हाशिये पर रह रहे लोगों का रिश्ता : आपदा में तथाकथित देशभक्तों को इंसानियत का पाठ पढ़ाता एक ट्रांसजेंडर

transgender Anju Nayak

Relationship of marginalized people: a transgender who teaches humanitarian lessons to so-called patriots in disaster

21 दिन के लॉकडाउन (21 days lockdown) के बाद 14 अप्रैल से दूसरा लॉकडाउन (Second lockdown) भी शुरु हो चुका है दूसरे लॉकडाउन के होते ही लोगों की समस्या का भी दूसरा चरण शुरु हो गया। पहले लॉकडाउन के होते ही बहुत से प्रवासी मजदूरों ने शहरों से गांव की ओर पलायन किया (Migrant laborers migrate from cities to villages) उनके पास एक या दो हजार रुपये ही थे जो उनके मालिकों ने इसलिए दिये थे ताकि अगले महीने से मजदूरों को पूरी तनख्वाह न देना पड़े। जिनके पास सर छुपाने के लिए जगह थी वे यहीं रुक गए। सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा करके जैसे कि सरकार शुरुआत में बोली थी कि किसी को भूखा नहीं रहने दिया जायेगा, अनाज भरपूर है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही निकली।

अब दूसरे लॉकडाउन के होने पर कुछ लोग सोच रहे हैं कि काश एक बार लॉकडाउन खुल जाये और वे जो यहां रुके हैं, अपने गांव जा सके क्योंकि अब वे जान गए है कि सरकार का जनता द्वारा किया गया वादा सिर्फ वादा ही है आज भी उन्हें घन्टों लाइन में लगकर आधा पेट भोजन ही मिल पा रहा है, ऐसे में इन प्रवासी मजदूरों के पास गांव जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। जबकि मिडिल क्लास वर्ग इन्हें ही कोस रहा है कि ऐसे ही लोग कोरोना बीमारी फैलाने के लिए जिम्मेवार है और घर में बैठे किचन की रेसिपी और रामायण महाभारत के विडियो अपलोड कर देशभक्त होने का सबूत दे रहे हैं।

मजदूर और गरीब वर्ग की तरह एक वर्ग और भी है जो कि हाशिये पर रहते हुए भी दूसरों के बारे में सोच रहे हैं। ऐसे ही ट्रांसजेंडर समुदाय है जिसको आम बोलचाल की भाषा में हिजड़ा कहते हैं। हिजड़ा शब्द का प्रयोग लोग मर्दानगी दिखाने के लिए भी करते हैं। इस समुदाय के लोगों को जिन्हें हम अक्सर रेट लाइन एरिया, बस ट्रैन में पैसे मांगते या फिर किसी मोहल्ले मे नाचते गाते देखते हैं, इनके लिए सरकार ने कोई भी व्यवस्था नहीं की है और लॉकडाउन के बाद उनके बारे में कोई खबर लेने वाला नहीं हैं, लेकिन ऐसे वक्त में यह समुदाय आम जनता के लिए सोच रहे हैं और अपनी तरफ से गरीब जनता को भोजन मुहैया करवा रहे हैं। ये ऐसे लोग हैं जो बिना किसी प्रचार के ऐसा काम कर रहे हैं।

मैं ऐसे ही हिजड़ा समुदाय के एक समाज सेवक अन्जू नायक से मिली। अंजू नायक ने दो दिन तक प्रेम नगर-अगर नगर इलाके में आटा, चावल, दाल, तेल और चीनी मिला कर करीब पचास कुंतल सामान अपने पैसे से बांटे।

प्रेम नगर का ही मेरा एक ऐसा अनुभव रहा कि लॉकडाउन के बाद यहां के दुकानदारों का व्यवहार आम लोगों के प्रति एकदम बदल गया है अगर उनसे किसी सामान का दाम पूछकर फिर सामान खरीदने की बात करते हैं तो वो उल्टा-सीधा बोलने लगते है। प्रेम नगर – अगर नगर, नांगलोई से मुबारकपुर के रास्ते में पड़ता है जहां पर बहुत से प्रवासी मजदूर निवास करते हैं। ये प्रवासी पच्चीस गज से तीस गज के प्लॉट खरीदकर अपने मकान बनाये इनमें बहुसंख्या में बिहार के प्रवासी मजदूर हैं। इसके बाद उत्तर-प्रदेश और गढ़वाल कुछ गिने चुने राजस्थान के लोग हैं।

