योगीराज (यूपी) में जारी फासीवादी बर्बरता व दमन के खिलाफ आवाज लगायें!

योगीराज (यूपी) में जारी फासीवादी बर्बरता व दमन के खिलाफ आवाज लगायें!

Raise voice against fascist vandalism and oppression in Yogiraj (UP)!

यूपी के जेलों में बंद कर दिये गए दर्जनों छात्रों-महिलाओं व सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं की रिहाई लिए बोलें!

देशभर में जारी राजकीय हिंसा व दमन के बीच यूपी का योगी राज फासीवादी दमन व बर्बरता के मॉडल के बतौर सामने आ रहा है. CAA-NRC के खिलाफ जारी शांतिपूर्ण आंदोलन को सरकारी मशीनरी हिंसक बना रही है,बेगुनाहों की हत्या को अंजाम दे रही है और बड़े पैमाने पर सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर चुकी है. यूपी पर इमरजेंसी का लाद दिया गया है, इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, खौफनाक दमन व यातनाएं का दौर चल रहा है.

शर्मनाक है कि 75 साल से अधिक उम्र के दो एक्टिविस्ट एडवोकेट मो. शोएब और पूर्व आईपीएस एस आर दारापुरी को दो दिन नजर बंद रखने के बाद जेल में डाल दिया गया है.

रिहाई मंच के अध्यक्ष मो. शुएब इमरजेंसी से लड़ते हुए भी जेल गए थे. वे लगातार मानवाधिकारों को लेकर न्यायालय से लेकर सड़क तक सक्रिय रहते हैं.दिल के मरीज हैं.

एस आर दारापुरी साहब कैंसर के मरीज हैं, पूर्व में आईजी रह चुके हैं. वे दलित अधिकारों को लेकर सक्रिय रहते हैं और देश के लोकतांत्रिक आंदोलन के महत्वपूर्ण हस्तियों में एक हैं.

उल्लेखनीय है कि 19 दिसंबर के विरोध प्रर्दशन के दौरान ये दोनों पुलिस द्वारा नजर बंद किये गए थे.

छात्र अधिकारों व मानवाधिकार के लिए सक्रिय अंबेडकरवादी रिसर्च स्कॉलर रॉबिन वर्मा सहित दर्जनों सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है. दुधमुहें बच्चे से माता -पिता रवि व एकता शेखर को अलग कर जेल में डाल दिया गया है तो एक महीने के दुधमुंहे बच्चे व बीमार पत्नी से रिसर्च स्कॉलर दिवाकर को अलग कर जेल में डाल दिया गया है.

जेल में डाले गये आंदोलनकारियों पर संगीन धाराओं के साथ मुकदमा दर्ज किया गया है. सरकार झूठी कहानियां गढ़ रही है व प्रचार कर रही है.

देशभर से जरूर ही योगी राज के फासीवादी बर्बरता व दमन के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए.

आइये हम लिखें, बोलें.

यूपी के जेलों में बंद किए गए

तमाम सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अविलंब रिहा करो!

रिंकु यादव

(लेखक बागलपुर स्थित सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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