तुम मुझे मामूल बेहद आम लिखना

तुम मुझे मामूल बेहद आम लिखना जब भी लिखना फ़क़त गुमनाम लिखना यह शरारों की चमक यह लहजों की शहद रौशनी की शोहरतें दियों की

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चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम

चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम “कवि, कविता और हम” शीर्षक से अंतर्राष्ट्रीय कवियों के साथ एक शाम साहित्य समाचार Literature news नई

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार डॉ. धनञ्जय सिंह का काव्यपाठ

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com ‘s YouTube channel) में इस

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस बार ममता किरण का, “जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता”

जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार तपेन्द्र प्रसाद शाक्य के “पैर के छाले सच्चे हैं”, बाकी सब झूठे हैं

सब झूठे हैं, पैर के छाले सच्चे हैं नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Literary section

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रोज महाभारत कथा रोज मृत्यु संगीत/ काल भैरवी नाचती समय सुनाता गीत : डॉ. भारतेंदु मिश्र

“रोटियों सी गोल है दुनिया/और हम मजदूर होते हैं।” नई दिल्ली 16 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग साहित्यिक कलरव

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इस रविवार “हमने तो बस्ती बोई थी, जंगल कैसे उग आया” बताएंगे लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

चराग़ों से कहो महफूज़ रखें अपनी-अपनी लौ उलझना है उन्हें कुछ सरफिरी पागल हवाओं से नई दिल्ली, 01 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब

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तुमने तभी माँग ली थी…आख़िरी विदा…

….दूसरी बार जब एडमिट हुए तो ज़्यादा बोले नहीं.. सोये पड़े रहते थे…तुम… कुछ कहना चाहते थे भी तो.. शायद.. आवाज़ घर्रा कर.. बाईपैप के..

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