक खरे, शैला शिन्त्रे को लिया गया।

अर्थशास्त्री जया मेहता व प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी | किसान आंदोलन पर चर्चा

“Progressive Writing” is a movement

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner