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Tag Archives: कविता

सड़क किनारे नाचता बचपन… तू नादान सी एक रौशनी है, खुद को दरिया के हवाले मत कर

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

प्रियंका गुप्ता की दो कविताएँ 1) तू खुद को आबाद कर तू खुद को आबाद कर, मेरी कुरबत से खुद को आजाद कर। तेरा मसीहा तू खुद है, तू खुद पर विश्वास कर। जुड़ा तुझसे जरूर हूं मैं, पर मैं तेरी किसमत नहीं। तेरे वजूद तक को छू सकूं, मेरी अब वो शख्सियत नहीं। तू लौ है एक नए कल …

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अब जंगल से नहीं संसद से डर लगता है।।

गणेश कछवाहा, Ganesh Kachhwaha रायगढ़ छत्तीसगढ़

गणेश कछवाहा की कलम से —- दो जनवादी कविताएं – चेहरा बुझा बुझा सा दर्पण टूटा टूटा सा लगता है अब जंगल से नहीं संसद से डर लगता है।। इंसानियत मोहब्बत की चर्चा करने दो मंदिर मस्जिद के मसलों से डर लगता है।। टेसू क्यों न दहके अंगारों सा मजहब सियासत सब बजारू सा लगता है। चिंता किसे है भूखों …

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चंद इजारेदारों के कदमों में, नहीं देख सकते हम बंधक, अपने देश की संसद और सरकार

Modi government is Adani, Ambani's servant. Farmers and workers will uproot it - Randhir Singh Suman

तीन काले कानूनों के विरुद्ध दिल्ली में आंदोलनरत किसानों को समर्पित एक रचना :- ठण्ड मुझे भी लगती है, खुला आसमान, ठंडी हवाएँ, मुझे भी सताती हैं यह अलग बात है, जब मैं सृज़न करता हूँ मिट्टी से जाने क्या क्या रचता हूँ, तो मेरे लिए ठण्ड बेमानी हो जाती है, धरती मेरा कर्मक्षेत्र और आकाश मेरे कर्म का साक्षी …

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तेरी संस्कृति के क़िस्से/ मुझसे और नहीं बाले जाते/ तुझसे दो कौड़ी के छोरे/ तलक नहीं संभाले जाते…

Say no to Sexual Assault and Abuse Against Women

बड़े ही स्याह मंज़र हैं उनके फेंके… किसी रंग की रौशनी यहाँ तक पहुँचती ही नहीं मैं क्या करूँ..? कैसे दिखाऊँ…? यह मंज़र क्या ले जाऊँ.. इन मासूमों को घसीट कर.. लाल क़िले की प्राचीर तक.. या फिर एय लाल क़िले तुझे उठा कर ले आऊँ इस अंधे कुएँ की मुँडेर तलक कैसे चीख़ूँ कि तमाम ज़ख़्मी जिस्मों की चीख़ …

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तुम मुझे मामूल बेहद आम लिखना

Literature news

तुम मुझे मामूल बेहद आम लिखना जब भी लिखना फ़क़त गुमनाम लिखना यह शरारों की चमक यह लहजों की शहद रौशनी की शोहरतें दियों की जद्दोजहद मशहूरियत की ख़्वाहिश बेवजह की नुमाइश ये चमकते हुए दर सजदों में पड़े सर एय ऐब-ए-बेताबी तू सुन …. कामयाबी … धूप का तल्ख सफ़र है पैरों तले की ज़मीन जलेगी छांव नहीं देगी …

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पूछता है भारत – ऐसी फजां में दम नहीं घुटता ?? मगर वो है कि कुर्सी से नहीं उठता

Poochhata hai Bharat

…………बुझा दो ……… इन रेप की मोमबत्तियों से कुर्सियाँ नहीं जलतीं, मोम के आंसुओं से सरकारें नहीं पिघलतीं, ख़बर फिर से वहीं उठाईगीरों ने सर उठाकर चलने वाली को दुनिया से उठा दिया लोग कोसने लगे सत्ता को किसे कुर्सी पर बिठा दिया दुख किसको कितना हुआ है, सब दिखाने में लग गये। तमाम सोये हुए लोग, इक दूजे को …

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चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम

Literature news

चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम “कवि, कविता और हम” शीर्षक से अंतर्राष्ट्रीय कवियों के साथ एक शाम साहित्य समाचार Literature news नई दिल्ली, 23 सितंबर 2020. चलता चल और संभालना सीख पेज के माध्यम से एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन गूगल मीट पर आगामी 27 सितंबर 2020 को किया जा रहा है। इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन …

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सुबह के इस मौन इश्क़ को पढ़ा है तुमने ?

