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‘जिम्मेदार कौन’ अभियान : प्रियंका गाँधी ने अस्पतालों में बेड के संकट पर सरकार से पूछे तीखे सवाल

प्रधानमंत्री जी जब कोरोना से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे, उसी समय अस्पतालों में बेड़ों की संख्या कम हो रही थी

क्या प्रधानमंत्री निवास और नई संसद का निर्माण देश के करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं से ज्यादा “अनिवार्य” है?: प्रियंका गाँधी

दिल्ली, 5 जून 2021। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा (Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra) ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में बेडों की कमी (shortage of beds in hospitals during the second wave of corona) पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस समय प्रधानमंत्री जी कोरोना से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे उसी समय देश में ऑक्सीजन, आईसीयू एवं वेंटिलेटर बेडों की संख्या कम की जा रही थी, लेकिन झूठे प्रचार में लिप्त सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सितम्बर 2020 में भारत में 24,7972 ऑक्सीजन बेड थे, जो 28 जनवरी 2021 तक 36% घटकर 15,7344 रह गए। इसी दौरान आईसीयू बेड 66638 से 46% घटकर 36,008 और वेंटीलेटर बेड 33,024 से 28% घटकर 23,618 रह गए।

उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि जुलाई 2020 में गृह मंत्री श्री अमित शाह ने की ITBP के एक अस्थायी मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया था जिसमें 10,000 बेड्स की व्यवस्था थी। 27 फरवरी 2021 में ये सेंटर बंद हो गया। दूसरी लहर के दौरान इसे फिर से शुरू किया गया मगर सिर्फ़ 2000 बेड की व्यवस्था के साथ।

प्रियंका गाँधी ने सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थाई समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बेडों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष फोकस करने की बात कही थी। मगर सरकार का ध्यान कहीं और था।

प्रियंका गांधी ने कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता और आम लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस समय देश भर में लाखों लोग अस्पताल में बेडों की गुहार लगा रहे थे उस समय सरकार के आरोग्य सेतु जैसे एप और अन्य डाटाबेस किसी काम के नहीं निकले।

उन्होंने कहा कि कोरोना विजय की घोषणा कर चुकी सरकार इस मौके पर इतना भी नहीं कर पाई कि आरोग्य सेतु या किसी अन्य डाटाबेस पर सभी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता का डाटा ही अपडेट कर दे, ताकि बेड के लिए इधर-उधर धक्के खा रहे लोगों को कुछ सहूलियत मिल सकती।

प्रियंका गाँधी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की गंभीरता पर भी कई सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार में आते ही स्वास्थ्य बजट में 20% की कटौती करने वाली मोदी सरकार ने 2014 में 15 एम्स बनाने की घोषणा की थी। इसमें से एक भी एम्स आज सक्रिय अस्पताल के रूप में काम नहीं कर रहा है। 2018 से ही संसद की स्थाई समिति ने एम्स अस्पतालों में शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों की कमी की बात सरकार के सामने रखी है, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना कर दिया।

प्रियंका गाँधी ने सरकार से पूछा कि  तैयारी के लिए एक साल होने के बावजूद आखिर क्यों केंद्र सरकार ने ये समय “हम कोरोना से युद्ध जीत गए हैं” जैसी झूठी बयानबाजी में गुजार दिया और बेडों की संख्या बढ़ाने के बजाय बेडों की संख्या कम होने दी?

उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार ने विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थाई समिति की चेतावनी को नकारते भारत के हर ज़िले में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध करने का कार्य क्यों नहीं किया?

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