घर पहुंचकर भी प्रवासी मजदूरों को चैन नहीं

भाई पद्दोलोचन इन दिनों खूब कविताएँ लिख रहा है।

उसकी ताज़ा कविता

इस

कठिन और

मुश्किल तारीख में

वे

तमाम-तमाम मेहनतकश

मौत से

पंजा लड़ते-लड़ते

लौट रहे गांव.

उन्हें देख कर डरो नहीं

थोड़ा सम्मान

थोड़ा प्यार

थोड़ी समझदारी दो

कोरोना हारेगा

इस तरह

इन दिनों गांव-गांव जाकर लोगों से सम्वाद कर रहा हूँ मित्र विकास स्वर्णकार के साथ। कड़ी धूप में बेहद थकान हो जाने से नियमित लिख नहीं पा रहा। माफ करें।

इस बीच बसंतीपुर में युवा प्रधान संजीत विश्वास की पहल और मेहनत से बसंतीपुर के प्रवासी मजदूर आंध्र और कर्नाटक से लौट आये हैं। अमरपुर के 20 स्त्री पुरुष भी पंजाब से सकुशल वापस बवापस घर पहुंच गए हैं। आंध्र से 30

और पंजाब से 20 लोग बदहाल और हैरान परेशान लौटे।

संजीत ने बसें भेजकर पंजाब और आंध्र से अपने लोगों को घर बुला लिया, जबकि कर्नाटक से लोग ट्रेन से आये।

बसंतीपुर प्राथमिक पाठशाला में आंध्र से लौटे लोगों को क्वारंटाइन किया गया है।

गांव के लोग इन लोगों के लिए बेहद परेशान थे।

लेकिन टीवी पर लगातार चल रही खबरों से लोग इतने आतंकित हो गए हैं कि एक साथ इतने प्रवासियों के गांव लौटने पर सारे गांव वाले बेहद तनाव में हैं।

कर्नाटक से आये लोगों को उनके ही घरों में होम क्वारंटाइन किया गया है।

पाठशाला गांब के बीचोंबीच है और वहां शौचालय न होने की वजह से नगर पंचायत दिनेशपुर के सचल शौचालय को गांब के बीचोंबीच खड़ा कर दिया गया है।

ये लोग पुलिस और प्रशासन की देखरेख में गांव वापस लाया गया है तो लोग बहुत गुस्से में भी हैं, लेकिन विरोध दर्ज करने की हालत में हैं।

युवा संजीत की तारीफ करनी पड़ेगी कि उसमें लोगों के गुस्से का सामना करने का जिगर भी है।

हम जून अंक में घर वापस इन प्रवासी मजदूरों की आपबीती (Disaster of migrant laborers) और उनकी वापसी की कथा संजीत की जुबानी छाप रहे हैं। जून अंक के लिए अपना व्हाटसएप नम्बर हमें तुरन्त भेज दें।

जिस गांव में मैं जन्मा हूँ, वहां इस तरह की सामाजिक समस्या और तनाव अभूतपूर्व है।

हमें अब खूब महसूस हो रहा है कि सड़कों पर हैं नहीं अपने घर में लौटकर भी प्रवासी मजदूरों को किन मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस और प्रशासन ने कोरोना संक्रमण की समस्या गांववालों के मत्थे डालकर अपना काम पूरा कर दिया है।

बुखार की जांच के अलावा किसी प्रवासी की अभी कोरोना जांच नहीं हुई है।

एक भी मजदूर संक्रमित हुआ तो गांव पूरीतरह कोरोना संक्रमित हो जाएगा।

पुलिस, प्रशासन और सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है।

प्रवासी मजदूर अब अछूत हो गए हैं और देशभर में सामाजिक ताना बाना हिटलरशाही और उसके पिट्ठू मीडिया ने तहस-नहस कर दिया।

किसी को यह समझाना मुश्किल है कि इस स्थिति के लिए हमारे अपने लोग नहीं, इस देश की सरकार दोषी है और उसे सजा मिलनी चाहिए।

बल्कि हालात ऐसे हैं कि अभी वोट हो तो ये ही हैरान परेशान गुस्साए लोग इसी सरकार को वोट करेंगे जो लगातार देश बेचने के लिए एक के बाद एक संकट खड़ा कर रही है।

संजीत की जुबानी

जैसा कि आपको पूर्व विदित होगा कि आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में फंसे हुए 30 लोगों को घर वापसी के लिए 22 मई 2020 को भेजी गई बस में सकुशल सभी 30 लोग आज सुबह 6:00 बजे घर के लिए प्रस्थान कर चुके हैं, और साथ ही साथ इन सभी लोगों को राज्यों की सीमा पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौर से भी गुजरना पड़ रहा है! इस बस को सभी कागजी कार्यवाही के साथ भेजा गया था, जिससे इस बस को आंध्र प्रदेश तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई है! इन तस्वीरों से साफ झलक रहा है कि यह लोग कितनी परेशानी में थे ! मैं इन सभी के सकुशल एवं स्वस्थ घर पहुंचने की कामना करता हूं ! ????

पलाश विश्वास

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नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
उपाध्याय अमलेन्दु:
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