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दिल्ली दंगे में संघ की भूमिका और मीडिया की चुप्पी

Sangh’s role in Delhi riots and media silence

भाई आरएसएस के लोग आये हैं यहां सपोर्ट में.

ब्रिजपुरी में.

और नौ मुल्लों को मार दिया गया है ब्रिजपुरी पुलिया पर

हिम्मत बनाये रखो और इनकी बजाये रखो

जय श्रीराम…

यह मैसेज दिल्ली दंगे के दौरान बने एक व्हाट्सऐप ग्रुप का है. दंगों में हुई आगजनी और कत्लेआम के एक बड़े हिस्से की तैयारी इसी ग्रुप के ज़रिए हुई थी.

दिल्ली में दंगे भड़के हुए थे और पुलिस इतनी मुस्तैद थी कि तीन दिन तक आगजनी, लूटपाट, हत्या होती रहीं.

25 फरवरी 2020 शाम 4 से 4.30 बजे – मुरसलीन को भीड़ ने घेर कर मारा, उसका स्कूटर जलाया और लाश को भागीरथी विहार नाले में जोहरी पुलिया के पास फेंक दिया.

25 फरवरी 2020 शाम 7 से 7.30 बजे- लोनी की तरफ से पैदल आ रहे आस मुहम्मद को चाकू डंडों से मारा और उसी नाले में फेंक दिया

25 फरवरी 2020 शाम 7.30 से 8.00 बजे – पहले इलाके की बिजली काटी फिर मुशर्रफ को घर से निकाल आकर काट डाला गया- फिर उसकी लाश को उसी नाले में फेंक दिया गया.

25 फरवरी 2020 रात 9.०० बजे- आमीन को मारा और नाले में डाल दिया.

26 फरवरी 2020 सुबह सवा 9 बजे- भूरे अली उर्फ़ सलमान कि हत्या आकर नाले में डाला.

26 फरवरी 2020 रात सवा 9 बजे हमजा की हाथ पैर तोड़े और उसे अधमारा ही नाले में फेंक दिया.

26 फरवरी 2020 रात साढ़े 9 बजे- अकिल अहमद को भी मार आकर नाले में डाल दिया

26 फरवरी 2020 रात 9.40 बजे- हाशिम अली और उसके भाई आमिर को मारा और नाले में लाश फेंक दी.

यह सब काम करता रहा ‘कट्टर हिन्दू एकता’ नामक व्हाट्स एप ग्रुप – जिसके चैट में बात चीत है –

मैं गंगा विहार में हूँ, किसी भी हिन्दू को जरूरत हो तो बताना, पूरी तैयारी है सारे हथियार हैं – क्या 315 बोर के कारतूस मिला जायेंगे ? क्या एक्स्ट्रा पिस्तौल है ? अभी तुम्हारे भाई ने दो मुल्लों को काट कर नाले में फेंक दिया —-

‘कट्टर हिन्दू एकता’ नाम का व्हाट्सऐप ग्रुप 24 फरवरी की रात 12 बजकर 49 मिनट पर बनाया गया था. इस ग्रुप में लगभग 125 लोग जुड़े हुए थे.

पुलिस ने चार्जशीट के साथ ‘कट्टर हिन्दू एकता’ व्हाट्सऐप ग्रुप में 24 फरवरी से आठ मार्च के बीच हुई तमाम बातचीत को भी कोर्ट में जमा किया है. इस ग्रुप में हुई बातचीत आरएसएस, कपिल मिश्रा, मस्जिदों में आग लगाने और मूर्तियां स्थापित करने, बंदूक, पिस्टल और गोली के लेन-देन करने और मुसलमानों को मारने की साज़िश के इर्द-गिर्द रही है. इतना ही नहीं इस ग्रुप में मुस्लिम महिलाओं का दुर्व्यवहार करने की भी बात की गई है.

कूल 125 लोगों का यह ग्रुप दो दिन तक हत्या कर लाश नाले में फेंकता रहा. यह मैं नहीं कह रहा हूं – यह गोकुलपुरी थाने द्वारा अदालत में पेश चार्जशीट में कहा गया है — प्रथम सूचना रिपोर्ट 104/20 दिनांक 3.3. 2020 धारा -147,148, 149, 302,201, 120 बी —

इस मामले में गिरफ्तार 9 में से 8 लड़के महज 19 से 23 साल के हैं – दुखद है कि नफरत का जहर इस छते आयु वर्ग में भर दिया गया और इन्हें हथियारों से लैस किया गया.

