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Saadat Hasan Manto was a Pakistani writer, playwright and author born in Ludhiana, British India. Writing mainly in the Urdu language, he produced 22 collections of short stories, a novel, five series of radio plays, three collections of essays and two collections of personal sketches.

सआदत हसन मंटो : जिसने भारत विभाजन को पागलपन करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया था, जस्टिस काटजू का लेख

Saadat Hasan Manto strongly opposed Partition of India calling it madness, writes Justice katju

सआदत हसन मंटो (1912-1955)

तीन दिन पहले, 18 जनवरी को, सआदत हसन मंटो (1912-1955) की पुण्यतिथि थी, जिन्हें मैं दुनिया के महानतम कहानीकारों में से एक मानता हूं, और जिनकी तुलना मोपसां ( Maupassant ), सोमरसेट  मौघम ( Somerset Maugham ), डी एच लॉरेंस ( D.H.Lawrence ) , ओ हेनरी ( O Henry ), प्रेमचंद आदि से की जा सकती है।

Upendra Nath Ashk had been Manto’s colleague in the AIR in Delhi

मुझे मंटो से मिलने का सौभाग्य कभी नहीं मिला, लेकिन सिविल लाइंस, इलाहाबाद के कॉफ़ी हाउस में उनके दोस्त उपेंद्र नाथ अश्क से मैं अक्सर मिलता था, जो स्वयं एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी साहित्यकार थे (तब मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील था)।

1941 और 1942 में अश्कजी दिल्ली स्थित ऑल इंडिया रेडियो में मंटो के सहयोगी रह चुके थे और उन्होंने मुझे मंटो के बारे में बहुत कुछ बताया (उन्होंने उन पर एक किताब भी लिखी, जो ‘मंटो मेरा दुश्मन’ के नाम से प्रसिद्ध है)।

अश्कजी ने मुझे बताया कि मंटो एक भावनात्मक, गुस्सैल, अति संवेदनशील व्यक्ति थे।

मंटो की कहानियाँ जैसे ‘खोल दो’, ‘बू’, ‘काली शलवार’, ‘धुआँ’ आदि को कुछ लोगों द्वारा अश्लील भी कही गई हैं (जैसे कि मोपसां की कहानियाँ) और उन्होंने अक्सर समाज के घिनौने, मलिन, निर्बल और भद्दे पक्ष को ज़ाहिर किया, जो उस समय कोई अन्य लेखक करने की हिम्मत नहीं करता था।

अश्लीलता के जुर्म में 6 बार अदालत में उनके खिलाफ मुक़दमे चले, हालांकि उन्हें कभी भी दोषी नहीं ठहराया गया। उन्होंने खुद कहा “लोग मेरी कहानियों को गंदा कहते हैं, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि आपका समाज  गंदा है। मैं केवल सच कहता हूं”।

मंटो ने विभाजन का विरोध किया, इसे पागलपन कहा। उस समय बॉम्बे में रहते हुए जब वे फिल्मों के लिए लेखन कर रहे थे,  फिल्मी दुनिया से जुड़े मुस्लिमों को खतरनाक धमकियां मिलने के कारण उन्हें पाकिस्तान के लिए प्रस्थान करना पड़ा। 

लाहौर में उनकी दोस्ती  फैज़ अहमद फैज़, नासिर काज़मी, अहमद राही, अहमद नदीम कासमी और अन्य लेखकों से हुई, वे अक्सर उनसे  पाकिस्तान टी हाउस में मिलते थे। लेकिन वह पाकिस्तान में कभी खुश नहीं थेI 43 साल की उम्र में ज़्यादा शराब पीने के कारण लिवर   कैंसर की बीमारी से वे चल बसे।

विभाजन के बारे में मंटो की कहानियाँ ‘ठंडा गोश्त’, ‘टिटवाल का कुत्ता’, ‘तोबा टेक सिंह’, आदि मनुष्यों के भयानक पशुवत प्रवृत्ति को उजागर करती हैं, जो केवल सांप्रदायिक घृणा से भरे हुए थे।

वे पत्र जो उन्होँने अंकल सैम ( Uncle Sam i,e. America ) को लिखे थे वह असल में ’पाकिस्तान पर एक व्यंग्य है, जिसमें लिखा था कि वह अमेरिका का एक नव-उपनिवेश बन गया है।

अफ़सोस है कि इतने बड़े लेखक की इतनी जल्दी मौत हो गई।

जस्टिस मार्कंडेय काटजू, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

Note – Saadat Hasan Manto was a Pakistani writer, playwright and author born in Ludhiana, British India. Writing mainly in the Urdu language, he produced 22 collections of short stories, a novel, five series of radio plays, three collections of essays and two collections of personal sketches.

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