तीन राज्यों में हुए श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ जनहित याचिका

Public interest litigation against change in labor law in three states

नई दिल्ली, 14 मई 2020. विदेशी निवेशकों को भारत लाने के मकसद से श्रम कानून में हुए बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है. झारखण्ड के सामाजिक कार्यकर्ता पंकज कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों में मजदूर कानून को कमजोर और शिथिल बनाने का अध्यादेश जारी हुआ है. श्रम कानून में संशोधन (Labor law amendment) तीन महीने से लेकर तीन वर्षों तक अलग-अलग राज्यों में किया गया है.

पंकज यादव ने जनहित याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की है कि राज्य सरकारों के इन अध्यादेश को रद्द कर श्रम कानून को संरक्षित करें. राज्य सरकारों ने फैक्ट्री एक्ट का संशोधन कर मजदूरों के मूल अधिकारों को हनन करने का प्रयास किया है. आठ घंटे की जगह बारह घण्टे कार्य करवाना तथा निम्नतम मजदूरी से भी वंचित रखना मानवाधिकार का हनन है. राज्य सरकारों ने श्रम कानून में बदलाव वॉर के दौरान मिलने वाले राज्य सरकार के अधिकारों के आधार पर किया है, जो ना तो राजनीतिक दृष्टि से सही है ना ही नैतिक दृष्टि से. लाखों मजदूर अभी बेइन्तहा पीड़ा को झेल रहे हैं और लॉक डाउन के बाद जब वो वापस फैक्ट्री में जायेंगे तो नया अध्यादेश उन्हें अपने फंसे हुए पैसे को निकालने में भी बड़ी अड़चन खड़ा करेगी.

श्री यादव ने एक विज्ञप्ति में बताया कि मजदूरों को देश आज़ादी से पहले से मिलते आ रहे हर वो अधिकार और सुविधा से वंचित करने की कोशिश है जिसके वो हक़दार हैं. मजदूर की जान और जमीर की कीमत पर निवेशकों को आमंत्रित करना कहीं से भी उचित नहीं है.

पंकज यादव की तरफ एडवोकेट निर्मल अम्बष्ठा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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