जानिए महिलाओं में कैल्शियम की कमी आम समस्या क्यों बनती जा रही है

Health News

भारत की महिलाओं में कैल्शियम की कमी

नई दिल्ली, 25 जून 2022. विगत दिनों एक अध्ययन में बताया गया था कि भारत की महिलाओं में कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency in Indian women) एक आम समस्या बनती जा रही है। यह खानपान की बदलती आदतों के कारण हो रहा है। पिछले कुछ दशकों में विशेष रूप से शहरी महिलाओं में भोजन संबंधी आदतों में बड़ा बदलाव आया है।

कैल्शियम की कमी कैसे पूरी करें?

देशबन्धु की एक पुरानी खबर के मुताबिक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association आईएमए) के अनुसार लोग प्रसंस्कृत और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थो पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं, जिस कारण शरीर को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कैल्शियम की मात्रा आहार से लेनी चाहिए न कि सप्लीमेंट से।

आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 17 साल आयु वर्ग की लगभग 20 प्रतिशत किशोरियों में कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency in adolescent girls) पाई गई है।

हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए कैल्शियम सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व क्यों होता है?

समाचार के मुताबिक हमारी हड्डियों का 70 प्रतिशत हिस्सा कैल्शियम फॉस्फेट (calcium phosphate) से बना होता है। यही कारण है कि कैल्शियम हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है।

महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैं।

विटामिन डी की कमी वाले लोगों में अधिक होती है कैल्शियम की कमी की आशंका

आईएमए के तत्कालीन अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल के मुताबिक, “कैल्शियम के अच्छे से अवशोषण के लिए हमारे शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है। विटामिन डी की कमी वाले लोगों में, कैल्शियम की कमी की आशंका अधिक होती है, भले ही वे कैल्शियम का भरपूर सेवन कर रहे हों। इसका कारण यह है कि शरीर आपके भोजन से कैल्शियम को अवशोषित करने में असमर्थ है।”

कैल्शियम की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

उन्होंने कहा कि विटामिन-डी रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। विटामिन-डी का पर्याप्त सेवन कैल्शियम अवशोषण को बेहतर बनाने के साथ-साथ, हड्डियों की क्षति कम करता है। फ्रैक्चर का खतरा कम करता है और ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) रोग होने से रोकता है। कैल्शियम की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे रक्त के थक्के बनना, रक्तचाप और हृदय की धड़कन बढ़ना, बच्चों में धीमा विकास, और कमजोरी व थकान।

वृद्ध महिलाओं की तुलना में युवतियों को कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है।

कैल्शियम की बात करें तो, 9 से 18 साल आयु वर्ग की लड़कियों को 1300 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जबकि 19 से 50 साल की महिलाओं को 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। पचास वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 1200 मिलीग्राम की जरूरत होती है।

समाचार के मुताबिक डॉ. अग्रवाल ने बताया, “कई लोग डॉक्टर से सलाह के बिना कभी भी कैल्शियम की खुराक लेने लगते हैं। अगर बताई गई मात्रा में ली जाए तो यह अतिरिक्त कैल्शियम हृदय की सेहत के लिए ठीक है। हालांकि, आहार से मिलने वाले कैल्शियम पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।”

कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के टिप्स (Tips to increase calcium intake)

  • हर दिन कैल्शियम से समृद्ध आहार लेना चाहिए;
  • अपने शरीर का भार बढ़ाये बिना कैल्शियम की मात्रा सही रखने के लिए वसा-रहित दूध पीना चाहिए;
  • अन्य डेयरी उत्पादों में भी कैल्शियम होता है, जैसे कि दही और पनीर, लेकिन कम वसा वाली चीजों का ही चयन करें;
  • पत्तेदार साग-सब्जियों का अधिक सेवन करें।

Know why calcium deficiency is becoming a common problem in women

कैल्शियम की कमी को नजरअंदाज न करें

healthy lifestyle

Don’t Ignore Calcium Deficiency

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2022। यदि आप मसल क्रैम्प (muscle cramps in hindi), लो बोन डेंसिटी (low bone density), दांत में दर्द (toothache) या मासिक धर्म में दर्द (menstrual pain) का सामना कर रहे हैं तो इसे हल्के में न लें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, हो सकता है आप कैल्शियम की कमी (Calcium Deficiency in Hindi) से जूझ रहे हों।

