अब इस किसान असंतोष को सरकार नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है

Bharat Bandh Farmers on the streets throughout Chhattisgarh

सरकार उद्योग की कीमत पर कृषि को जिस दिन से नज़रअंदाज़ करने लगेगी, उसी दिन से देश की आर्थिकी खोखली होने लगेगी। सरकार को चाहिए कि वह देश और अर्थव्यवस्था के हित में किसान संगठनों से बात करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले।

कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ में हुए कई स्थानों पर हुए प्रदर्शन, मोदी सरकार का हुआ पुतला दहन

Demonstrations held in many places in Chhattisgarh against anti-agricultural laws

जिस अलोकतांत्रिक तरीके से संसदीय जनतंत्र को कुचलते हुए इन कानूनों को पारित किया गया है, उससे स्पष्ट है कि यह सरकार आम जनता की नहीं, अपने कॉर्पोरेट मालिकों की चाकरी कर रही है।

खेती को तबाह कर देगा कृषि विधेयक – मजदूर किसान मंच

Agriculture Bill will destroy agriculture - Mazdoor Kisan Manch

मजदूर किसान मंच ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज कराया प्रतिवाद. गांव-गांव आरएसएस- भाजपा का किसान करेंगे विरोध – दारापुरी

मोदी के खून में व्यापार इसलिए फिर से साहूकारी दौर लाने पर आमादा, अपने खेत में ही बंधक बना लिये जाएंगे किसान

Narendra Modi flute

यही प्रधानमंत्री लॉकडाउन लगाने के समय कह रहे थे कि किसी एक व्यक्ति की भी नौकरी नहीं जाएंगी। देश में लगभग 20 करोड़ लोगों की नौकरी गई हैं पर मोदी की जुबान से एक शब्द भी नहीं निकला।

कृषि विरोधी तीन विधेयक : किसानों और उपभोक्ताओं की तबाही का घोषणा पत्र 

narendra modi flute

Three anti-agriculture bills: Declaration letter for destruction of farmers and consumers                                                             हमारे देश की आज़ादी से पहले का इतिहास है अंग्रेजी उपनिवेशवाद के अधीन नील की खेती का और गांधीजी का इसके खिलाफ संघर्ष (Indigo cultivation under British colonialism and Gandhi’s struggle against it) का. यह इतिहास स्वाधीनता-पूर्व उन दुर्भिक्षों से भी जुड़ता है, जो

किसान विरोधी हैं तीनों नए कानून, जानिए किसान कृषि विधेयकों से नाखुश क्यों हैं

Bharat Bandh Farmers on the streets throughout Chhattisgarh

All three new laws are anti-farmer हाल ही में, हरियाणा में किसानों के एक आंदोलन पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठी चार्ज (Barbaric lathi charge by police on a farmers agitation in Haryana) किया गया है। किसान, सरकार द्वारा पारित तीन नए अध्यादेशों या कानून का विरोध कर रहे थे। किसानों से जुड़े तीनो नए कानून

देश विकास कर रहा है, तो लोग आत्महत्या करने पर मजबूर क्यों हो रहे हैं? गिरती जीडीपी का बढ़ती आत्महत्याओं से क्या संबंध

More than 50 bighas of wheat crop burnt to ashes of 36 farmers of village Parsa Hussain of Dumariyaganj area

गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती किसान आत्महत्याएं : मध्यप्रदेश आगे, तो छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं If the country is developing, then why are people forced to commit suicide? किसी भी देश में आत्महत्या की दर (Suicide rate) उसके सामाजिक स्वास्थ्य का संकेतक (Indicator of social health) होती है। हमारे देश में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime

संसद सत्र के पहले दिन ही 14 सितम्बर को पूरे देश में किसान करेंगे प्रदर्शन

Parliament of India

On the first day of the Parliament session on September 14, farmers will demonstrate across the country रायपुर, 11 सितंबर 2020. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर अपनी लंबित मांगों को लेकर पूरे देश में किसान संसद सत्र के पहले दिन ही 14 सितम्बर को देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे। छत्तीसगढ़ में ये प्रदर्शन