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Tag Archives: किसान आंदोलन

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जानिए किसान आंदोलन के कारण क्या हैं, किसान आंदोलन क्यों कर रहे हैं, किसान आंदोलन के जनक कौन हैं, किसान आंदोलन का उद्देश्य का उद्देश्य क्या है.

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Kisan Andolan Live

किसान आंदोलन वीडियो.

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News of the week : गुमराह करती गुमराह सरकार | सप्ताह की बड़ी खबर

news of the week

News of the week : गुमराह करती सरकार ! कृषि कानून | किसान आंदोलन | सप्ताह की बड़ी खबर कृषि कानूनों पर सरकार का जबर्दस्त यू टर्न (Government’s tremendous U turn on agricultural laws) ये मान लिया था कि किसान आंदोलन समाप्त हो जाएगा. सरकार ने एमएसपी पर कोई गारंटी नहीं दी. अजय मिश्र टेनी अभी भी मोदी सरकार का …

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वे तो शहीद हुए हैं, मरा तो कुछ और है !! निर्लज्ज धूर्तता को मौजूदा हुक्मरान अपनी चतुराई मानते हैं…

badal saroj

किसान आंदोलन में शहादत देने वाले (Martyrs in the Peasant Movement) तो इतने सबल थे कि निरंकुश हठ का अहंकार तोड़ गए। बाकी सब भी ध्वस्त करेंगे। कृषि मंत्री के चुनिंदा स्मृति-लोप की क्रोनोलॉजी Chronology of selected amnesia of Agriculture Minister तीन कृषि कानूनों की वापसी (withdrawal of three agricultural laws) के लिए लड़ते-लड़ते किसान आंदोलन में शहीद (Martyr in …

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डाटालेस नादान सरकार

pm narendra modi

कानून वापसी हो गई पर नहीं हुई किसानों की घर वापसी देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today तीन कृषि कानूनों की वापसी का विधेयक (Bill to withdraw three agricultural laws) संसद में पारित करवा कर केंद्र सरकार ने यह मान लिया था कि अब एक साल से आंदोलनरत किसान अपने घरों को लौट जाएंगे। लेकिन कानून वापसी …

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जानिए पीएम की बदनाम तीन किसान बिल वापसी की घोषणा का आंतरिक सत्य क्या है

the inner truth of pm's infamous three kisan bill withdrawal announcement

Farm laws explained: Know what is the inner truth of PM’s infamous Three Kisan Bill return announcement? कृषि कानून के वो कौन से विवाद थे कि मोदी सरकार की तपस्या फेल हो गई? नरेंद्र मोदी की मानसिकता जनविरोधी और किसान विरोधी है। आज 80 करोड़ लोग बिना खाए रहते हैं भारत में। आखिर क्यों वापस लिए गए कानून? नरेंद्र मोदी …

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कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का ऐलान : एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो!

pm narendra modi

किसानों के संघर्ष के आगे झुक गई मोदी सरकार Modi government bowed before the farmers’ struggle आखिरकार, किसानों के संघर्ष ने मोदी सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया है। गुरु पर्व के मौके पर, राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन के जरिए, प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का ऐलान किया …

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कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : उप्र-पंजाब में चुनाव को देखते हुए राजनीतिक फैसला

Ghazipur border: farmers will plant flowers near police forts.

कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी चुनाव को देखते हुए राजनीतिक फैसला Repeal of agricultural laws: Political decision in view of upcoming elections in Uttar Pradesh and Punjab प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में पारित तीन कुख्यात कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा (Announcement to repeal agricultural laws) निश्चित रूप से किसान आंदोलन और …

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जनदबाब में काले कृषि कानूनों की हुई वापसी की घोषणा – आइपीएफ

ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अवकाशप्राप्त आईपीएस एस आर दारापुरी (National spokesperson of All India People’s Front and retired IPS SR Darapuri)

Announcement of withdrawal of black agricultural laws in public pressure – IPF लखनऊ 19 नवम्बर 2021, भारी जनदबाब में प्रधानमंत्री मोदी को तीनों काले कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी है। यह किसान और आम जनता के आंदोलन की जीत है इसने एक बार फिर जनता की प्रभुता को देश में स्थापित किया है। लेकिन मोदी सरकार …

