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Tag Archives: इतिहास

83 वर्ष के इतिहासकार ने क्यों कहा कि यह देश एक दो पीढ़ी की बर्बादी देखेगा !

opinion, debate

एक बातचीत मेरे पहले इतिहास शिक्षक के साथ। A conversation with my first history teacher. इतिहास में मेरे पहले शिक्षक डॉ माणिकलाल गुप्त जी हैं। अक्टूबर 1989 में पहली बार इनसे मिला था। इन्होंने ही मुझे इतिहास की किताबें, तमाम इतिहासकारों के नाम और काम, भारतीय इतिहास कांग्रेस, विश्व इतिहास, एशिया का इतिहास, औपनिवेशिक राज्य, इतिहास दर्शन और न जाने …

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अशोक भौमिक : प्रसिद्ध चित्रकार और चित्रकला के इतिहासकार

book review

Ashok Bhowmik: Famous painter and historian of painting अशोक भौमिक देश के प्रसिद्ध चित्रकार हैं और चित्रकला के इतिहासकार भी। यह उनकी सदाशयता है कि हम जैसे मामूली इंसान भी उनके दोस्तों में शामिल हैं। अशोक भौमिक का स्तंभ ‘चित्रकला और मनुष्य’ अपनी पत्रिका में उनका स्तंभ चित्रकला और मनुष्य हम नियमित छाप नहीं सकते, फिर भी दशकों की मित्रता …

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Poila Baishakh 2022 : बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल

the crisis of caste identity and the bengali new year poila baisakh

बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल पर क्षण भर बांग्ला नववर्ष पोयला बैशाख (Bengali New Year Poila Baishakh 2022) की सभी मित्रों को आंतरिक बधाई। हम अपने जीवन में ही पोयला बैशाख से जुड़ी बंगवासियों की अस्मिता (The identity of the Bengali people associated with Poila Baishakh) के पहलू के नाना आयामों और उनके क्रमिक क्षरण के साक्षी रहे …

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इतिहास की प्रासंगिकता | हिंदी साहित्येतिहास की समस्याएं – पहला एपिसोड

relevance of history

Problems of Hindi Literary History – Episode 1 – Relevance of History इतिहास में कितने काल होते हैं? सामान्यीकरण क्या है इतिहास लेखन में सामान्यीकरण की भूमिका? इतिहास जानने के स्रोत कौन कौन से हैं? इतिहास की विषय वस्तु क्या है? Hindi Sahitya Ka Itihas और उसका विभाजन हिंदी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास M.A. Hindi Literature हिंदी साहित्य का इतिहास …

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तथ्यात्मक इतिहास लेखन से साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद की चुनौती का मुकाबला

Dr. Ram Puniyani

History Writing to the Rescue against Sectarian Nationalism: A Tribute to Prof D.N. Jha Combating the challenge of communal nationalism with factual history writing: Dr Ram Puniyani’s article in Hindi प्रोफेसर डी. एन. झा को श्रद्धांजलि भारत इन दिनों ‘निर्मित की गई नफरतों’ की चपेट में है. इस नफरत के नतीजे में समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर दलितों और धार्मिक …

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बस्तर का दण्डकारण्य : चर्चित धरोहर भोंगापाल

Things you should know

भारत के उत्तरी एवं दक्षिणी भागों को जोड़ने में महत्वूपर्ण भूमिका निभाता आया है बस्तर का दण्डकारण्य Bastar’s Dandakaranya has played an important role in connecting the northern and southern parts of India. बौद्ध चैत्यगृह तथा मंदिरों के भग्नावशेष बस्तर में बौद्ध भिक्षुओं के आवागमन तथा निवास के प्रमाणों को पुष्टि प्रदान करते हैं। बस्तर का दण्डकारण्य (Bastar Dandakaranya) भारत …

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उर्दू की पहली पत्रिका चूड़ियों के शहर फिरोजाबाद से निकली

Literature news

एक किस्सा नायाब | फिरोजाबाद का साहित्यिक इतिहास | उर्दू साहित्य का इतिहास उर्दू की पहली पत्रिका फिरोजाबाद से निकली First Urdu magazine published from Firozabad फिरोजाबाद को चूड़ियों का शहर कहते हैं लेकिन इस शहर में साहित्य की खनक हमेशा से रही है। बहुत कम लोगों को इस बात का इल्म है कि उर्दू की पहली पत्रिका का प्रकाशन …

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पगड़ी संभाल जट्टा : सन 1907 का किसान आंदोलन, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं, तब भी विरोध तीन किसान विरोधी कानूनों का था

Farmers Protest

तब भी विरोध तीन किसान विरोधी कानूनों का था। यह अलग बात है कि वे आज के तीन कृषि कानूनों की तरह नहीं थे। पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन क्या है? ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ की शुरुआत कैसे हुई ? मौजूदा किसान आंदोलन इससे किस प्रकार जुड़ा हुआ है? किसान आंदोलन का 100 साल पुराने पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से क्या रिश्ता …

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मनुष्य से कई लाख साल पहले धरती पर आए बैक्टीरिया

Facts about bacteria

पृथ्वी पर बैक्टीरिया कब आए | Things You Didn’t Know About Bacteria पृथ्वी पर बैक्टीरिया लगभग 3.8 से 4 अरब वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए थे। पर्यावरण ने जीवित रहने और प्रजनन करने के लिए जो कुछ भी उपलब्ध कराया, वे उसी से काम चलाते रहे हैं। उनकी तुलना में मनुष्य पृथ्वी पर बहुत बाद में अस्तित्व में आए, कुछ …

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एक पत्रिका के पृष्ठों पर बोलते साहित्य जगत पर दृष्टिपात

Arun Maheshwari on review of Aalochana पांच दिन पहले ‘आलोचना’ पत्रिका का 62वां (अक्तूबर-दिसंबर 2019) अंक मिला। कोई विशेषांक नहीं, एक सामान्य अंक। आज के काल में जब पत्रिकाओं के विशेषांकों का अर्थ होता है कोरा पिष्टपेषण, एक अधकचरी संपादित किताब, तब किसी भी साहित्यिक पत्रिका का साधारण कविता, कहानी, आलोचनात्मक निबंधों, समीक्षाओं से तैयार किया गया ‘सामान्य’ कहलाने वाला …

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जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया जाए, जो मनुस्मृतियों, वेद पुराण …

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