कथित महाबली अमेरिका को पुतिन ने दिन में तारे दिखा दिए हैं !

कथित महाबली अमेरिका को पुतिन ने दिन में तारे दिखा दिए हैं !

कथित महाबली अमेरिका को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिन में तारे दिखा दिए हैं !

Russian President Vladimir Putin has shown the stars to the so-called great America!

तत्कालीन लेनिनग्राद में जिसे वर्तमानसमय में अब पुनः सेंट पीटर्सबर्ग कहते हैं, में 7 अक्टूबर 1952 को जन्मे,जूडो-कराटे के पारंगत खिलाड़ी, तत्कालीन सोवियत संघ के जमाने में सुविख्यात गुप्तचर संस्था कोमिटेट गोसुदर्स्टोवेन्नोय बेजोपास्नोस्ती केजीबी या Komitet Gosudarstovennoy Bezopasnosti (KGB full form) में 16 साल तक एक सफल जासूसी आफिसर रहकर जर्मनी के ड्रेसडेन शहर सहित बहुत सी जगहों पर गोपनीय तरीके से रहकर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाले और अब वर्तमान समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन (Vladimir Vladimirovich Putin) का कहना है कि ‘मुझे लेनिनग्राद की सड़कों ने यह सबक दिया है कि अगर लड़ाई होनी ही है तो अपनी जीत सुनिश्चित और पक्की करने के लिए पहला मुक्का आपको ही मारना होगा।’

साँप-छूछूँदर की गति हो गई है अमेरिका और नाटो की

इस बहादुर व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति ने अभी चल रही यूक्रेन की घटना में अपने उक्तवर्णित कथन को दिलेरी और अत्यंत उच्चतम् मेधाशक्ति का परिचय देते हुए कथित अजेय नाटो सैन्य संगठन के नापाक गठबंधन के मुखिया अमेरिका और उसके दुमछल्ले देशों पर अपना पहला पंच का इतना जबर्दस्त और प्रबल प्रहार किया है कि तथाकथित महाबली अमेरिका और उसके चमचे देशों के कर्णधारों को नैतिक, कूटनीतिक, सामरिक आदि सभी तरह से ऐसी जोरदार पटखनी देकर दिखा दिया है कि उक्त नाटो संगठन के मुखिया और तथाकथित महाबली अमेरिका सहित उसके चमचे शातिर देशों की गति साँप-छूछूँदर की बनकर रह गई है।

समूची दुनिया को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाता रहा है जघन्यतम् हत्यारा अमेरिका!

यह वही अमेरिका है जिसे दूसरे देशों की जनता को दुःखी, भूखमरी, गरीबी, अशिक्षा के दलदल में धकेलने का और करोड़ों बेकसूर इंसानों की नृशंसतापूर्वक सामूहिक तौर पर हत्या करने का एक पागलपन की हद तक पिछले आठ दशकों से एक शगल रहा है ! विरोधाभास देखिए वही जघन्यतम् हत्यारा अमेरिका समूची दुनिया के देशों को मानवाधिकारों का कथित पाठ भी पढ़ाता रहा है !

वर्ष 1991 में तत्कालीन सोवियत संघ  विघटित होकर यूक्रेन सहित 15 देशों में बँट गया,इन देशों में क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा देश रूस भी आर्थिक और सैन्य शक्ति के रूप में इतना गरीब व दैन्य हो गया कि वह वैश्विक राजनैतिक मंच पर एक अछूत सा बन गया ! लेकिन वही देश अपने राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन के कुशल व सक्षम नेतृत्व में अपनी बिखरी शक्ति को पुनः सहेज कर फिर से उठ खड़ा हुआ है ! उसने अमेरिका जैसे खुदगर्ज, घोर स्वार्थी व अपने शक्ति के दंभ में मदांध देश के कर्णधारों और उसके पिछलग्गू देशों के नाटो नामक एक नापाक सैन्य संगठन के माध्यम से अपनी ठीक सीमा पर हो रहे तांडव को काफी दिनों तक बहुत ही विवशता से केवल देखने को अभिशापित रहा, लेकिन जब नाटो सैन्य संगठन के मुखिया अमेरिका और उसके पिछलग्गू देशों ने उसके नेतृत्व में बने वारसा सैन्य संगठन के बिखरने के बाद उसके सदस्य देशों यथा पोलैंड, हंगरी, बल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, यूगोस्लाविया आदि देशों को अपने नाटो सैन्य संगठन में बेशर्मी से सम्मिलित कर ही लिया, इससे भी आगे बढ़कर उसके भूतपूर्व राज्यों यथा लिथुआनिया, लातविया, एस्तोनिया और उसके हृदय प्रदेश यूक्रेन तक को नाटो में शामिल करने की जुर्रत करने लगे तब उसी रूस की सब्र की सभी सीमाएं टूट गईं !

