अच्छे दिन : रिपोर्ट में खुलासा, बालगृहों के आए बुरे दिन, मुश्किलों में बच्चे

अच्छे दिन : रिपोर्ट में खुलासा, बालगृहों के आए बुरे दिन, मुश्किलों में बच्चे

नसीपीसीआर की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा : 85 प्रतिशत बालगृहों के हालात की हर माह नहीं होती पड़ताल, मुश्किलों में बच्चे

नई दिल्ली, 16 नवंबर 2020. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट (Social Audit Report of National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR)) ने देश भर के चाइल्ड होम्स में सुविधाओं की पड़ताल की तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में बेड, बॉथरूम, टॉयलेट आदि सुविधाओं की कमी सामने आई है।

Total 7163 child homes in the country

देश में कुल 7163 चाइल्ड होम हैं, जिसमें से 6299 होम्स का प्रबंधन एनजीओ के हाथ में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक जेजे एक्ट के हिसाब से 90 प्रतिशत चाइल्ड केयर होम्स में मैनेजमेंट कमेटी तो बन गई है, लेकिन बच्चों की देखभाल को लेकर होने वाली प्रत्येक महीने वाली मीटिंग सिर्फ 15 प्रतिशत चाइल्ड होम में ही होती हैं। बाकी 85 प्रतिशत बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के हालात की हर महीने समीक्षा ही नहीं होती।

23 percent of child homes have to eat from outside

रिपोर्ट से पता चला है कि 45 प्रतिशत बालगृहों के पास ही डॉक्टर्स उपलब्ध हैं। 23 प्रतिशत बालगृहों के बच्चों को बाहर से खाना खाना पड़ता है। 30 प्रतिशत बालगृहों में चाइल्ड ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है। 16 परसेंट चाइल्ड होम्स में फर्स्ट एड ट्रेनिंग नहीं हो रही।

Child homes do not even have basic facilities | बालगृहों में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं
चौंकाने वाली बात है कि देश के 12 प्रतिशत बालगृहों में बाथरूम तक नहीं है, जबकि 18 परसेंट में टॉयलेट तक नहीं है।

जेजे एक्ट के लागू होने के चार सालों के बाद भी अभी तक प्रतिशत चाइल्ड होम्स में टॉयलेट के एंट्री और एक्जिट प्वाइंट पर कैमरा नहीं लगा है। 10 प्रतिशत बालगृहों में बेसिक मेडिकल उपकरण भी नहीं है। जबकि कानूनन चाइल्ड होम्स चलाने के लिए ये अनिवार्य है। 14% चाइल्ड होम्स में तो बाथरूम भी नियमों के हिसाब से नहीं है। चार फीसदी में तो पीने का साफ पानी तक भी नहीं है। लगभग 15% बालगृहों में तो बच्चों के लिए अकेले बेड भी नहीं है।

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner