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Pregnant woman. (File Photo: IANS)

सरोगेसी महिला शोषण का नया हथियार, इसे मानव तस्करी से भी जोड़कर देखें

कानून विशेषज्ञ नगीना खान का आलेख | Women have always been considered second-rate

हर रोज़ महिलाओं को किसी ना किसी तरह घर के भीतर या घर के बाहर शोषण का शिकार होना पड़ता है। सम्पूर्ण विश्व की आबादी में लगभग 49.59 प्रतिशत महिलाएं हैं फिर भी पुरुष प्रधान देश (Male dominated country) और पितृसत्ता की सोच (Patriarchy thinking) के लिहाज़ से महिलाओं को हमेशा दोयम दर्जे का समझा गया

So a woman is not born; she is made; she is a construct – Simone de Beauvoir

सिमोन कहती हैं कि “स्त्री पैदा नहीं होती, बना दी जाती है।” यह कहा जा सकता है कि लिंगों के बीच अधिकारों की असमानता का स्रोत और कुछ नहीं, सिर्फ सबसे ताकतवर का कानून है।”

शोषण का नया रास्ता है सरोगेसी | Surrogacy is the new way of exploitation

बलात्कार हो, हत्या हो, छेड़छाड़ हो या शारीरिक हिंसा हो, हर स्त्री को इन सबसे दो-चार होना पड़ता है। इसी कड़ी में शोषण का नया रास्ता है या यूँ कहें कि फेहरिस्त में अगली कड़ी है ‘सेरोगेसी’।

सरोगसी शब्द से मतलब ऐसी व्यवस्था से है जिसमें कोई दम्पती बच्चे पैदा करने के लिये किसी अन्य महिला की कोख किराये पर लेते हैं।

भारत में पहली बार सरोगेसी कब हुई | सरोगेसी क्या है Hindi me

23 जून 1994 मे सरोगसी की पहली बार शुरुआत हई और आज के हालात ये हैं कि भारत प्रजनन बाजार के एक केन्द्र के रूप में उभरा है या यूँ कहें कि केन्द्र बन चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में सरोगेसी (किराये की कोख) को तर्क संगत माना जाता है। यहाँ लगभग हजारों ऐसे क्लिनिक हैं जो ऐसी सेवायें प्रदान करते हैं।

India has become a hub of surrogacy at the commercial level

भारत में अभी तक इस विषय पर कोई ठोस कानून नहीं बनाया गया जिसके कारण आज भी गरीब और अशिक्षित महिलाएं आर्थिक सामजिक कारणों से शोषित हो रही हैं।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि 1200 IVF क्लिनिकों में 104 ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) में रजिस्टर्ड हैं। भारत व्यावसायिक स्तर पर सरोगेसी का हब बन चुका है, जिसके लिये ‘ग्लोबल सिस्टरहूड’, ‘बेबी फैक्ट्री’ जैसे नामों का इस्तेमाल किया जाता है। कोख की खरीद फरोख्त वाले नज़रिये से कई नैतिक सवाल उठते हैं।

तथ्यों की मानें तो भारत मे सरोगेसी अरबों का उद्योग बन चुका है लेकिन अमेरिका की तुलना, भारत में मिलने वाली राशि 10वें हिस्से के बराबर है। 2002 मे व्यावसायिक सरोगेसी को बिना किसी कानून के इज़ाजत दी गयी थी। सरोगेसी को लेकर उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता जयश्री वाड ने व्यवसायिक सरोगेसी पर रोक लगाने के लिये जन हित याचिका (PIL) दाखिल की थी।

2005 मे IMCR ने सरोगेसी की नियन्त्रित करने के लिये कुछ दिशा निर्देश जारी किये थे जो शोषण को रोकने के लिये काफी नहीं थे। वहीं 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यावसायिक तौर पर सरोगेसी प्रथा को लेकर कुछ सवाल उठाये।

