सविता अम्बेडकर को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे वास्तव में हकदार थीं

Savita Ambedkar did not get the honor she truly deserved

आज बाबासाहेब की दूसरी पत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर जी को स्मृति दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।

1987 में मैं बनारस में पुलिस अधीक्षक (आर्थिक अपराध शाखा, सीआईडी) के पद पर तैनात था। एक दिन मुझे पता चला कि बाबासाहेब की पत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर (Dr. Savita Ambedkar, wife of Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar) किसी कार्यक्रम में बनारस आई हैं। आयोजक ने उन्हें एक होटल में ठहराया है परंतु उनके बम्बई वापस जाने का आरक्षण नहीं करवाया है।

मैं उनसे मिलने गया और उन्हें अपने घर ले आया।

वह तीन दिन तक हमारे घर में रहीं। इस दौरान मैंने उनसे बाबासाहेब के व्यक्तिगत जीवन के बारे में बहुत कुछ पूछा।

उन्होंने मुझे बताया कि बाबासाहेब अपने कपड़ों के बारे में बहुत सतर्क रहते थे। बम्बई में उनका सूट वही टेलर सिलता था जो बंबई स्टेट के गवर्नर का सिलता था।

बाबा साहेब भारतीय धोती को बहुत नापसंद करते थे।

उन्होंने बताया था कि जब बाबासाहेब हिन्दू कोड बिल बना रहे थे तो वे 18-18 घन्टे पढ़ते और लिखते थे जिस कारण उनकी सेहत काफी खराब हो गयी थी।

डा. सविता अम्बेडकर से तीन दिन तक बातचीत के दौरान मैंने पाया कि वह बहुत सभ्य, सुशील और सुशिक्षित थीं।

दलित समाज के मुद्दों पर चर्चा के दौरान मैंने पाया कि वह बाबासाहेब के सामाजिक अन्दोलन के प्रति पूरी तरह से समर्पित थीं और वह बाबासाहेब के बौद्ध धर्म के मिशन को आगे बढ़ाना चाहती थीं।

  मैंने उनसे बहुत सारे सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत की और उनके बारे में उन्हें बहुत सजग और समर्पित पाया।

यह बड़ा दुर्भाग्य है कि बाबासाहेब के परिनिर्वाण के बाद महाराष्ट्र के कुछ तथाकथित अम्बेडकरवादियों ने उनके बारे में तरह-तरह का दुष्प्रचार किया था जो उनकी व्यक्तिगत कुण्ठा का परिणाम था। वास्तव में सविता जी को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे वास्तव में हकदार थीं।

एस.आर. दारापुरी

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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