‘कर्ज नहीं, कैश दो’ : पूरे प्रदेश में दूसरे दिन भी हुए प्रदर्शन

किसानों को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा, किसानी को मान देने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की मांग

अब 27 मई को ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान

रायपुर, 17 मई 2020. कोरोना संकट के कारण उपजी विपरित परिस्थितियों में किसानों को वास्तविक राहत देने, खेती-किसानी की समस्या को हल करने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित वापसी को लेकर छत्तीसगढ़ में किसानों और आदिवासियों के पचीसों संगठनों के साझे आह्वान पर आज भी पूरे प्रदेश में किसानों के विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिल रही हैं। कोरबा, कवर्धा, कांकेर, सूरजपुर, सरगुजा, गरियाबंद, रायगढ़ आदि जिलों में आज भी किसानों ने अपने घरों या खेत-खलिहानों और मनरेगा स्थलों पर मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया और कर्ज नहीं, कैश दो के नारे लगाए।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और किसान संगठनों के साझे मोर्चे से जुड़े विजय भाई ने बताया कि इन दो दिनों में प्रदेश के 20 जिलों के सैकड़ों गांवों में ये विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए। आज प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में केशव सोरी, डींगर यादव, जनकदास कुलदीप, प्रशांत झा, आलोक शुक्ला, कुमेश्वर अमरो, नरोत्तम शर्मा, पूरन दास, अयोध्या प्रसाद रजवाड़े, ऋषि गुप्ता, देवकुमार मार्को, कृष्ण कुमार आदि किसान नेता प्रमुख हैं। इस आंदोलन के साथ ही कई जगहों पर समूह-सभाएं भी हुई, जिन्हें संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कृषि क्षेत्र में घोषित पैकेज को किसानों के साथ धोखाधड़ी करार दिया तथा कहा कि यह पैकेज किसानों को कोई राहत नहीं देता, बल्कि कृषि-व्यापार करने वाली कंपनियों के मुनाफों को सुनिश्चित करता है।

इस देशव्यापी किसान आंदोलन के जरिये किसानों ने उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए निम्न कदम उठाने की मांग केंद्र सरकार से की है :

  • कोरोना महामारी के खत्म होने तक ग्रामीण परिवारों को हर माह 10000 रुपये की नगद मदद
  • हर व्यक्ति को प्रत्येक माह 10 किलो मुफ्त खाद्यान्न
  • खेती-किसानी और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई
  • किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य
  • किसानों को बैंकिंग और साहूकारी कर्ज़ के जंजाल से मुक्ति ● प्रवासी मजदूरों को बिना यात्रा व्यय वसूले उनके घरों तक सुरक्षित ढंग से पहुंचाना और जो अपने तरीके से आ चुके हैं, उन्हें 5000 रुपये विशेष प्रवास भत्ता
  • किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर 18000 रुपये करना
  • पेट्रोल-डीजल की कीमत 20 से 25 रुपये के बीच करन
  • आगामी मौसम में खेती के लिए किसानों को मुफ्त खाद-बीज देना और कृषि लोन की व्यवस्था करना।
किसान नेताओं का मानना है कि यदि सरकार कोरोना संकट के समय भी कार्पोरेटों का 69000 करोड़ माफ कर सकती है, तो किसानों की उक्त मांगें को भी पूरा कर सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकारी गोदामों में 8 करोड़ टन खाद्यान्न जमा है, इसके बावजूद लोगों का भूख से मरना किसी भी सरकार के लिए शर्म की बात होनी चाहिए।

किसान संघर्ष समन्वय समिति ने आंदोलन के अगले चरण में 27 मई को पूरे देश में ग्राम पंचायत के स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा की है।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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