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Tag Archives: औरत

नदियों में लहू घुल चुका है/ ज़हर हवा में नहीं/ अबकी ज़हर लहू में घुल चुका है

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

नित्यानंद गायेन पुलिस ने दंगाइयों को नहीं एक बूढ़ी औरत को मार दिया वो केवल बूढ़ी औरत नहीं थी पुलिस वालों ने उसे एक मुसलमान की माँ पहचान कर मारा था गलती उन सिपाहियों की नहीं थी उन्होंने सत्ता के आदेश का पालन किया उन्हें आदेश था कपड़े देखकर पहचान करो दुश्मनों की किंतु बूढ़ी माँ के कपड़े से कैसे …

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“इंडियाज़ डॉटर-सेक्स, वोईलेंस और वुमेन : बाज़ार का सबसे ज्यादा बिकाऊ माल” 

india's daughter documentary review

“India’s Daughter-Sex, Violence and Women: Market’s Most Selling Merchandise” India’s daughter documentary review in Hindi अरगला पत्रिका के संपादक और जनवादी कवि अनिल पुष्कर कवीन्द्र का यह लेख 08 मार्च 2015 को हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुआ था, पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन  दरअसल ये बाज़ार उन मुल्कों में अपनी घुसपैठ कर चुके हैं जहां तमाम तरह की पारम्परिक बंदिशें, रिवाज, समाज …

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