अनपढ़ मार्क्सवादियों से मार्क्सवाद को सबसे ज्यादा ख़तरा है

राजनीति और विचारधारात्मक कार्यों में कोई अछूत नहीं होता। लोकतंत्र में जो वामपंथी अछूतभाव की वकालत करते हैं, मैं उनसे पहले भी असहमत था आज भी असहमत हूँ।

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जन आंदोलनों को धर्म के चश्मे से देखना आत्मघाती और राष्ट्रघाती… जब आप जैसी जनता होगी तो कोई भी शासक, तानाशाह बन ही जायेगा

Seeing mass movements through the prism of religion is suicidal अब एक नया तर्क गढ़ा जा रहा है कि इन किसानों को भड़काया जा रहा

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