सुप्रीम कोर्ट ने बेबी मांजी यामादा v/s केन्द्र सरकार (Baby Manji Yamada vs Union Of India & Anr on 29 September, 2008) के मामले में कहा कि भारत मे व्यवसायिक सरोगेसी मान्य है।

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बेबी मांजी ने जापानी अभिभावकों पर आरोप लगाया था और गुजरात में वह सरोगेट माँ बनी थी। आनुवांशिक पिता बच्चे का संरक्षण प्राप्त करना चाहता था लेकिन भारतीय कानून एकल पुरुष को यह अधिकार नहीं देता था वहीं जापानी कानून सरोगेसी को नहीं मानता था।

देखा जाये तो इस स्थिति को देखते हुए व्यवसायिक सरोगेसी के तौर पर कानूनी भ्रम उत्पन्न हुआ। 2014 में सरोगेसी के विनियमन के लिये एक विधेयक (Ordinance) बना जिसके आधार पर भारत में सरोगेसी (विनियमन) विधेयक का मसौदा तैयार हुआ, जिसको 19 दिसंबर 2016 में पारित किया गया।

विश्व के अन्य देशों में व्यवसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगा रखा है। जर्मनी, नार्वे, इटली, स्वीडन और सिंगापुर में पूरी तरह सरोगेसी बैन है। 2015 में थाईलैंड में भी विदेशी नागरिकों के लिये व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

महिला अधिकारों को लेकर खुले मंच या संसद में बहस तो बहुत होती है पर कोई कदम उठाने में लापरवाही और लचर रवैया बहुत से सवालों को जन्म देता है। सरोगेसी एक ऐसा मुद्दा है जो प्रत्यक्ष रूप से समाज और महिला से जुड़ा है।

Surrogacy laws in India 2019

सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2019 में फरवरी 2020 को सरकार ने कई बदलाव किए जिनके अनुसार कमर्शियल सरोगेसी (Commercial Surrogacy) करने वाले लैब्स, क्लीनिक या फिर विज्ञापन देने वालों पर 10 साल की जेल और 10 लाख का जुर्माना हो सकता है। अब देखना है कि कानून का रूप देने में जाने कितना वक्त और इन्तिज़ार करना पड़ेगा??

सरोगेसी कोई व्यापार नहीं है पर कानूनी ढांचे के अभाव में इसे व्यापार में बदल दिया गया है। बिल में महिला अधिकार ओर सुरक्षा के जिन आयामों का समावेश करना चाहिए था वे आज भी पहुंच से दूर है। बल्कि इसने महिला शोषण का इक रास्ता और खोल दिया। सरोगेसी जैसे गंभीर मुद्दे पर केवल सतही तौर पर ही बात हुई।

नगीना खान - Nagina Khan युवा अधिवक्ता व कानून शिक्षिका हैं।
नगीना खान – Nagina Khan युवा अधिवक्ता व कानून शिक्षिका हैं।

डॉ चंद्रा बताती है कि सरोगेसी एक बहुत महंगी प्रक्रिया है। उत्तर प्रदेश राज्य में ही 70 से ज्यादा महिलाएं हर साल अपनी कोख बेचती हैं। भारत में किराए की कोख यानी सरोगेसी का बाजार लगभग 63 अरब रुपये से ज्यादा का है। गर्भ धारण के दौरान सरोगेट माताएं अलग सामूहिक शयन गृहों (डॉर्मेट्री) में रहती हैं, जिसे आलोचक ‘बेबी फैक्टरी’ कहते हैं।

जिस देश में गरीबी, अशिक्षा और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के पर्याप्त साधन उपलब्ध न हो, एक बड़ा तबका भुखमरी और अशिक्षा से जूझ रहा हो, ऐसे में सरोगेसी महिला शोषण का नया हथियार साबित होगा। इसे मानव तस्करी से भी जोड़कर देखा जा सकता है। ऐसे में एक मजबूत कानून की बेहद आवश्यकता है लेकिन जाने सरकार की नींद कब खुलेगी?

नगीना खान

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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