पुतिन की अमेरिका को चेतावनी, यूक्रेन से पीछे हटे

पुतिन की अमेरिका को चेतावनी, यूक्रेन से पीछे हटे

Putin Warns US to Back off in Ukraine

यूक्रेन में दो महीनों से चल रहे युद्ध की पश्चिमी अवधारणा “लोकतंत्र बनाम निरंकुशता” (Western concept of war “democracy versus autocracy”) की बयानबाज़ी से ओत-प्रोत रहा है, लेकिन इस स्थिति में विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के कीव दौरे के बाद सोमवार को पोलैंड में एक संवाददाता सम्मेलन में लॉयड ऑस्टिन की ओर से दिये गये उस बयान के साथ नाटकीय रूप से बदलाव आ गया है कि वाशिंगटन “रूस को कमज़ोर देखना चाहता है।”

बाइडेन रूस को उलझाए रखने की योजना पर काम कर रहे हैं!

न्यूयॉर्क टाइम्स में डेविड सेंगर ने इस बात का ज़िक़्र किया है कि ऑस्टिन “यूक्रेन के नियंत्रण को लेकर चल रही लड़ाई से उस संघर्ष में आये बदलाव को स्वीकार कर रहे थे, जो कि वाशिंगटन को सीधे मास्को के ख़िलाफ़ खड़ा कर देता है।” लेकिन वास्तव में यह कोई बदलाव नहीं है। वाशिंगटन पोस्ट में सेंगर के सहयोगी डेविड इग्नाटियस ने तीन महीने पहले लिखा था कि बाइडेन प्रशासन रूस को यूक्रेन में उलझाये रखने के लिए एक रोड मैप पर काम कर रहा है और रूस को इस तरह से फंसाया जायेगा कि रूस विश्व मंच पर बहुत ही मामूली शक्ति बनकर रह जाये।

कोई शक नहीं कि क्रेमलिन के लिए ऑस्टिन की यह टिप्पणी हैरत में डालने वाली नहीं होगी। जैसा कि हाल ही में सोमवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में एक बैठक में दोहराया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने “रूसी समाज को विभाजित करने और रूस को भीतर से तबाह करने” की कोशिश की है।

पुतिन ने बुधवार को इस मामले पर फिर से ध्यान दिलाते हुए कहा कि “ऐतिहासिक रूप से रूस को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इस नीति पर चलते रहने वाली ताक़तों को उनके विचार में इतने स्वतंत्र और बड़े देश की ज़रूरत नहीं है, यहां तक कि बहुत बड़े देश की भी ज़रूरत नहीं है। उनका मानना है कि इसका वजूद ही उनके लिए ख़तरा है।”

हक़ीक़त तो यही है कि कई तजुर्बेकार पश्चिमी पर्यवेक्षकों का आकलन था कि क्रेमलिन प्रभावी रूप से अमेरिका के बिछाये उस जाल में फंस गया है, जिसका मक़सद पुतिन के शासन को कमज़ोर करना है।

ज़रा 26 मार्च के चूक भरे बयान को याद कीजिए,जिसे सिर्फ़ चूक नहीं माना जा सकता, जिसमें राष्ट्रपति बाइडेन ने वारसॉ में बोलते हुए बिना तैयारी और अलिखित टिप्पणी में कह दिया था, “भगवान के लिए, यह आदमी (पुतिन) सत्ता में नहीं रह सकता।”

इसके बावजूद, ऑस्टिन की टिप्पणी यह संकेत देती है कि भू-राजनीतिक स्थिति में एक ऐसा नाटकीय बदलाव आने जा रहा है, जिसके सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिम देशों को चेतावनी दी कि रूस-यूक्रेन युद्ध में पश्चिम के शामिल रहने से तीसरे विश्व युद्ध के “गंभीर” और “वास्तविक” जोखिम हैं और “हमें इस बात कमतर करके नहीं आंकना चाहिए।”

