हस्तक्षेप.कॉम ‘साहित्यिक कलरव‘ में इस रविवार सुरेन्द्र शर्मा का “आँसुओं का मोल मिल पाता…”

नई दिल्ली, 18 जून 2020. हस्तक्षेप.कॉम के यूट्यूब चैनल पर ‘साहित्यिक कलरव‘ के अगले एपिसोड में इस रविवार सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा का काव्य पाठ होगा। इस संबंध में हस्तक्षेप.कॉम ‘साहित्यिक कलरव‘ के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु व डॉ. कविता अरोरा की  विज्ञप्ति निम्न है।

जैसा कि आप अवगत ही हैं कि हस्तक्षेप.कॉम ‘साहित्यिक कलरव‘ की पृथक् शैली की शुभ-यात्रा देश के जाने-माने नवगीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र जी के गीत के माध्यम से प्रारम्भ हो चुकी है।

इस गीत को दर्शकों ने गीत को ख़ूब दुलारा।

इस साहित्यिक यात्रा की अगली कड़ी में “विगत रविवार,14 जून 2020 को ‘साहित्यिक कलरव’ का ऑडियो-वीडियो कॉलम, साहित्य का एक और मोती लेकर हाज़िर हुआ सुपरिचित नवगीतकार……. आदरणीय डॉ सुभाष वसिष्ठ जी को….जिनका क़ीमती दीर्घ नवगीत ‘शब्द चुप हैं’ ने हमारे कॉलम की शोभा को बढ़ाया।

जहाँ बुद्धिनाथ मिश्र जी की मंजरी आम के कंधों पर सर रख कर सो गयी थी …… ,शब्दों की चुप्पी को वर्तमान माहौल में अपने ढंग से जोड़ा, वहीं डॉ सुभाष वसिष्ठ जी ने और हमने जियें संवेदना के कुछ पल शब्दों के साथ-साथ…….

इस रविवार ….साहित्य जगत और देश का  एक और सितारा हस्तक्षेप के पटल पर अपनी चमक को  बिखेरने आ रहे हैं पद्मश्री आदरणीय सुरेन्द्र शर्मा जी, जिन्होंने अपने हास्य व्यंग्य से देश विदेश में अपनी एक अनूठी छाप छोड़ी है.. मगर उनके हास्य के पीछे एक बेहद संवेदनशील हृदय है जो किसी के दर्द में भी कराह उठता है..

सुरेन्द्र शर्मा जी ने देश के तमाम संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चुटीले व्यंग्य किये हैं और सच्चे मुद्दों को अपनी रचनाओं के ज़रिये जनमानस तक पहुँचाने का प्रयत्न किया है। हस्तक्षेप को नाज़ है उनकी इस देश सेवा पर…

दोस्तों आप भी हास्य से परे.. उनका एक अनोखा रूप देखे सुने ….आँसुओं का मोल मिल पाता…

पद्म श्री सुरेन्द्र शर्मा के बारे में जानें चंद बातें

सुरेंद्र शर्मा भारत के लोकप्रिय हास्‍य कवि (Popular comic poets of india) हैं। उनका जन्‍म 29 जुलाई 1945 को हरियाणा के नांगल गांव में हुआ। वह वाणिज्‍य से स्‍नातक हैं। उन्‍हें पद्मश्री भी मिल चुका है। उनकी कविताओं का लहजा हरियाणवी और राजस्‍थानी मिश्रित होता हैं।

विशेष बात यह है कि सुरेन्द्र शर्मा इतनी गंभीरता से कविता सुनाते हैं कि लोगों को उनको देख कर ही हंसी छूट जाती है।

सुरेन्द्र शर्मा की अधिकतर कविताएं घराणी (पत्‍नी) पर केंद्रित होती है और जैसे ही वह कहते हैं- चार लाइना सुना रिया हूं- लोगों के चेहरे पर मुस्‍कान खेलने लगती है।

सुरेन्द्र शर्मा के अब तक कई व्‍यंग्‍य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

तो इस रविवार 21 जून 2020 को ठीक शाम 4 बजे हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग में सुनें पद्मश्री सुरेन्द्र शर्माजी को…

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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