ऑर्डर-ऑर्डर! मुस्कुराइए कि आप न्यू इंडिया में हैं, यहां चार्ली चैप्लिन के लिए कोई जगह नहीं !

ऑर्डर-ऑर्डर! मुस्कुराइए कि आप न्यू इंडिया में हैं, यहां चार्ली चैप्लिन के लिए कोई जगह नहीं !

Smile you’re in New India, there’s no place for Charlie Chaplin here

वैसे दुखों से भरे जीवन में मुस्कुराहट बड़ी अनमोल चीज हो गई है, ऐसा विद्वान कहते हैं। ये और बात है कि इस मुस्कुराहट से रोज की दाल-रोटी नहीं कमाई जा सकती, न शिक्षा हासिल हो सकती है, न बीमार आदमी मुस्कुरा कर अपने इलाज के पैसे कम करवा सकता है। मरीज मुस्कुराएगा तो डॉक्टर उससे बड़ी मुस्कुराहट फेंक कर ज्यादा बड़ा बिल थमा सकता है कि हमारे इलाज से आपको इतना फायदा हुआ कि आप मुस्कुरा रहे हैं।

गुजरे जमाने के एक अभिनेता हुए चार्ली चैप्लिन। उनके अभिनय की अदाएं कुछ इस तरह हुआ करती थीं, कि दर्शक हंसने पर मजबूर हो जाते। खुद निर्विकार रहकर लोगों को हंसाने वाले चार्ली खुद किन गमों से गुजरते थे, इसकी भनक भी दर्शकों को नहीं लग पाती थी। यहां भारत में शोमैन राजकपूर ने चार्ली चैप्लिन की कई अदाओं को अपने अभिनय में उतारा। मेरा नाम जोकर में भी राजकपूर जोकर के किरदार के पीछे आंसुओं को छिपाए रहते थे, लेकिन सर्कस चलता रहे, तालियां बजती रहें, लोग हंसते रहें यानी पूरा पैसा वसूल हो, यह जोकर का मकसद हुआ करता था। अब न चार्ली चैप्लिन हैं, न राजकपूर।

चार्ली चैप्लिन की मौत के बाद भी नहीं रुका मजाक का खेल

वैसे चार्ली चैप्लिन से जुड़ा एक किस्सा भी मशहूर है कि उनकी मौत के बाद उनके शव को चोरी कर लिया गया था। करीब 11 हफ्ते बाद शव वापस मिला, जिसके लिए लुटेरों ने उनके परिवार से फिरौती की मांग भी की थी। मजाक का खेल उनकी मौत के बाद भी नहीं रुका। पता नहीं चार्ली के शव को चुराने वाले अपने जीवन में हास्य का खजाना भरना चाहते थे या उनका मकसद कुछ और था।

क्या मुस्कुराहट से दाल-रोटी कमाई जा सकती है?

वैसे दुखों से भरे जीवन में मुस्कुराहट बड़ी अनमोल चीज हो गई है, ऐसा विद्वान कहते हैं। ये और बात है कि इस मुस्कुराहट से रोज की दाल-रोटी नहीं कमाई जा सकती, न शिक्षा हासिल हो सकती है, न बीमार आदमी मुस्कुरा कर अपने इलाज के पैसे कम करवा सकता है। मरीज मुस्कुराएगा तो डॉक्टर उससे बड़ी मुस्कुराहट फेंक कर ज्यादा बड़ा बिल थमा सकता है कि हमारे इलाज से आपको इतना फायदा हुआ कि आप मुस्कुरा रहे हैं। विद्यार्थी परीक्षा में मुस्कुराए तो शिक्षक इसी शक में उसके अंक काट लेगा कि कहीं ये नकल तो नहीं कर रहा, या पर्चा लीक हो गया है या इतना आसान प्रश्नपत्र है कि विद्यार्थी परीक्षा से डर ही नहीं रहा। अगर डरेगा नहीं तो एक्जाम वॉरियर्स के नुस्खे कैसे आजमाएगा।

बेरोजगार युवा भी मुस्कुरा नहीं सकता, क्योंकि गुस्सा, आक्रोश, प्रदर्शन ये सब उसकी पहचान बन गए हैं। अगर इनके बिना वो रहे तो बेरोजगार नहीं कहलाएगा। फिर सरकार किस तरह बेरोजगारी भत्ते या रोजगार देने के वादे चुनाव में करेगी।

किसानों का तो पूरा आंदोलन ही राकेश टिकैत की आंख से टपके आंसुओं के कारण नए सिरे से खड़ा हुआ। वर्ना सरकार ने तो उन्हें वापस भेजने की पूरी तैयारी कर ही ली थी।

अब आंसुओं के नमक का कर्ज अदा करें या मोदीजी की माफी का मान रखें, इस उलझन में फंसे किसान भी मुस्कुरा नहीं सकते।

उप्र चुनाव में टिकैत जी का खड़ा किया हुआ मिशन यूपी भी फेल हो गया है, भाजपा फिर से सत्ता में आ चुकी है। तो किसान अब न रो पा रहे हैं, न मुस्कुरा पा रहे हैं, बस सही भाव की तलाश में हैं, अनाज के भी और अपने चेहरे के भी।

लड़कियों के हंसने-मुस्कुराने से हिंदुत्व खतरे में पड़ता है?

