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Tag Archives: कविता की आलोचना

संस्कृत काव्यशास्त्र की समस्याएं

jagdishwar chaturvedi

काव्यशास्त्र की प्रमुख समस्या क्या है? काव्यशास्त्र की प्रमुख समस्या है नए अर्थ की खोज। नए अर्थ की खोज के लिए आलोचकों ने रूपतत्वों को मूलाधार बनाया, जबकि वास्तविकता यह है कि नया अर्थ रूप में नहीं समाज में होता है। रूप के जरिए नए अर्थ की खोज के कारण संस्कृत काव्यशास्त्र भाववादी दर्शन की गिरफ्त में चला गया। इसके …

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निष्प्राण देह बनकर रह गई है हिंदी कविता

Has Hindi poetry become antisocial

Hindi poetry has become a dead body कितनी ही सुंदर हो, कितने ही जेवरात सजे हों, सेज फूलों से लबालब लदी फन्दी हो, अगरबत्ती और चंदन की खुशबू हो, लेकिन उसकी सड़ांध सही नहीं जाती। हिंदी कविता में तत्सम शब्दों का, विशुद्धता का, भाषिक दक्षता का, बाजार की ब्रान्डिंग का, अमेज़न की मार्केटिंग का, इंटरनेट आधारित अंतर्राष्ट्रीयता का, राष्ट्र, धर्म,जाति, …

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