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शबनमीं क़तरों से सजी अल सुबह रात की चादर उतार कर , जब क्षितिज पर अलसायें क़दमों से बढ़ती हैं , उन्हीं रास्तों पर पड़े इक तारे पर पाँव रख चाँद फ़लक से उतर कर सुबह को चूम लेता है, नूर से दमकती शफ़क़ तब बोलती कुछ नहीं , चिड़ियों की चहचहाटों में सिंदूर की डिबिया वाले हाथ को चुप …

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मैं जानती हूँ कि मैं ‘अमृता प्रीतम‘ नहीं/ ना ही तुम ‘साहिर’

Amrita Pritam

नहीं रखे मैंने तुम्हारी, सिगरेटों के अधबुझे टोटे, छुपा कर किसी अल्मारी-शल्मारी में, कि जब हुड़क लगे तेरी, दबा कर उंगलियों में दो कश खींचूँ, और धुएँ के उड़ते लच्छों में तेरे अक्स तलाशूँ। ना चाय के झूठे प्याले में, बचे घूँट को पिया कभी मैंने, ना चूमीं प्याली पर छपी होंठों की, मिटी-सिटी लकीरों को, मैं जानती हूँ कि …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार डॉ. धनञ्जय सिंह का काव्यपाठ

Dr. Dhananjay Singh Sahityik Kalrav

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com ‘s YouTube channel) में इस रविवार वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार डॉ. धनञ्जय सिंह का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला व डॉ. कविता अरोरा ने बताया कि सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार राजेश शर्मा

Rajesh Sharma Sahitya Kalrav

नई दिल्ली, 06 अगस्त 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग साहित्यिक कलरव में इस रविवार चंबल के लाल राजेश शर्मा का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु व डॉ. कविता अरोरा ने बताया कि मध्य प्रदेश के भिण्ड में जन्मे सुप्रसिद्ध साहित्यकार राजेश शर्मा ने 1980 से …

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जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता HASTAKSHEP KAVI SAMMELAN, HINDI POETRY RECITATION,KAVI SAMMELAN, …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस बार ममता किरण का, “जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता”

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता नई दिल्ली, 30 जुलाई 2020. हस्तक्षेप ड़ॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग “साहित्यिक कलरव” में इस रविवार में सुप्रसिद्ध गज़ल़गो एवं …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार तपेन्द्र प्रसाद शाक्य के “पैर के छाले सच्चे हैं”, बाकी सब झूठे हैं

Tapendra Prasad Shakya Saahityik Kalrav Poem recitation

सब झूठे हैं, पैर के छाले सच्चे हैं नई दिल्ली, 24 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Literary section of hastakshep.com’s YouTube channel) में इस रविवार पूर्व आईएएस अधिकारी व पूर्व कैबिनेट मंत्री तपेन्द्र प्रसाद शाक्य का काव्य पाठ (Poetry recitation of Tapendra Prasad Shakya) होगा। साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला …

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रोज महाभारत कथा रोज मृत्यु संगीत/ काल भैरवी नाचती समय सुनाता गीत : डॉ. भारतेंदु मिश्र

Bhartendu Mishra साहित्यिक कलरव

“रोटियों सी गोल है दुनिया/और हम मजदूर होते हैं।” नई दिल्ली 16 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग साहित्यिक कलरव में इस रविवार सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् व कवि भारतेन्दु मिश्र अपना काव्य पाठ करेंगे। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला व डॉ. कविता अरोरा ने बताया कि इस रविवार …

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इस रविवार “हमने तो बस्ती बोई थी, जंगल कैसे उग आया” बताएंगे लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

Laxmi Shankar Bajpai Saahityik Kalrav

चराग़ों से कहो महफूज़ रखें अपनी-अपनी लौ उलझना है उन्हें कुछ सरफिरी पागल हवाओं से नई दिल्ली, 01 जुलाई 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल (Youtube channel of hastakshep.com) के साहित्य अनुभाग “साहित्यिक कलरव” पर जारी श्रंखला में इस रविवार ख्यातिप्राप्त साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी (Laxmi Shankar Bajpai) अपना कविता पाठ करेंगे। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप “साहित्यिक कलरव” …

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तुमने तभी माँग ली थी…आख़िरी विदा…

Tribute to father

….दूसरी बार जब एडमिट हुए तो ज़्यादा बोले नहीं.. सोये पड़े रहते थे…तुम… कुछ कहना चाहते थे भी तो.. शायद.. आवाज़ घर्रा कर.. बाईपैप के.. पाइप में…घुट जाती थी… शरीर अशक्त… हाथ दुबले…बहुत दुबले… उठने के क़ाबिल नहीं बचे थे… बस उँगलियाँ हिलती थीं कभी-कभी कराहते थे तुम.. इस पर पिछली बार वाला झूठ दोहराती मैं…. ”फ़ाइलें तैय्यार हो रही …

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लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को

Migrants

व्यवस्था पर चोट करती सारा मलिक की तीन लघु कविताएं Sara Malik’s three short poems hurting the system भूख और गरीबी से मजबूर हो गए जख्म पांव के नासूर हो गए कदमों से नाप दी जो दूरी अपने घर की, हजारों ख्वाब चकनाचूर हो गए छालों ने काटे हैं जो रास्ते बेबसी का दस्तूर हो गए. कभी पैदल कभी प्यासे, …

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नरभक्षियों के महाभोज का चरमोत्कर्ष है यह

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

पलाश विश्वास वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं। आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता से अवकाशप्राप्त, अब उत्तराखंड के दिनेशपुर में स्थाई प्रवास। पलाश …

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