रुद्र : पर मनोरंजन के नाम पर गाली गलौज कब तक!!

रुद्र : पर मनोरंजन के नाम पर गाली गलौज कब तक!!

रुद्र वेब सीरीज़ की समीक्षा | Rudra The Edge of Darkness Review in Hindi | Rudra Web Series Review

रुद्र का फ़िल्म स्कोर सबसे बेहतरीन है जो पूरी वेब सीरीज़ में रोमांच जगाए रखता है और इसे देखने का मज़ा दोगुना भी करता है

रुद्र वेब सीरीज़ की कहानी

रुद्र वेब सीरीज़ की कहानी अंग्रेज़ी वेब सीरीज़ लूथर का रीमेक है।

वेब सीरीज़ की शुरुआत बड़ी तेज़ है और दर्शक इसकी शुरआत से ही खुद को भी कहानी का एक हिस्सा समझने लगेंगे।

छह भागो में बंटे इसके एपिसोड एक के बाद एक रहस्य गहराते हैं। हर एपिसोड में निर्देशक डर का माहौल बनाए रखने में कामयाब हुए हैं।

दर्शक भी खुद को अजय के साथ मर्डर मिस्ट्री (murder mystery) को सुलझाने की कोशिश करता महसूस करेंगे।

हिंसा, गालियां और अश्लीलता परोस रही हैं वेब सीरीज़

धूम्रपान, शराब और गाली वेब सीरीज़ की जरूरत बन गई हैं और हर कोई इन पर अपनी आंखें मूंद कर बैठा हुआ है। फ़िल्म ‘तेरे नाम’ में सलमान के बाल हों या ‘कबीर सिंह’ में शाहिद का बिना हेलमेट बुलेट चलाना, हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने इन्हें खूब कॉपी किया और अब इन वेब सीरीज़ में परोसी जा रही हिंसा, गालियों, अश्लीलता को भी दर्शक कॉपी करेंगे ही। सबसे दुख वाली बात तो ये है कि सीधे फोन के ज़रिए ये जहर हर उम्र के दर्शकों में मिल रहा है।

हालांकि रुद्र में ईशा देओल के साथी के किरदार में रहे सत्यदीप मिश्रा द्वारा सीट बेल्ट लगा कर कार चला एक अच्छा सन्देश देने की कोशिश भी की गई है।

पुलिसकर्मियों के निजी जीवन में तनाव पर बात करती है रुद्र

पुलिसकर्मियों के निजी जीवन में उनकी नौकरी की वजह से जो तनाव होते हैं, उन पर ज्यादा बात नहीं की जाती पर रुद्र इस विषय पर आवाज़ बुलंद करने में सहायक होगी।

वेब सीरीज़ के एक्शन सीन अच्छे हैं और सिनेमाटोग्राफी जबरदस्त है मुंबई की खूबसूरती दिखा, अंधेरे से उजाले की ओर ला दर्शकों की आंखों से खेला गया है।

रुद्र की एडिटिंग (Editing of Rudra) बहुत कसी हुई है, मर्डर मिस्ट्री में हर एक प्वाइंट जोड़े रखना बड़ा मुश्किल काम है पर उसमें सफलता हासिल की गई है।

गीत-संगीत की बात की जाए तो वेब सीरीज़ में इनकी ज्यादा जगह नहीं होती और यहां भी ऐसा ही कुछ है।

अजय देवगन की रुद्र में बेहतरीन अदाकारी

स्पेशल क्राइम यूनिट के अजय देवगन कहर ढा रहे हैं, एक भुक्तभोगी और हीरो दोनों बन उन्होंने अपना पात्र पूरा जिया है।

राशि खन्ना सरप्राइज हैं जो वेब सीरीज़ की जान हैं। तरुण गहलोत भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं।

ईशा देओल साधारण रही हैं तो अतुल कुलकर्णी ने दिखाया है कि फिल्मों के साथ वह वेब सीरीज़ में भी उपयोगी हैं।

आशीष विद्यार्थी वेब सीरीज़ में हैं पर हमेशा लगा है कि अश्विनी कालसेकर की तरह निर्देशक उनसे ज्यादा काम नहीं ले सके, बॉलीवुड में तीस दशक का अनुभव लिए आशीष को कैमरे पर ज्यादा समय दिए जाने की जरूरत थी।

हेमंत खेर ने अपने छोटे से किरदार में प्रभावित किया है।

‘पूरा सिस्टम ही जुमलों पर चल रहा है बॉस।’ संवाद प्रभावित करता है तो ‘जहर है तू रुद्र, जो भी तेरे पास आते हैं।

फैल जाता उनमें तू’ वेब सीरीज़ का सार सामने रखता है।

पुलिसकर्मी द्वारा बारिश में रेनकोट पहना होना जैसी छोटी बात का ध्यान रखते हुए फ़िल्म की स्क्रिप्ट बड़े ध्यान से लिखी गई है।

पांच-पांच घण्टे की वेब सीरीज़ ने निर्देशकों के सामने नई चुनौती रखी है और यह हर निर्देशक के लिए खुद को साबित करने का मौका भी है।

साल 2017 में मराठी फ़िल्म वेंटिलेटर के निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीत चुके राजेश मापुस्कर ने जिस तरह से रुद्र का निर्देशन करते सब कुछ मैनेज किया, उनके काम की आपको तारीफ़ करनी ही पड़ेगी। उन्होंने राशि के आलीशान घर और मुंबई के अंधेरे-उजाले को भी कहानी का हिस्सा बना दिया गया है।

आप इसे लगातार 5 घण्टे बिना रोके देख सकते हैं और इसके बाद रुद्र को दृश्यम की तरह नही रुद्र के तौर पर ही याद रखेंगे।

वेब सीरीज़- रुद्र

अभिनय- अजय देवगन, ईशा देओल, राशि खन्ना

निर्देशक- राजेश मापुस्कर

ओटीटी- डिज़्नी हॉटस्टार

निर्माता- समीर नायर

समीक्षक- हिमांशु जोशी

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