लड़कियों, महिलाओं के लिए तो पोंगापंथी संस्कृति में हंसना-मुस्कुराना पहले ही गुनाह बना दिया गया है। लड़कियां तभी हंस सकती हैं, जब उनके पिता, पति, बेटे या भाई हंसे। और वो भी सबके सामने नहीं, केवल उनकी मौजूदगी में। अगर बेपरवाह होकर लड़कियां हंसने-मुस्कुराने लगें तो हिंदुत्व खतरे में पड़ जाएगा।

अल्पसंख्यकों के लिए भी मुस्कुराहट का सवाल टेढ़ी खीर बन चुका है। वो मुस्कुराएं तो सरकार के दावे सच हो जाएंगे कि सरकार को इनसे मोहब्बत है। मोहब्बत में तो इंसान मुस्कुराता ही है, वो भी बेवजह। और अगर न मुस्कुराएं तो उनके सरपरस्त होने का दावा करने वालों के राजनैतिक भाव चढ़ जाएंगे।

It’s more difficult than ever for ordinary people to smile

तो इस तरह आम लोगों के लिए मुस्कुराना पहले से अधिक कठिन हो गया है। हां, नए भारत में अपराधियों के लिए मुस्कुराना बड़े काम की चीज हो सकती है। अब पुराना भारत नहीं है, जहां फिल्मों के खलनायक भयानक शक्लें लेकर घूमते थे। मोगैम्बो खुश हुआ, ये सुनते ही बच्चों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। क्योंकि सैन्य तानाशाह जैसी वर्दी, घुटा सिर और चेहरे पर सख्त मुद्रा के साथ खुश होने का विचार ही खतरनाक लगता है।

हंसी तो गब्बर को भी आई थी, जब एक के बाद एक तीनों आदमी बच गए। गब्बर इतना हंसा कि उसी हंसी में उन तीनों आदमियों की जान ले ली, जिन्होंने सोचा था कि सरदार खुस होगा, शाबासी देगा। शाकाल, छप्पन टिकली, जैसे खलनायकों के दिन लद गए, अब तो सूट-बूट में, महंगे चश्मे, घड़ी और जूते के साथ खलनायक पर्दे पर ऐसे आते हैं कि जनता समझ ही नहीं पाती, नायक कौन है, खलनायक कौन है। ये किरदार हंसते-मुस्कुराते भयानक घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं। और हैरानी की बात देखिए कि फिल्मों की ये कल्पना हकीकत का कड़वा सच बनती जा रही है।

अब न्याय की आसंदी पर बैठे लोगों को लगता है कि अगर मुस्कुराते हुए नफरत भरी जुबान भी बोली जाए, तो उसमें कुछ गलत नहीं है। ऐसी उलटबांसी तो बरसे कम्बल भीजै पानी लिखने वाले कबीरदास जी के पल्ले भी नहीं पड़ सकती।

गौर से सोचिए तो मुस्कुराने से कानून व्यवस्था के बहुत से मसले अपने आप हल हो जाएंगे। मुकदमों के बोझ से दबती अदालतें थोड़ी राहत पाएंगी, क्योंकि बहुत से फैसले इस आधार पर लिए जा सकेंगे कि आरोपी ने मुस्कुराते हुए कृत्य किया या उसके चेहरे पर कोई और भाव था। इस पर भी पहली बार के आरोपियों के लिए तो छूट ही छूट वाला मामला होगा। क्योंकि पंच परमेश्वरों का यह भी मानना है कि पहला आरोप जमानत के योग्य होता है। अगर आरोपी पहली बार मुकदमे में फंसा है और यह साबित हो जाए कि उसने मुस्कुराते हुए किसी को अपशब्द कहे, किसी को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नीलामी के लिए डाला या किसी पर गाड़ी चढ़ाई, तो उसे थोड़े ज्यादा डिस्काउंट के साथ राहत मिल सकती है। आधे से अधिक मुकदमे तो पहली बार और मुस्कुराने के आधार पर ही खारिज हो जाएंगे। बाकी बचे मामलों का निपटान अदालतें अपनी प्राथमिकता के हिसाब से कर ही लेंगी। मुस्कुराने से दबंगों की एक अच्छी छवि जनता के बीच जाएगी और फिर राजनैतिक दलों को चुनाव के दौरान टिकट बांटने पर ये नहीं सुनना पड़ेगा कि इस बार किस दल ने, कितने बाहुबलियों या अपराधियों को टिकट दी।

राजनैतिक दल उनकी मुस्कुराती तस्वीर जनता के बीच प्रसारित करवाएंगे और फिर सब स्वीकार्य हो जाएगा।

गोदी मीडिया के चीखने वाले एंकरों को भी अब मुस्कुरा कर सरकार की लल्लो-चप्पो और विरोधियों पर तंज कसने के बारे में विचार करना चाहिए। अब जो कर रहे हैं, उसे मुस्कुरा कर सरेआम करें, इससे उनकी राष्ट्रवादिता के सबूत और पक्के होंगे।

वैसे स्टैंडअप कॉमेडियन्स इस मुगालते में न रहें कि अब मुस्कुराने को लेकर इतने सकारात्मक विचार फैल रहे हैं तो उनके अच्छे दिन आ जाएंगे। सरकार तो उनसे अब भी नाराज रहेगी, बस ये नाराजगी मुस्कुराहट की शक्ल में बिखरेगी। हो सकता है मुस्कुराते हुए कोई बुलडोजर आपकी ओर आए, तो उससे घबराए नहीं। ये याद करिए कि आपको कौन-कौन सी चीजें इस वक्त मुफ्त मिल रही हैं। फिर अपने आप मुस्कुराहट आपके चेहरे पर आ जाएगी।

व्यापार गुरु रामदेव ने तो हर कठिन योग के बाद हाथ उठा-उठा कर हंसने का खूब अभ्यास देश को सालों साल कराया है। तो मुस्कुराइए कि आप न्यू इंडिया में हैं। यहां चार्ली चैप्लिन के लिए कोई जगह नहीं है।

सर्वमित्रा सुरजन

लेखिका देशबन्धु की संपादिका हैं।

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