यह तय माना जाना चाहिए कि यह संघर्ष धीरे-धीरे, मगर लगातार एक नये चरण में दाखिल होता जा रहा है। नाटो के नियमित सैन्य टुकड़ियों के विदेशी लड़ाके और सैनिक यूक्रेनी सेना की अग्रिम पंक्तियों की ताक़त को तेज़ी से मज़बूत किया जा रहा है।

ऐसे में जो कुछ दिखाया जा रहा है, उसे भी समझने की ज़रूरत है। मारियुपोल का रूसी सेना के हाथ में आ जाने के तुरंत बाद ऑस्टिन इस युद्ध का सिंहनाद कर पाते हैं। नाटो देशों के कुछ हज़ार यूक्रेनी राष्ट्रवादी और कुछ सौ सैन्यकर्मी शहर के अज़ोवस्तल परिसर में उस भूमिगत भंवरजाल में फंस गये हैं, जिसे रूसी सेना ने बंद कर दिया है। यह अमेरिका की प्रतिष्ठा के लिहाज़ से एक ज़बरदस्त झटका है।

रूसी विशेष अभियान अपने ट्रैक पर है। उधर यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के शब्द चित्र को उधार लेते हुए कहा जाये, तो यूक्रेनी सेना को “पीसकर” मटियामेट कर दिया गया है।

सोमवार को रूसी उच्च स्तर के सटीक निशाना लगाने वाले मिसाइलों ने पश्चिमी यूक्रेन में कम से कम छह रेलवे सब-स्टेशनों-क्रास्नोए, ज़्डोलबुनोव, ज़मेरिंका, बर्दिचेव, कोवेल, कोरोस्टेन को तबाह करते हुए रेलवे सुविधाओं को भी नष्ट कर दिया, जो कि डोनबास क्षेत्र में यूक्रेनी सेना के लिए पश्चिमी हथियारों की आपूर्ति के हिसाब से प्रमुख ट्रांसशिपमेंट पॉइंट थे। यूक्रेन के कई पश्चिमी क्षेत्रों में रेल संचार प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है।

भारी नुक़सान हो रहा है यूक्रेनी सेना को

पूर्वी क्षेत्रों से आ रही रिपोर्टें बताती हैं कि यूक्रेनी सेना को भारी नुक़सान हो रहा है। रूसी सेना ने क्रेमेनया शहर पर कब्ज़ा कर लिया है और उस लाइमन शहर की ओर बढ़ रहे हैं, जो उन्हें पूर्व से स्लाव्यास्क की तरफ़ जाने वाली एक सीधी सड़क पर नियंत्रण करने में सहूलियत देगा।

क्या यूक्रेन के जीतने का कोई आसार है?

ऑस्टिन की बहुप्रचारित बयानबाज़ी के बावजूद यूक्रेन के जीतने का कोई संकेत नहीं दिखा रहा है, बल्कि वहां ख़ून बह रहा है, और यूक्रेनी सरकार के तहत आने वाले वास्तविक नियंत्रण क्षेत्रे लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं।

अमेरिकी अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि पेंटागन में उन हथियारों को ट्रैक करने की क्षमता नहीं है, जिन्हें इस युद्ध में इस्तेमाल किया जा रहा है। फिर भी, बाइडेन प्रशासन ने अब तक यूक्रेन पर तक़रीबन 4 बिलियन डॉलर ख़र्च कर दिये हैं। ऐसे में कई बातें कही-सुनी जा रही है। अमेरिकी आपूर्ति के वास्तविक लाभार्थी कौन हैं ? यूक्रेन में भ्रष्टाचार का स्तर एक सैन्य टुकड़ी है।