लॉकडाउन से पहले यहां के दुकानदार लोगों को उधार का सामान दे दिया करते थे, जिसका हिसाब महीने के अंत में, होता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद इन्हीं दुकानदारों ने जानबूझकर ऐसा व्यवहार किया ताकि कोई उनसे उधार सामान न मांग ले बल्कि अब तो ये सभी सामान दो से पांच रू- प्रति किलो रुपये महंगा करके ही बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि ऐसा व्यवहार करने वाले वही लोग होते हैं जो देशभक्त होने का दंभ भरते हैं और सरकार के कहने पर थाली की जगह ढोल बजाने लगते या फिर मोबाइल टार्च के साथ पटाखे भी छोड़ते हैं, लेकिन सरकार जब कहती है कि अपने आस-पास के लोगों की मदद करें तो वह बात समझ नहीं आती क्योकि गरीबों की मदद करने से देशभक्ति का इनाम नहीं मिलेगा।

गौरतलब हो कि देश के सबसे बड़े योगगुरु व देशभक्त कहे जाने वाले व्यापारी बाबा रामदेव ने ही लॉकडाउन होते ही पतंजलि के आटे का रेट तीस से अड़तीस रुपये कर दिया, जबकि खुदरा बाजार में 26 से 30 रुपये किलो आटा मिल रहा है। ऐसे में अंजू जैसे इन्सान इन्सानियत की जीती जागती मिसाल है जिन्होंने बिना किसी लाभ के गरीबों की मदद की, वो भी लॉकडाउन के समय जब खुद उनकी आमदनी के दरवाजे बन्द हैं।

यही कारण है कि यहां रह रहे अंजू नायक मेरी उत्सुकता के केन्द्र बन गए और पड़ोसियों से उनके बारे में पूछने लगी तब उन लोगों ने अन्जू का घर तो बता दिया, लेकिन एक उनमें ये उत्सुकता हुई कि आखिर क्या बात है जो मैं उनसे मिलने आई क्योंकि समाज में शायद ही कोई अन्जान महिला इनके बारे में पूछती हो, इस कारण मैं उनकी गली में बैठे लोगों की केन्द्र में आ गई, लेकिन जब मैंने उन्हें बताया क्योंकि उन्होने राशन बांटा था इसलिए उनसे मिलने आई, तब वे लोग सोचने लगे कि शायद राशन लेने के लिए आई हो इसलिए सभी नार्मल हो गए।

अन्जू के घर पहुंचकर उनको बताया कि आपसे बात करने आई हूँ तो वे बेहिचक तैयार हो गए और थोड़ी देर बात करते-करते वो अचानक से बोले कि बेटी चाय बना देती हूँ, पहले पी लो इतनी दूर से आई हो। तो मैंने उन्हे बताया कि मैं भी आपके पड़ोस में रहती हूँ। ये सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा और बड़ी ही आत्मीयता के साथ बात किया।

57 साल के अंजू नायक 1991 में यहां आए थे, इससे पहले वे निठारी गांव मे रहते थे। वो बताते हैं कि जब यहां पर बहुत ही कम आबादी थी अब तो बहुत से लोग आ गए हैं।

अन्जू जी का मानना है कि लॉकउाउन में सभी को सभी का साथ देना चाहिए।

अंजू बोलते हैं कि‘ क्योंकि हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने हमसे कहा था कि हमें अपने आसपास जरुरतमंदों की सहायता करनी चाहिए, इसलिए मैं चाहती हूं कि जब तक बन पड़ेगा मैं लोगों की सहायता करुंगी’।

वो बताती हैं कि इनके और साथी होली चौक रहते हैं और उन्होंने भी अपने मौहल्ले में राशन बांटा है।

वो बताती हैं कि उनके मोहल्ले में सभी लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है वो अपनी गली के लोगों को एक परिवार की तरह देखते हैं। यहां पर उनका तीस गज का मकान है जिसमें वह अपने चेले सनम के साथ रहते हैं।

सनम की उम्र पच्चीस वर्ष है, इसके साथ ही उन्होंने एक गाय तीन बछिया और दो बकरी भी रखी है जो कि उनके परिवार का हिस्सा हैं। जीवनयापन के लिए वो हर खुशी के मौके शादी-ब्याह या बच्चे होने पर लोगों के घर जाते हैं, इसमें उनका क्षेत्र बंटा हुआ है। प्रेम नगर से सटे क्षेत्र राजीव नगर, जैन नगर, सुखवीर विहार और रोहिणी सेक्टर का क्षेत्र आता है।

अंजू ने एलजीबीटीक्यू का नाम कभी नहीं सुना और न ही उन्हें इन सबसे कोई मतलब है कि सरकार उन्हें कोई अधिकार दे या न दे, वो सिर्फ इतना ही जानती हैं कि वे एक इंसान हैं और आज संकट की घड़ी में न कोई हिन्दू है न मुसलमान सब केवल इंसान है और सबको इंसान की मदद करनी चाहिए।

डॉ- अशोक कुमारी

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