‘गरिमा के साथ जीने का अधिकार’ सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है

‘गरिमा के साथ जीने का अधिकार’ सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है

It is the responsibility of the government to ensure ‘Right to Live with Dignity’.

लखनऊ 07 फरवरी. तंजीम अली कांग्रेस की अध्यक्षा श्रीमती रुबीना जावेद मुर्तजा ने कहा है कि हम ऐसी सरकार चुनें जिससे सामाजिक जीवन में बेहतरी आए। वह जमा मस्जिद, एकता लान तहसीन गंज  में कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ तंजीम के सरपरस्त श्री हसीन अब्बास रिज़वी एडवोकेट की सदारत में हुई जीम अली कांग्रेस की एक सार्वजनिक मीटिंग, जिसमें देश के सामाजिक व राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई, में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं.

श्रीमती रुबीना जावेद मुर्तजा ने कहा कि अली कांग्रेस एक सामाजिक व गैर-राजनीतिक संगठन है, परंतु राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव सामाजिक जीवन पर पड़ता है इसलिए राजनीतिक हालात पर चर्चा किया जाना जरूरी है.

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वोट देना हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है. लेकिन आज हमें इस बात को समझना होगा कि सही तरह से अपने मताधिकार का प्रयोग करना अपने देश और संविधान के लिए हमारा कर्तव्य है. राजनीतिक विचारधारा सामाजिक जीवन को भी दिशा-निर्देश देती है. इसलिए हमारा यह सामाजिक कर्तव्य है कि हम ऐसी सरकार चुनें जिससे सामाजिक जीवन में बेहतरी आए.

श्रीमती मुर्तजा ने कहा कि यूँ तो कोई भी राजनीतिक दल पूर्ण रूप से हक़ पर कायम नहीं है. ऐसे में हम अपने मताधिकार का प्रयोग कैसे और किस प्रकार करें? इस सवाल के जवाब के लिए हमें मताधिकार का प्रयोग करने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना होगा.

  1. हमें अपने मताधिकार का प्रयोग करके किसी ऐसी राजनीतिक दल को चुनना चाहिए जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाला दल हो क्योंकि इस देश के नागरिक होने के नाते यहां के संविधान की रक्षा करना हमारा कर्तव्य  है. 
  2. किसी क्षेत्र का उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से कितना ही अच्छा क्यों ना हो परंतु अगर वह किसी ऐसे राजनीतिक दल के टिकट पर चुनावी मैदान है, जो संवैधानिक मूल्यों की परवाह नहीं करती बल्कि उसके विपरीत कार्य करती है, तो ऐसे में उस उम्मीदवार का व्यक्तिगत रूप से अच्छा होना किसी भी प्रकार से समाज या देश के लिए फायदेमंद नहीं होगा क्योंकि वह व्यक्ति कभी अपने दल के राजनीतिक विचारधारा से अलग कार्य नहीं कर पाएगा.
  3. भावनाओं में आकर ऐसे किसी भी व्यक्ति को वोट ना करें जिसकी वजह से संवैधानिक मूल्यों तथा लोकतंत्र विरोधी ताक़तों की मदद हो।

श्रीमती मुर्तजा ने कहा कि हम यह भी कहना चाहते हैं कि बात केवल चुनाव पर खत्म नहीं होती, चुनाव के बाद चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार बनें, इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ना चाहिए कि उस राजनीतिक दल को वोट दिया हो या ना दिया हो, यदि उस सरकार की नीतियां असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक होती हैं, तो इस पर संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाना भी एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है.

उन्होंने कहा कि हमारे सामने कई देशों का उदाहरण है जिन्होंने नफरत, हिंसा और सांप्रदायिकता की राह को चुना और खुद को बर्बाद कर लिया और सिवाय पछताने के उनके पास कुछ ना रहा. इसलिए जरूरी है कि हम संवैधानिक मूल्यों की कद्र करें और अपने देश के लिए अमन और भाईचारे के रास्ते को चुनें, इसी में हम सभी का और देश का भला है.

मीटिंग में उपस्थित सभी लोगों ने इस बात का समर्थन किया और कुछ ने अपनी व्यक्तिगत राय भी रखी।

हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अमीर मेंहदी ने कहा कि ‘राइट टू लाइव विद डिग्निटी’ को यकीनी बनाना सरकार का दायित्व है।

Girl students cannot be denied their right to receive education on the basis of hijab in Karnataka

श्रीमती ताहिरा हसन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जरूरी है कि सरकार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करें। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में हिजाब के आधार पर शिक्षार्थियों को उनके शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। 

ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के उपाध्यक्ष जुनेद अशरफ,  मदनी, रेहान अंसारी, हुसैन रिजवी, ज़ुलकिफ़ल रिज़वी, मेराज हैदर, अब्बास निगार, रिज़वान खान श्री इमदाद इमाम और श्रीमती आज़रा मुबीन , भी ने भी अपने विचार रखे। 

श्रीमती सुबही रिजवी ने कहा कि यह जरूरी है कि सब लोग अपने वोट का इस्तेमाल ज़रूर करें मौसम या किसी और बिना पर कोई कोताही न करें। 

जलसे में श्री बहार अख्तर ज़ैदी, श्री लवी नवाब, श्री क़ायम रिजवी, एडवोकेट मोहम्मद आसिम, श्री एस एन  लाल, श्री एडवोकेट सिबतैन, श्री शकील मिर्ज़ा आदि उपस्थित रहे। 

अंत में श्री हसीन अब्बास रिजवी एडवोकेट ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।

यह जानकारी एक विज्ञप्ति में दी गई है।

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