चाहे जो कुछ भी कहा जा रहा हो,मगर सचाई तो यही है कि यूक्रेनी लड़ाकू टुकड़ियों को भारी मात्रा में भारी हथियारों को पहुंचा पाने में कई हफ़्ते या कई महीने लग जायेंगे, लेकिन इस बीच डोनबास की लड़ाई लगभग पूरी तरह से ज़मीन पर मौजूदा ताक़त के आधार पर ही लड़ी जायेगी। इस हफ़्ते अमेरिकी सेना के एक पूर्व कर्नल और बहुत सारे मीडिया संस्थाओं में बतौर टिप्पणीकार आने वाले डैनियल डेविस ने एक विस्तृत विश्लेषण में निष्कर्ष निकालते हुए कहा है, “पश्चिमी देशों की सरकारों को हथियारों के लिए एक सुसंगत योजना के साथ तैयार होने, हथियारों को भेजने और किट को एक समय सीमा में उसे उस गंतव्य तक पहुंचाने में समय लगेगा, जो कीव के सैनिकों को रूस के ख़िलाफ़ संतुलन बनाने की क्षमता प्रदान कर सके।” 

लब्बोलुआब यही है कि बाइडेन प्रशासन का भू-राजनीतिक एजेंडा इस सैन्य संघर्ष को लम्बा खींचना है, जो रूस को सैन्य और कूटनीतिक रूप से कमजोर करने के अलावा, यूरोप को युद्ध के मैदान में बदल देगा और आने वाले बहुत लंबे समय के लिए इस महाद्वीप को अमेरिकी नेतृत्व पर बहुत ज़्यादा निर्भर बना देगा। बाइडेन के लिए तो यह युद्ध एक चुनावी साल में अमेरिकी राजनीति में ज़रूरी चीज़ों से ध्यान हटाने के लिहाज़ से एक उपयोगी उन्माद है।

ऑस्टिन ने सोमवार को जर्मनी में अमेरिकी सैनिक अड्डे पर अमेरिका के सहयोगियों के एक सम्मेलन की मेज़बानी की थी, जिसमें यूक्रेन की आत्मरक्षा पर एक मासिक संपर्क समूह बनाने को लेकर “लंबी दौड़ के लिए यूक्रेन की सेना को मज़बूत करने की कोशिशों” का समन्वय किया गया। इसमें “राज़ी होने वालों के गठबंधन” का अशुभ रूप दिखता है। यहां तक कि इसमें इस्राइल को भी शामिल किया गया था। लेकिन, अमेरिका यूक्रेन में विशेष अभियान के पीछे के उद्देश्यों को पूरी तरह से साकार करने के सिलसिले में रूस के फ़ौलादी संकल्प को कम करके आंका जा रहा है। चाहे कुछ भी हो जाये, मॉस्को किसी रुकावट के रोके नहीं रुकेगा।

क्या अमेरिका रूस की सैन्य क्षमता की बराबरी कर सकता है?

पुतिन ने कल कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर कोई भी बाहरी ताक़त मौजूदा घटनाक्रम में हस्तक्षेप करने को लेकर आगे बढ़ती है, तो उन्हें पता होना चाहिए कि वे वास्तव में रूस के लिए रणनीतिक खतरे पैदा करेंगे, जो हमारे लिए अस्वीकार्य हैं, और उन्हें पता होना चाहिए कि जवाबी हमलों की हमारी प्रतिक्रिया तत्काल होगी, त्वरित होगी।”

ऐसा कहते हुए पुतिन के दिमाग़ में साफ़ था कि कि रूस के पास जो सैन्य क्षमताएं हैं, उसकी बराबरी अमेरिका नहीं कर सकता।

पुतिन ने चेताते हुए कहा, “हमारे पास ऐसा करने के लिए सभी तरह के अस्त्र-शस्त्र हैं, ऐसे-ऐसे अस्त्र-शस्त्र, जिनके होने का दावा इस समय कोई दूसरा नहीं कर सकता, लेकिन हमारे पास हैं,और हम ऐसा कहते हुए डींग नही हांक रहे। ज़रूरत पड़ने पर हम उनका इस्तेमाल करेंगे और मैं चाहूंगा कि हर कोई इसके बारे में जागरूक रहे। हमने इस सिलसिले में तमाम ज़रूरी फ़ैसले ले लिए हैं।”

एम. के. भद्रकुमार (न्यूज क्लिक)

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