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Communist Party of India CPI

सचिन श्रीवास्तव को अवैध रूप से हिरासत में लेने की कड़ी भर्त्सना

Strong condemnation of illegal detention of Sachin Srivastava

भोपाल, 16 नवंबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विगत 15 नवंबर 2021 को प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भोपाल यात्रा के पूर्व युवा पत्रकार लेखक, संस्कृति कर्मी सचिन श्रीवास्तव को लगभग 20 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में लेने की कड़ी भर्त्सना की है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्य प्रदेश राज्य परिषद के राज्य सचिव कॉमरेड अरविंद श्रीवास्तव, राज्य सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड शैलेन्द्र शैली, कॉमरेड सत्यम पांडे ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि सचिन श्रीवास्तव 14 नवंबर की रात जब सागर से भोपाल लौटे तो पुलिस ने देर रात उनके घर जाकर अवैध रूप से हिरासत में लिया। इसके साथ ही सरकार के आदेश पर भारतीय कम्युनिस्ट नेता के राज्य सचिव मंडल सदस्य और अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय महा सचिव प्रह्लाद दास बैरागी को  भी पुलिस तलाशते हुए सागर तक पहुंची और उन्हें एक दिन तक सागर से कहीं भी बाहर जाने से रोका। पुलिस के पास इस कार्रवाई को करने का कोई जवाब नहीं है।

संबंधित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इसे सरकारी आदेश का पालन करने की मजबूरी बता रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की तरह ही मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार अपना फासीवादी एजेंडा कड़ाई से लागू कर रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश सरकार की कड़ी भर्त्सना करते हुए इस तरह की असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक कार्रवाई को रोकने की मांग करती है।

भाकपा नेताओं ने बताया कि सचिन श्रीवास्तव एक युवा पत्रकार होने के नाते भाजपा सरकार की जन विरोधी नीतियों और फासीवादी प्रवृत्तियों का रचनात्मक स्तर पर प्रतिरोध कर जन शिक्षण करने के अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। वे कभी भी किसी हिंसक, आतंक गतिविधियों में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद सरकार के आदेश पर उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया। एक नागरिक की अभिव्यक्ति की आजादी और मानव अधिकार पर यह सरकार द्वारा किया गया हमला है। यह लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

भाकपा नेताओं ने बताया कि यदि अभिव्यक्ति की आजादी और मानव अधिकारों पर भाजपा सरकार के हमले जारी रहे तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा व्यापक रूप से विरोध प्रदर्शन कर उच्च स्तर पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

भाकपा ने इस तरह के मामलों में भारत के राष्ट्रपति, राज्यपाल और मानव अधिकार आयोग से भी सीधे हस्तक्षेप करने के मांग की है।

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