लोकेश सौलंकी 19, जतिन शर्मा उर्फ़ रोहित 19, हिमांशु ठाकुर 19, विवेक पांचाल 20, रिषभ चौधरी उर्फ़ तापस 20, सुमित चौधरी उर्फ़ बादशाह 23, प्रिंस 22 और पंकज शर्मा 31 साल.

इस मामले में पुलिस की चार्जशीट कहती है कि यह भीड़ लोगों को पकड़ती—उनसे जय श्री राम के नारे लगवाती- आधार कार्ड देखती और हत्या कर देती. लगभग 30 घंटे में 9 हत्या करना तो इन्होंने कबूला है.

दुर्भाग्य है कि दिल्ली के नागरिक अधिकार समूह के लोगों को बगैर किसी पुख्ता प्रमाण के दंगा भड़काने की साजिश का दोषी बता कर यूएपीए में फंसाया गया लेकिन इतने सुनियोजित तरीके से कई हत्या करने, प्रॉपर्टी जलाने वालों पर कोई संगठित अपराध या दंगा भड़काने की साजिश की धाराएँ नहीं लगायी गयीं.

एक अन्य एफ़आईआर में तो दंगे में आरएसएस की भागीदारी उजागर हो गयी. साहिल ने पुलिस को बताया कि –“25 फरवरी को तकरीबन शाम के 7 बजे होंगे. मैं और मेरे पिता नमाज अदा करने निकले ही थे. बाहर हमारे सामने की गली में सुशील, जयवीर, देवेश मिश्रा (गली 8) और नरेश त्यागी हाथों में तलवार, बंदूकें और डंडे लेकर खड़े थे. जब सुशील ने मेरे पिता को देखा तो हमारी तरफ गोली चला दी. मेरे पिता वहीं जमीन पर गिर पड़े और मैं अपनी जान बचाने के लिए भागा. साहिल ने अपनी शिकायत में दावा किया- उसने कुछ दूरी से देखा कि देवेश और जयवीर उसके पिता के पास पहुंचे और उन्हें लात मारी. फिर उनकी जेब से कुछ चीजें निकाली. वो लोग चिल्ला रहे थे कि आज वो उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे.”

साहिल परवेज की शिकायत में देवेश मिश्रा का नाम था. लेकिन उसे अब तक ना गिरफ्तार किया गया ना उसका नाम चार्जशीट में है. वह 1996 से संघ के साथ जुड़ा हुआ है और बीते आठ सालों से आरएसएस का यमुना विहार डिस्ट्रिक्ट प्रभारी है. हाल ही में वह विश्व हिंदू परिषद से जुड़ गया है. उत्तम लंबे समय तक संघ का प्रचारक रहा है और उनकी कई गतिविधियों में शामिल रहा है. दूसरा भाई नरेश त्यागी भी संघ का नियमित और सक्रिय सदस्य था.

एक अन्य आरोपी हरिओम मिश्रा है. उसकी जिम्मेदारी उत्तरी घोंडा में रोज सुबह शाखा लगाने की थी.

राजपाल त्यागी एक गणित टीचर है. वह भी शहीद भगत सिंह पार्क में रोज सुबह शाखा जाता है.

अन्य नामों में दो भाई अतुल चौहान और वीरेंद्र चौहान, दीपक कुमार, सुशील और उत्तम मिश्रा हैं, जो आरएसएस की शाखा में जाते थे.

इस सारे मामले में मीडिया की भूमिका भेद संदिग्ध रही है.

दिनांक 04 जुलाई के ?हिंदुस्तान” ने इस खबर का एक हिस्सा छापा लेकिन किसी का नाम नहीं लिखा, साथ में टिप्पणी है – सौहार्द कायम रहे इस लिए हम किसी का नाम नहीं ले रहे. लेकिन इसके एक दिन पहले ही पहले पन्ने पर इसी अखबार ने मुस्लिम पक्ष के नाम सहित पुलिस के बयान को खबर बना कर छाप दिया था. इन दिनों दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अपने वकील के जरिये जो जवाब या बयान या सामग्री कोर्ट में पेश करती है उसे — प्रेस को दे देती है और ये अपना इन्वेस्टिगेशन के रूप में इसे छापते हैं. पुलिस का इतना सांप्रदायिक, एकपक्षीय और झूठा स्वरूप तो उत्तर प्रदेश में भी नहीं देखने को मिला- स्पेशल सेल में पूछताछ के लिए बुलाये जा रहे अधिकांश लोग यह कहते पाए जाते हैं कि लगता ही नहीं कि उनसे कोई पुलिस वाला सवाल जवाब कर रहा है- लगता है कि संघ के कार्यालय में कोई तफ्तीश हो रही है.

पंकज चतुर्वेदी

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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