मानवाधिकार और लोकतंत्र का मौजूदा दौर में कोई विकल्प नहीं

Human rights

मानवाधिकार और लोकतंत्र – Human Rights and Democracy आज कितने देश हैं जहां मानवाधिकार सुरक्षित हैं (How many countries are there today where human rights are protected?)? कितनी सरकारें उनका पालन कर रही हैं ? मानवाधिकारों पर हमला (Attack on human rights) आज के युग की सबसे बड़ी दुर्घटना है। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी,

आमिर खान पर संघी हमला तर्कहीनता की सीमा लांघ रहा है

Sanghi attack on Aamir Khan is crossing the threshold of irrationality

Sanghi attack on Aamir Khan is crossing the threshold of irrationality यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) का युग है और यह अधिकार होना भी चाहिए। किंतु अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब (Freedom of expression means) कल्पनाओं को सच बताने या झूठ बोलने की आज़ादी नहीं होता। इस आज़ादी में यह निहित है कि

इतना क्यों चौंकते हैं हम? ये आज़ादी दरअसल गुलामी है, जो आज़ादी की शक्ल में हमें भरमाती है

Why are we so surprised? This freedom is actually slavery, एक दिन, वन फाइन डे, प्रशांत भूषण दोषी ठहरा दिए गए अवमानना के। हम सब चौंक उठे। एक दिन, ऐसे ही, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने फेसबुक पर स्टोरी लिख दी (The Wall Street Journal wrote the story on Facebook), सब चौंक गए। ऐसे ही किसी

आरएसएस-भाजपा की डरी सरकार बढ़ी आपातकाल की ओर – दिनकर

दिनकर कपूर Dinkar Kapoor अध्यक्ष, वर्कर्स फ्रंट

वर्कर्स फ्रंट ने एस्मा लगाने की कड़ी निंदा की संविधान विरूद्ध सांकेतिक प्रदर्शन से रोकने का आदेश, जायेंगे हाईकोर्ट  लखनऊ 23 मई 2020, कोरोना महामारी (Corona epidemic) से निपटने में पूरे तौर पर विफल रही और कारपोरेट की सेवा में लगी आरएसएस-भाजपा की सरकार (RSS-BJP government) अंदर से बेहद डरी हुई और यहीं वजह है

राजनीतिक कैंसर है अवसरवाद : लेनिन की पुण्यतिथि पर विशेष

special on Lenins death anniversary

Opportunism is political cancer : special on Lenin’s death anniversary लेनिन का पाठ बार-बार अनेक मामलों में बुर्जुआ नजरिए के प्रति वैकल्पिक दृष्टि देने का काम करता है। सोवियत संघ में एक जमाने में आलोचना की स्वतंत्रता को लेकर बहस (Debate over the freedom of criticism in the Soviet Union) चली है। बुर्जुआ लोकतांत्रिक नजरिए