एआईपीएफ ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों को देश विरोधी बताया

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस. आर. दारापुरी

दिल्ली प्रवेश की अनुमति मिलना किसान आंदोलन की जीत AIPF calls Modi government’s agricultural laws anti-country Winning of Kisan agitation getting permission to enter Delhi लखनऊ, 27 नवम्बर 2020, मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि सम्बंधी तीनों कानून किसान विरोधी देश विरोधी है। यह कानून महज देशी विदेशी वित्तीय पूंजी और कारपोरेट घरानों के मुनाफे

क्या बदलाव की एक नयी इबारत लिख पायेगा किसानों का यह आंदोलन ?

Agriculture Bill will destroy agriculture - Mazdoor Kisan Manch

नोटबंदी से व्यापार चौपट हुआ, अनौपचारिक क्षेत्र धराशायी हो गया, तीन कृषि कानून से देश भर के किसान बेहाल और आंदोलित हैं (तीन कृषि कानून से देश भर के किसान बेहाल और आंदोलित हैं) ही कि अब नए श्रम कानून लाने की बात होने लगी।

किसान आंदोलनों की परंपरा और किसान आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

Agriculture Bill will destroy agriculture - Mazdoor Kisan Manch

भारत का पहला कृषक आंदोलन किसे माना जाता है. आंदोलनकारी किसान चाहे तेलंगाना के हों या नक्सलवाड़ी के हिंसक लड़ाके, सभी ने छापामार आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम योगदा‍न दिया था।

नये कृषि कानून किसान के हित में नहीं बल्कि सरकार के चहेते गिरोही पूंजीपतियों के हित में हैं

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इन नए कृषि कानूनों से, किसानों की आय और खुशहाली उसी प्रकार बढ़ जाएगी, जैसे, नोटबंदी से काला धन, और आतंकवाद खत्म हो गया है, जीएसटी से कर व्यवस्था सुधर गयी है और ताली थाली दीया बाती मार्का लॉकडाउन से कोरोना महामारी नियंत्रित हो गयी है।

सरकार कृषि उत्पादों का ’न्यूनतम समर्थन-बाजार मूल्य’ तय क्यों नहीं करती ?

Bharat Bandh Farmers on the streets throughout Chhattisgarh

The government wants to increase corporate investment in agriculture through new laws नये कृषि कानूनों के अंतर्गत अनाज, दलहन, तिलहन, आलू, प्याज जैसी रोजमर्रा की आवश्यक चीजों को अत्यावश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया है। अब इन वस्तुओं को सरकार की सूची में गैरजरूरी वस्तुएं माना जाने लगा है, और इनकी स्टॉक लिमिट भी

टाटा इनोवेशन फेलोशिप की घोषणा, 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

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Announcement of Tata Innovation Fellowship. Applications can be done till November 15 नई दिल्ली, 09 अक्तूबर (इंडिया साइंस वायर):  देश की प्रगति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हमेशा से ही एक अहम भूमिका में रही है। विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में नये शोध और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना भारत सरकार की प्रमुख वरीयताओं में से एक

अब इस किसान असंतोष को सरकार नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है

Bharat Bandh Farmers on the streets throughout Chhattisgarh

सरकार उद्योग की कीमत पर कृषि को जिस दिन से नज़रअंदाज़ करने लगेगी, उसी दिन से देश की आर्थिकी खोखली होने लगेगी। सरकार को चाहिए कि वह देश और अर्थव्यवस्था के हित में किसान संगठनों से बात करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले।

खेती को तबाह कर देगा कृषि विधेयक – मजदूर किसान मंच

Agriculture Bill will destroy agriculture - Mazdoor Kisan Manch

मजदूर किसान मंच ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज कराया प्रतिवाद. गांव-गांव आरएसएस- भाजपा का किसान करेंगे विरोध – दारापुरी

किसान विरोधी कृषि कानूनों के विरुद्ध किसानों के भारत बंद का लोकमोर्चा ने किया समर्थन

Ajit Yadav, अजीत सिंह यादव

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों की गुलामी के दस्तावेज हैं। इन कानूनों के जरिये मोदी सरकार ने एक बार फिर देश के फेडरल ढांचे पर बड़ा हमला बोला है।

कोरोना बढ़ रहा है, सीमा पर मामला संवेदनशील होता जा रहा है, मन्दिर, तीन तलाक, धारा 370 से अब लोगों को बरगलाया नहीं जा सकता।

Narendra Modi flute

पूंजीवादी व्यवस्था में किसी व्यापारी, किसी उद्योगपति की कोई सामाजिक भूमिका नहीं होती। उसका काम केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना होता है। जब मुनाफा कम होने लगता है तो वह उस व्यापार से हाथ खींच लेता है और उद्योगों में तालाबन्दी (Lockout in industries) कर देता है।