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सूरजमुखी सूर्य की ओर क्यों मुड़ता है? | Sunflower in Hindi

सूरजमुखी का नामकरण कैसे हुआ? रात में सूरजमुखी के फूल की दिशा कौन सी होती है?

सूरजमुखी (Sunflower in Hindi) को यह नाम शायद इसलिए दिया गया होगा क्योंकि इसका फूल सूरज की तरह दिखाई पड़ता है – वृत्ताकार आकृति और किरणों की तरह फैलती पीली पंखुड़ियां। लेकिन फिर लोगों की दृष्टि में यह तथ्य भी आया होगा कि खिलती हुई इस पौधे की कलियां दिन में सूरज की स्थिति की ओर उन्मुख रहती हैं। सुबह को वे पूर्व की ओर उन्मुख होती हैं, दिन में सूरज की स्थिति की ओर बने रहकर शाम तक पश्चिम की ओर घूम जाती हैं और रात में फिर घूम कर सुबह तक फिर पूर्वोन्मुखी हो जाती हैं।

सूरजमुखी के फूल का मुख किस दिशा में रहता है? क्यों सूरजमुखी सूर्य की ओर मुड़ता है? सूरजमुखी का फूल सूर्य की ओर ही क्यों रहता है?

सूरजमुखी के नामकरण (names of sunflowers) में शायद इस तथ्य की भी भूमिका रही होगी। किंतु यदि आप सूरजमुखी के परिपक्व फूलों को देखें तो वे सूर्य के साथ गति नहीं करते, हर समय पूर्वोन्मुखी रहते हैं। सूरजमुखी के फूलों का यह आसाधारण व्यवहार भी पौधे द्वारा फलने-फूलने के लिए अनुकूल परिस्थिति निर्माण प्रक्रम का अंग हैं। सूरजमुखी के फूल (sunflower flowers) के इस विशेष व्यवहार का अध्ययन सबसे पहले वनस्पति विज्ञानी जोहन शैफनर (Botanist Johann Wilhelm Schaffner) ने किया था। उस समय अमरीकी मूल का यह पौधा यूरोपीय देशों में अवांछित खरपतवार था और बोटैनिकल गजेट में प्रकाशित शैफनर के अध्ययन ने ही वैज्ञानिकों का ध्यान इसकी ओर खींचा था।

अभी तक वैज्ञानिक सूरजमुखी के फूलों के सूर्य की ओर उन्मुख रहने की विधि और व्यवहार का ठीक से व्याख्या नहीं कर पा रहे थे। किंतु हाल ही में प्रतिष्ठित शोध पत्रिका साइंस में छपा एक लेख इस रहस्य के उद्घाटन का दावा करता है। कैलिफोर्निया डेविस विश्वविद्यालय की पादप जैविकी की प्रोफेसर स्टैसी हर्मर (Stacey Harmer Professor-Department of Plant Biology, College of Biological Sciences) ने पौधों में सर्केडियन रिदम, Plant Circadian Rhythms– एक आंतरिक घड़ी जो बाह्य जगत के प्रभावों के अनुरूप संचालित होती है – के अध्ययन के दौरान इस रहस्य को समझा।

हर्मर ने अपने एक विद्यार्थी हैगप अटैमियन को दिन के अलग-अलग समय पर फूल के निकट की डंठल के विभिन्न भागों में वृद्धि मापने का काम दिया। पहले अटैमियन ने फूलों की डंठलों पर फंकचें लगाकर उनको घूमने से रोक कर देखा और पाया कि जिन फूलों की सूर्योन्मुखी गति अवरुद्ध की गई थी उनकी वृद्धि भी रुक गई, वे छोटे रह गए और मुरझाने लगे। स्पष्ट था सूर्योन्मुखी बने रहने से फूलों को लाभ था।

फिर अटैमियन ने गमले में लगे सूरजमुखी के पौधों को एक ऐसे प्रकोष्ठ में रखा जिसमें सिर्फ छत पर एक तीव्र प्रकाश लगा था और पाया कि कई दिन तक पौधे में पूर्व से पश्चिम की ओर सूर्योन्मुखी गति हुई। अत: पौधे की यह गति स्पष्टत: सर्केडियाई गति थी और पौधे की आंतरिक घड़ी निश्चय ही इस गति को नियंत्रित करती थी।

पौधे जंतुओं की तरह सोते तो नहीं हैं पर उनमें भी कुछ जीन ऐसे होते हैं जो प्रकाश के प्रभाव में उनके व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।

एक अन्य प्रयोग में हर्मर और उनके दल ने सूरजमुखी के फूल के निकट तने पर सभी ओर बराबर दूरियों पर कुछ बिंदु अंकित किए और सुबह-दोपहर और शाम को उन बिंदुओं के बीच की दूरी को मापा। उन्होंने पाया कि सूर्य के प्रकाश में वृद्धि हार्मोन ऑक्सिन फूल के वृत्त में इस प्रकार वृद्धि करता है कि उसका फूल सूर्य की ओर घूम जाता है। पौधे की यह प्रवृत्ति अनुकूलन का परिणाम है, क्योंकि मधुमक्खियों एवं अन्य कीटों को ऊष्ण फूल पसंद हैं और सूर्योन्मुखी रहने से उनमें ऊष्णता बनी रहती है और परागण के अवसर बढ़ जाते हैं। परिपक्व होने पर फूल पूर्वोन्मुखी बने रहते हैं क्योंकि परिपक्व होकर वे दृढ़ हो जाते हैं और सुबह-सुबह की उष्णता से प्रभावित कीटों से अधिक को आकर्षित करने की आवश्यकता नहीं रहती।

– राम शरण दास

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