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किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत

Chhattisgarh Kisan protest 26 November 2020. Farmers protest against agricultural laws on November 26. देशव्यापी किसान आंदोलन में जगह-जगह किसानों के प्रदर्शन

Historic victory of the peasant movement आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) ने जब तीन कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा (Announcement to withdraw three agricultural laws) की तो आंदोलकारी किसानों के चेहरे विश्वास और ख़ुशी से चमक उठे। पिछले एक वर्ष से अनगिनत विपदाओं, भीषण सर्दी, गर्मी और अब फिर सर्दी के चक्र से मुकाबले और मीडिया …

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रानी कमलापति या आदिवासियों का धृतराष्ट्र आलिंगन !! पुरानी है आदिवासियों से भाजपा की नफरत

badal saroj

BJP’s hatred of tribals is old संघी कुनबे को भारत के मुक्ति आंदोलन के असाधारण नायक बिरसा मुण्डा की याद (Remembering Birsa Munda, an extraordinary hero of India’s liberation movement) उनकी शहादत के 122वे वर्ष में आयी। अंग्रेजो से लड़ते हुए और इसी दौरान आदिवासी समाज को कुरीतियों से मुक्त कराते हुए महज 24 साल की उम्र में रांची की …

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क्यों कांग्रेस के शीर्ष पर ‘गांधी’ परिवार का कोई विकल्प दूर-दूर तक नजर नहीं आता?

Rahul Gandhi

गंभीर अनिश्चितताओं को खुद न्यौत लिया है कांग्रेस ने | Congress itself has invited serious uncertainties अचरज की बात नहीं है कि पंजाब सरकार में पिछले ही महीने हुए उलट-फेर पर कई टिप्पणीकारों ने अपनी इस धारणा को दोहराया था कि कांग्रेस, आत्मघात की प्रवृत्ति से ग्रस्त नजर आती है। विधान सभाई चुनाव से चंद महीने पहले, मुख्यमंत्री बदलने और …

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पूर्वांचल में बड़ा किसान आंदोलन क्यों नहीं हो पा रहा ?

purvanchal kisan

Why is there not a big farmer movement in Purvanchal? बनारस में कल संयुक्त किसान मोर्चा की पूर्वांचल इकाई की बैठक थी। लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी (Arrest of the accused in the case of killing of farmers in Lakhimpur Kheri) और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की रणनीति (Strategy of movement …

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लखीमपुर कांड मोदी के न्यू इंडिया का अगला एपिसोड है

Badal saroj Narendra Modi

न्यूटन से विदुर तक : लखीमपुर खीरी पैटर्न और क्रोनोलॉजी From Newton to Vidur: Lakhimpur Kheri Pattern and Chronology महात्मा गांधी के जन्मदिवस (Birthday of Mahatma Gandhi) के ठीक अगले दिन लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन (Protest in Lakhimpur Kheri) करके वापस लौट रहे किसानों को गाड़ियों से रौंदने का, निर्ममता के फ़िल्मी दृश्यों को भी पीछे छोड़ देने का …

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किसान आंदोलन : जो पानी बह गया उसे फिर से छुआ नहीं जा सकता

Chhattisgarh Kisan protest 26 November 2020. Farmers protest against agricultural laws on November 26. देशव्यापी किसान आंदोलन में जगह-जगह किसानों के प्रदर्शन

Arun Maheshwari on Prabhat Patnaik’s article on Farmer’s unity कल के टेलिग्राफ में प्रभात पटनायक का एक लेख है — A Promethian moment ( The farmer’s agitation challenges theoretical wisdom)। बंधन से मुक्ति का क्षण ; किसानों के आंदोलन ने सैद्धांतिक बुद्धिमत्ता को ललकारा है। जाहिर है, यह किसान आंदोलन और उसके एक महत्वपूर्ण सबक पर लिखा गया लेख है। …

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लखीमपुर खीरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय – पीयूसीएल

