काम करा कर किसी मिस्त्री का पैसा दबा लेना, यह कौन सी पत्रकारिता है मित्ररों ?

arnab goswami,

अर्नब गोस्वामी का यह मामला, न तो पत्रकारिता के मूल्यों से जुड़ा है और न ही अभिव्यक्ति की आज़ादी का है। यह मामला, काम कराकर, किसी का पैसा दबा लेने से जुड़ा है। यह दबंगई और अपनी हैसियत के दुरुपयोग का मामला है।

अमित शाह के गुरु जैसे अमर सिंह को इतिहास अच्छे रूप में नहीं सफल रूप में याद करेगा… कई बार चाणक्यों का स्थान चन्द्र गुप्त से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है

Amar Singh

मेरी यादों में अमर सिंह | Amar singh in my memories अगर भारतीय राजनीति के पंडित कुछ सबक सीखने की इच्छा रखते हों तो उन्हें अमर सिंह के जीवन का अध्ययन (Study of life of amar singh) करना चाहिए जिन्होंने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के हर स्तम्भ की कमजोरियों को सरे आम उजागर किया। दुर्भाग्य यह

बुरी तरह डरी हुई सरकार कर रही वर्चुअल रैली

Badly scared government is doing a virtual rally कोविड-19 महामारी के बेकाबू होते जा रहे हालात (The situation of COVID-19 epidemic is becoming uncontrolled) के बीच केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा नेता अमित शाह द्वारा वर्चुअल रैली (Virtual Rally in Bihar by Amit Shah) कर बिहार चुनाव का शंखनाद करने की प्रिंट मीडिया में प्रमुखता

नये गोडसे की करतूत : गांधी हैं नहीं और सरदार की कुर्सी पर गोडसाओं के हिमायती बैठे हैं

RamBhakt Gopal.jpg

नये गोडसे और नये गांधी New godse and new gandhi इसे अगर संयोग भी मानें तब भी बहुत इसे बहुत अर्थपूर्ण संयोग कहना होगा। महात्मा गांधी की शहादत (Martyrdom of mahatma gandhi) की 72वीं बरसी पर, खुद को ‘रामभक्त’ गोपाल बताने वाले एक नौजवान ने, 2020 की 30 जनवरी को, 1948 की 30 जनवरी की

अपने ही देश के आठ राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं 56” प्रधानमंत्री और गृहमंत्री

Ravish Kumar

नागरिकता क़ानून के पास होते ही गृहमंत्री अमित शाह को मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में दौरा करना पड़ा। क़ायदे से जहां से इस क़ानून की उत्पत्ति हुई है वहाँ जाकर लोगों को समझाना था मगर एक महीना हो गया गृहमंत्री असम या पूर्वोत्तर के किसी राज्य में नहीं जा सके हैं। अमित शाह दिल्ली के

अमित शाह की ज़ुबान से निकले शब्द गाली क्यों बन जाते हैं

Amit Shah at Kolkata

अमित शाह की ज़ुबान से निकले शब्द गाली क्यों बन जाते हैं अमित शाह की भाषा का असली अर्थ ! अब सचमुच अमित शाह की ज़ुबान से निकला ‘नागरिक’ शब्द भारत के लोगों के लिये शत्रु को संबोधित हिक़ारत भरी गाली बन चुका है। यह बात सचमुच बहुत दिलचस्प है। फ्रायड कहते हैं कि आदमी