अभी पिछले दिनों यूक्रेन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा की गई कठोरतम् सैन्य कार्यवाही उनके अभी तक किए सभी अनधिकृत कुकृत्यों का एकमुश्त जबाब है !

रूस ने अपनी सीमा से लगे यूक्रेन के दो रूसी बहुल राज्यों क्रमशः पहला 8702 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और 44 लाख की आबादी वाले दोनेत्स्क तथा दूसरे 8777 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और 15 लाख की आबादी वाले लोहान्स्क को एक झटके में दो स्वतंत्र देशों जिनका नाम क्रमशः दोनेत्स्क पीपल्स रिपब्लिक और लोहान्स्क पीपल रिपब्लिक रखकर उन्हें स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देकर पहले से हर ऐक्शन के लिए तैयार अपनी 1 लाख 90 हजार की सेना को इन नवसृजित देशों में शांतिस्थापना के लिए बिना वक्त गँवाए घुसाकर कथित महाबली अमेरिका और उसके चमचे देशों के कर्णधारों के संगठन दुनिया की कथित सबसे बड़े नाटो सैन्य संगठन को दिन में तारे दिखा दिया है !

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को स्पष्ट और बखौफ चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘किसी भी देश को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए दूसरों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए और किसी भी देश को यूक्रेन की जमीन से रूस पर आक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जा सकती, यह भी कि नाटो को अब यूक्रेन को अपना सदस्य देश बनाने का ख्वाब भी नहीं देखना चाहिए और यूक्रेन को रूस के खिलाफ हथियारों से लैस करने का मोह अब पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए।’

रूसी संसद भी यूक्रेन मसले पर पुतिन के साथ

रूसी विदेश मंत्री ने भी बयान दिया है कि ‘यूक्रेन को सही रास्ते पर लाने के लिए कार्यवाही करना उनके देश रूस को मौलिक अधिकार है।’

रूसी संसद ने भी अपने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में अपनी सैन्यशक्ति का प्रयोग कर उसे विदेशी पाले में जाने से रोकने का पूर्ण अधिकार दे दिया है !

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार केवल रूस और चीन की संयुक्त सैन्य शक्ति के सामने अमेरिका नीत समूची नाटो गठबंधन की सैन्यशक्ति आज मुकाबले में कहीं भी नहीं है ! इसीलिए नाटो के सरगना कथित महाबली अमेरिका और उनके छुटभैये देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की गीदड़भभकी तो दे रहे हैं, लेकिन हर तरह से ताकतवर व सक्षम रूसी सेना के सामने आने का नैतिक साहस तक नहीं जुटा पा रहे हैं ! इस प्रकार इस दुनिया के अमेरिका से अरबों दुःखी और त्रस्त लोग अब यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नामक एक बहादुर नायक इस दुनिया को पिछले आठ दशकों से अमेरिकी साम्राज्यवाद के गुँडागर्दी और अमानवीय व्यवहार को रोकने और उसकी नकेल कसने के लिए अपने पूरे दमखम के साथ उठ खड़ा हुआ है ! अब दुनिया के हर लोकतांत्रिक मूल्यों व इंसानियत में विश्वास रखने वाले अरबों लोगों और संस्थाओं का यह पवित्र, पुनीत व अभीष्ट कर्तव्य है कि इस दुनिया के इस मानवीय हितैषी नायक व्लादिमीर पुतिन का हर तरह से समर्थन करें ।

निर्मल कुमार शर्मा

‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण’

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