 High level inquiry should be conducted into Lakhimpur Kheri incident – PUCL लखनऊ, 04 अक्तूबर 2021. लोक स्वातंत्र्य संगठन ( पीयूसीएल) उत्तर प्रदेश ने लखीमपुर खीरी में किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर मंत्री और पुलिस की मौजूदगी में गाड़ी चढ़ा कर हत्या किए जाने फिर गोली चलाते हुए भाग जाने की कड़ी निन्दा करते हुए इस पूरी घटना की न्यायिक …

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सरकार लोकतंत्र का अपहरण करने की हद तक दमन पर उतारू : दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा (माले) का राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्या के खिलाफ सामूहिक उपवास में बदला माले का तीन दिवसीय उ. प्र. राज्य सम्मेलन शुरू किसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाने का कार्यभार इस दौर का हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए : दीपंकर भट्टाचार्य राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की …

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काले कृषि कानूनों की वापसी तक जारी रहेगा आंदोलन : संयुक्त किसान मोर्चा

किसान व राष्ट्र विरोधी काले कृषि कानून रद्द करने को लेकर किसान संगठनों ने किया मार्च चकिया /27 सितम्बर 2021, किसान विरोधी तीनों काले कानून और मजदूर विरोधी लेबर कोड को वापस लेने, बिजली संशोधन विधेयक 2021 को रद्द करने, निजीकरण पर रोक लगाने, एमएसपी के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चकिया …

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हिंदी के बेडौल अपराध साहित्य की एक नजीर — ‘पिशाच’

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

Review of crime novel Pishach by Arun Maheswari पिछली 29 अगस्त को वीडियो पत्रकार अजित अंजुम ने अपने यूपी चुनाव और किसान आंदोलन संबंधी कवरेज के बीच अचानक ही हिंदी के हाल में प्रकाशित एक ‘क्राइम थ्रिलर’ ‘पिशाच’ पर चर्चा की। इसके लेखक संदीप पालीवाल के साथ ही उनके एक मित्र विनोद कापड़ी भी चर्चा में शामिल थे। ये तीनों …

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जनांदोलन बन चुका है किसान आंदोलन

Ghazipur border: farmers will plant flowers near police forts.

Farmers’ movement has become a mass movement बेनतीजा रही सरकार और किसानों के बीच बातचीत भारत सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 9-10 महीनों से दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में किसान शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ किसान नेताओं की कई दौर की बातचीत (Several rounds of talks of farmer …

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राजधानियों में ही नहीं, हर जिले में हर गांव में किसान आंदोलन की जरूरत

Not only on the road, not only in the capitals but there is also a need for farmers’ movement in every village in every district. पलाश विश्वास रुद्रपुर गोल मार्केट गुरुद्वारा (Rudrapur Gol Market Gurdwara) में हुई बैठक आम बैठक नहीं थी। यह बैठक समस्त किसान संगठनों को लेकर उत्तराखण्ड में संयुक्त किसान मोर्चा के निर्माण,  मोर्चे के कार्यक्रमों की …

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किसान आंदोलन का नौ महीने का शानदार इतिहास

किसान आन्दोलन की ऐतिहासिक जन कार्यवाहियां किसान आंदोलन के नौ माह पर अशोक ढवले की टिप्पणी दिल्ली के चारों तरफ सीमाओं पर किसान पिछले नौ महीनों से बैठे है और किसान विरोधी तीन काले कानूनों का विरोध कर रहे है। हाल फ़िलहाल में किसानों द्वार कई बड़ी राष्ट्रव्यापी कार्यवाहियां हुई, जिन में हज़ारों किसानों ने भागेदारी की। किसानों द्वारा इस दौरान …

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आदिवासियों का इतिहास हमारा इतिहास है

 Role of Adivasis in Peasant Movements पलाश विश्वास 1757 में पलाशी के युद्ध में लार्ड क्लाइव की जीत के अगले ही दिन से मेदिनीपुर के जंगल महल से आदिवासियों ने ईस्ट इंडिया के खिलाफ़ जल जंगल जमीन के हक हकूक और आज़ादी की लड़ाई शुरू कर दी। भूमिज विद्रोह (Bhumij or Land Revolt) मेदिनीपुर में एक के बाद एक तीन …

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