सुबह के इस मौन इश्क़ को पढ़ा है तुमने ?

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शबनमीं क़तरों से सजी अल सुबह रात की चादर उतार कर , जब क्षितिज पर अलसायें क़दमों से बढ़ती हैं , उन्हीं रास्तों पर पड़े इक तारे पर पाँव रख चाँद फ़लक से उतर कर सुबह को चूम लेता है, नूर से दमकती शफ़क़ तब बोलती कुछ नहीं , चिड़ियों की चहचहाटों में सिंदूर की

मैं जानती हूँ कि मैं ‘अमृता प्रीतम‘ नहीं/ ना ही तुम ‘साहिर’

Amrita Pritam

नहीं रखे मैंने तुम्हारी, सिगरेटों के अधबुझे टोटे, छुपा कर किसी अल्मारी-शल्मारी में, कि जब हुड़क लगे तेरी, दबा कर उंगलियों में दो कश खींचूँ, और धुएँ के उड़ते लच्छों में तेरे अक्स तलाशूँ। ना चाय के झूठे प्याले में, बचे घूँट को पिया कभी मैंने, ना चूमीं प्याली पर छपी होंठों की, मिटी-सिटी लकीरों

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार डॉ. धनञ्जय सिंह का काव्यपाठ

Dr. Dhananjay Singh Sahityik Kalrav

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com ‘s YouTube channel) में इस रविवार वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार डॉ. धनञ्जय सिंह का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला व डॉ. कविता अरोरा ने

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार राजेश शर्मा

Rajesh Sharma Sahitya Kalrav

नई दिल्ली, 06 अगस्त 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग साहित्यिक कलरव में इस रविवार चंबल के लाल राजेश शर्मा का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु व डॉ. कविता अरोरा ने बताया कि मध्य प्रदेश के भिण्ड में जन्मे सुप्रसिद्ध साहित्यकार

जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता HASTAKSHEP KAVI

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस बार ममता किरण का, “जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता”

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता नई दिल्ली, 30 जुलाई 2020. हस्तक्षेप ड़ॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग “साहित्यिक कलरव” में इस

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार तपेन्द्र प्रसाद शाक्य के “पैर के छाले सच्चे हैं”, बाकी सब झूठे हैं

Tapendra Prasad Shakya Saahityik Kalrav Poem recitation

सब झूठे हैं, पैर के छाले सच्चे हैं नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Literary section of hastakshep.com’s YouTube channel) में इस रविवार पूर्व आईएएस अधिकारी व पूर्व कैबिनेट मंत्री तपेन्द्र प्रसाद शाक्य का काव्य पाठ (Poetry recitation of Tapendra Prasad Shakya) होगा। साहित्यिक कलरव के

रोज महाभारत कथा रोज मृत्यु संगीत/ काल भैरवी नाचती समय सुनाता गीत : डॉ. भारतेंदु मिश्र

Bhartendu Mishra साहित्यिक कलरव

“रोटियों सी गोल है दुनिया/और हम मजदूर होते हैं।” नई दिल्ली 16 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग साहित्यिक कलरव में इस रविवार सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् व कवि भारतेन्दु मिश्र अपना काव्य पाठ करेंगे। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला व डॉ. कविता अरोरा

इस रविवार “हमने तो बस्ती बोई थी, जंगल कैसे उग आया” बताएंगे लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

Laxmi Shankar Bajpai Saahityik Kalrav

चराग़ों से कहो महफूज़ रखें अपनी-अपनी लौ उलझना है उन्हें कुछ सरफिरी पागल हवाओं से नई दिल्ली, 01 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल (Youtube channel of hastakshep.com) के साहित्य अनुभाग “साहित्यिक कलरव” पर जारी श्रंखला में इस रविवार ख्यातिप्राप्त साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी (Laxmi Shankar Bajpai) अपना कविता पाठ करेंगे। यह जानकारी

लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को

Migrants

व्यवस्था पर चोट करती सारा मलिक की तीन लघु कविताएं Sara Malik’s three short poems hurting the system भूख और गरीबी से मजबूर हो गए जख्म पांव के नासूर हो गए कदमों से नाप दी जो दूरी अपने घर की, हजारों ख्वाब चकनाचूर हो गए छालों ने काटे हैं जो रास्ते बेबसी का दस्तूर हो