राहुल गांधी ने लापरवाह मोदी सरकार को फिर चेताया – देश में आने वाली है आर्थिक सुनामी, अकल्पनीय दर्द से गुजरेंगे लोग

Rahul Gandhi again warns the careless Modi government on Corona virus – Economic tsunami is coming in the country, people will go through unimaginable pain

देश में आर्थिक सुनामी (Economic tsunami) जैसे हालात बन गए हैं। आप को अंदाजा नहीं है क्या होने वाला है। यह बहुत दर्दनाक है। भारत को सिर्फ कोरोना वायरस (Corona virus) के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली आर्थिक तबाही (Economic catastrophe) के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

नई दिल्ली, 17 मार्च 2020. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने कोरोना वायरस को लेकर लापरवाह मोदी सरकार और देश के लोगों को एक बार फिर चेताया है।

नवजीवन की खबर के मुताबिक श्री गांधी ने मंगलवार को संसद के भीतर पत्रकारों से बात करते हुए कहा,

“देश में आर्थिक सुनामी जैसे हालात बन गए हैं। आप को अंदाजा नहीं है क्या होने वाला है। यह बहुत दर्दनाक है। भारत को सिर्फ कोरोनो वायरस के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली आर्थिक तबाही के लिए भी तैयार रहना चाहिए। मैं इसे बार-बार कह रहा हूं। हमारे लोग अगले 6 महीनों में अकल्पनीय दर्द से गुजरने वाले हैं।”

इस दौरान उन्होंने एक कहानी बताते हुए कहा कि सुनामी आने से पहले पानी चला जाता है, जब पानी चला जाता है तो लोग मछली लेने जाते हैं और इसी दौरान वे हादसे का शिकार हो जाते हैं। मैं इसे बार-बार कह रहा हूं लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। मैं सरकार से रोज कह रहा हूं कि तैयारी करिये लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे हैं। रोज उल्टी सीधी बात करते हैं।

कोरोना वायरस को लेकर इससे पहले भी राहुल गांधी मोदी सरकार पर हमला बोल चुके हैं। उन्होंने कहा था कि एक बहुत बड़ी समस्या है और इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने यह दावा भी किया था कि इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाने की बजाय यह सरकार बेखबर पड़ी है।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था,

“मैं यह दोहराता रहूंगा कि कोरोना वायरस एक बहुत बड़ी समस्या है। इस समस्या को नजरअंदाज करना समाधान नहीं है। अगर कड़े कदम नहीं उठाए गए तो भारतीय अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।”

इससे पहले उन्होंने ट्वीट करके कहा था,

“कोरोना वायरस की समस्या और अर्थव्यवस्था की हालात को लेकर प्रधानमंत्री सो रहे हैं।”

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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