जानिए अनुच्छेद 32 क्या है और सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसले और हालिया विवाद

Supreme court of India

जब कानून की व्याख्या एक ही आधार और प्रार्थना पर दायर अलग-अलग व्यक्तियों की याचिका पर अलग-अलग तरह से होती है। तब सन्देह के स्वर भी उभरते हैं और अदालत की निष्पक्षता पर सवाल भी उठते हैं। इन समस्याओं से निपटने का भी दायित्व अदालतों का है न कि किसी अन्य का।

मी लॉर्ड ! क्या न्यायपालिका, ‘तुम मुझे चेहरा दिखाओ, मैं तुम्हें कानून बता दूंगा’ के आभिजात्य सिंड्रोम से ग्रस्त हो रही है ?

Supreme court of India

अगर सर्वोच्च न्यायालय में, कुणाल कामरा पर मानहानि का मुकदमा चलता है तो, यह इस साल की दूसरी बड़ी मानहानि की कार्यवाही होगी जो देश की लीगल हिस्ट्री (Country’s legal history) में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखेगी। पहली प्रशांत भूषण का मुकदमा था और दूसरा कुणाल का होगा।

मी लॉर्ड! अर्णब गोस्वामी का मुकदमा क्या वाकई उनकी निजी स्वतंत्रता से जुड़ा है ?

arnab goswami,

किसी भी संस्था की विश्वसनीयता बनी रहे, यह सुनिश्चित करना उक्त संस्था का ही दायित्व है। भव्य गुम्बदों और प्रशस्त कॉरिडोर में आवासित होने से ही कोई संस्था विश्वसनीय और महान नहीं बनती है। सर्वोच्च न्यायालय, अर्णब गोस्वामी के मुकदमे के बाद जो सवाल उस पर उठ रहे हैं का समाधान करने की कोशिश करेगा या नहीं, यह तो भविष्य में ही ज्ञात हो पायेगा।

आख़िर कुणाल कामरा ने किया क्या है ?

Kunal Kamra

भारत के एडवोकेट जनरल ने कुणाल कामरा के ट्वीट को हज़ारों-लाखों लोगों तक पहले ही पहुँचा दिया है। अब शायद खुद सुप्रीम कोर्ट उसे घर-घर तक पहुँचाने का बीड़ा उठाने वाला है। यह प्रकारांतर से सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान सच को घर-घर तक पहुंचाने का उपक्रम ही होगा।

मीलॉर्ड क्या व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार संविधान ने बरवर राव को भी दिया है ?

Supreme court of India

अर्णब गोस्वामी केस में, सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्वतंत्रता के सिद्धांत को प्राथमिकता दी। यह एक अच्छा दृष्टिकोण है और इसे सभी के लिये समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। राज्य को किसी भी नागरिक को प्रताड़ित करने का अधिकार नहीं है। पर यह चिंता सेलेक्टिव नहीं होनी चाहिए

भाजपा के गुंडों ने पत्रकार को बेरहमी से पीटा, राहुल ने पूछा कुछ चुनिंदा पत्रकारों के लिए ही अधिकार याद आएँगे क्या ?

Rahul Gandhi

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को अंतरिम बेल दिए जाने पर सोशल मीडिया पर तमाम तरह से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस बीच पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की एक खबर शेयर करते हुए ट्वीट किया,

काम करा कर किसी मिस्त्री का पैसा दबा लेना, यह कौन सी पत्रकारिता है मित्ररों ?

arnab goswami,

अर्नब गोस्वामी का यह मामला, न तो पत्रकारिता के मूल्यों से जुड़ा है और न ही अभिव्यक्ति की आज़ादी का है। यह मामला, काम कराकर, किसी का पैसा दबा लेने से जुड़ा है। यह दबंगई और अपनी हैसियत के दुरुपयोग का मामला है।

क्या अर्नब गोस्वामी ने पहली बार साम्प्रदयिक वैमनस्यता फैलाई है ? भाजपा ने चैनल खुलवाया है तो उसके एजेंडे पर ही तो काम करेगा !

arnab goswami,

Is Arnab Goswami spreading communal disharmony for the first time? If the BJP has opened the channel, then it will work only on its agenda!   देश का दुर्भाग्य (Misfortune of the country) यह है कि  देश उन राजनीतिक दलों के भरोसे है जो समाज में गुलाम पैदा कर रहे हैं। जिनका मकसद किसी भी