लाल किले पर जाने वाले अगर खालिस्तानी थे तो जवाबदेही गृह मंत्री और प्रधानमंत्री की बनती है

लाल किले पर जाने वाले अगर खालिस्तानी थे तो जवाबदेही गृह मंत्री और प्रधानमंत्री की बनती है

If the Khalistani were to visit the Red Fort, then the responsibility of the Home Minister and the Prime Minister is made

लालकिला : प्रसंग किसान और सरकार दोनों की जिद्द देश के लिए दुर्भाग्यशाली

किसानों और सरकार दोनों की जिद देश के लिए दुर्भाग्यशाली बन रही है, सरकार को इसका हल निकालना होगा। किसानों और सरकार के मध्य समझौता हर हालत में आज की प्राथमिक आवश्यकता है। पिछले 60 दिनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं, शांतिपूर्वक अपनी बात रख रहे हैं। इस आंदोलन में 40 से अधिक किसानों की मौत भी हो चुकी है। परंतु सरकार इस आंदोलन को नजरंदाज़ करती रही, किसान की समस्याओं को गंभीरता से न लेकर अनसुनी बनी रही। किसानों की मौतों पर भी बात नहीं की, तो यह सब उचित नहीं है, सरकार को मोदी जी को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें इस समस्या का हल निकालना होगा। यही एक कुशल शासक की कुशलता की निशानी है।

सरकार व किसानों के बीच अब तक कोई निर्णय ना  हो पाना दुर्भाग्य सूचक है, और अब इस आंदोलन को खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।  

असंतुष्ट किसानों की परेशानी बढ़ाना कोई हल नहीं है

किसानों के साथ सख्ती नहीं, युक्तियों से काम लेना होगा, क्योंकि शांति पूर्वक समाधान ही सर्वोत्तम माना जाता है।

कल की हुई घटना पर विचार करें तो प्रश्न उठता है कि जो आंदोलन इतनी शांति के साथ दो महीने तक चला वह आज इतना भयंकर कैसे हो गया। आखिरकार ऐसा क्यों व कैसे घटित हुआ। इसकी पहचान व इस पर मंथन भी सरकार को करनी चाहिए।

निश्चित ही इस घटना को लेकर सरकार पर भी कई गंभीर प्रश्न उठेंगे। लोग पूछेंगे कि लाल किले की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? लाल किले पे जाने वाले अगर खालिस्तानी थे तो गृह मंत्री और प्रधानमंत्री की जवाबदेही बनती है। वह लोग हुड़दंगी थे, उपद्रवी थे, नुकसान करने आये थे तो घुस कैसे गए? सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक और देश बेइज्जती हुई यह तो। इस घटना पर पर प्रधानमंत्री का क्या जवाब है? और फिर जब लालकिले के सुरक्षा घेरे को तोड़कर तिरंगे का अपमान करनेवाला दीप सिद्धू ने अपना नाम स्वीकारा है तो अब तक गिरफ्तारी नहीं हई, आखिर क्यों। 

इतना ही नहीं, आईटीओ पर पुलिस मुख्यालय के सामने सड़क पर बदहवास टैक्टर दौड़नेवाले दो लोग भी टीवी कैमरों पर पहचाने जाने के बावजूद भी नहीं पकड़े गए। उसी तरह जैसे करीब एक साल बीत जाने के बावजूद दिल्ली दंगों के असली दोषी अभी तक आजाद घूम रहे हैं। इसके अलावा किसान नेताओं को भी अपने आस-पड़ोस के लोगों पर विशेष ध्यान देना होगा कि कोई भी अराजक तत्व इस आंदोलन का फायदा ना उठा सके। दोबारा दिल्ली में अराजक तत्वों उग्रवादियों तथा अलगाववादियों का समावेश ना हो इसलिए समझौता करके किसानों को अपने अपने स्थानों पर वापस जाना देश हित में आवश्यक है।

संदीप के. गुप्ता

Sandeep K. Gupta

Assistant Professor, Media Research Scholar

Pondicherry University

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