कैल्शियम शरीर के लिए क्यों जरूरी है? जानिए शरीर के लिए कितना जरूरी और फायदेमंद है कैल्शियम

कैल्शियम मजबूत हड्डियों के लिए जरूरी है, यह रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉटिंग blood clotting) में भी मदद करता है। शिशुओं के शुरुआती विकास और मांसपेशियां बनाने में भी सहायक होता है। कैल्शियम की कमी से कमजोर नाखून, दांत में दर्द, मासिक धर्म दर्द, धड़कन बढ़ना और नाड़ी की समस्याएं हो सकती हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 14 से 20 साल उम्र के ज्यादातर भारतीय से कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं। सब्जियां, दही, बादाम और पनीर इसके स्रोत हैं।

हाइपोकैल्शिमिया क्या है ?

एक पुरानी खबर के मुताबिक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि कैल्शियम की कमी जिसे हायपोकैल्शिमिया (hypocalcemia in Hindi) भी कहा जाता है, तब होता है जब आपको पूरा कैल्शियम नहीं मिलता। अच्छी सेहत के लिए कैल्शियम के महत्व के बारे में पता होना चाहिए।

डॉक्टर से सलाह लें, खुद डॉक्टर न बनें

उन्होंने कहा था कि जिन लोगों में कैल्शियम की कमी हो, उन्हें अपने आप दवा नहीं लेनी चाहिए और ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए। डॉक्टर से सलाह लें और सेहतमंद खानपान के साथ सप्लीमेट लें।

उम्र के साथ भी हो सकती है कैल्शियम की कमी

उन्होंने कहा था कि उम्र के साथ कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency can also occur with age) हो सकती है। शरीर का ज्यादातर कैल्शियम हड्डियों में संचित होता है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां पतली और कम सघन हो जाती हैं जिससे कैल्शियम की मांग बढ़ जाती है।

क्यों होती है शरीर में कैल्शियम की कमी?

भूखे रहने और कुपोषण, हार्मोन की गड़बड़ी, प्रिमैच्योर डिलीवरी और मैलएब्र्सोब्शन की वजह से भी कैल्शियम की कमी हो सकती है। मैलएब्र्सोब्शन (कुअवशोषण malabsorption meaning in Hindi) तब होता है, जब हमारा शरीर खुराक से विटामिन और मिनरल नहीं सोख पाता।

शरीर में कैल्शियम की कमी के लक्षण : Symptoms of calcium deficiency in the body

मसल क्रैम्प : होमोग्लोबिन और पानी की उचित मात्रा लेने के बावजूद अगर आप नियमित रूप से मसल क्रैम्प का सामना कर रहे हैं तो यह कैल्शियम की कमी का संकेत हैं।

लो बोन डेनसिटी : जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है कैल्शियम हड्डियों की मिनरलेजाईशन (mineralization of bones) के लिए जरूरी होता है। कैल्शियम की कमी सीधे हमारी हड्डियों की सेहत पर असर करती है और ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ा सकती है।

कमजोर नाखून (weak nails) : नाखून के मजबूत बने रहने के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है, उसकी कमी से वह भुरभुरे और कमजोर हो सकते हैं।

दांत में दर्द (toothache in Hindi) : हमारे शरीर का 90 प्रतिशत कैल्शियम दांतों और हड्डियों में जमा होता है उसकी कमी से दांतों और हड्डियों का नुकसान हो सकता है।

मासिक धर्म दर्द : कैल्शियम की कमी वाली महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान काफी तीव्र दर्द हो सकता है, क्योंकि मांसपेशियों के काम करने में कैल्शियम अहम भूमिका निभाता है।

इम्यूनिटी में कमी (decreased immunity) : कैल्शियम सेहतमंद रोग प्रतिरोधक क्षमता बना के रखता है। कैल्शियम में कमी पैथगॉन अटैक से जूझने की क्षमता कम कर देता है।

नाड़ी की समस्याएं : कैल्शियम कमी से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं (neurological problems) जैसे कि सिर पर दबाव की वजह से सीजर और सिरदर्द हो सकता है। इसकी कमी से डिप्रेशन, इनसोमेनिया, पर्सनैल्टिी में बदलाव और डेम्निशिया (Dementia) भी हो सकता है।

धड़कन : कैल्शियम दिल के बेहतर काम करने के लिए आवश्यक है और कमी होने पर हमारे दिल की धड़कन बढ़ सकती है और बेचैनी हो सकती है। कैल्शियम दिल को रक्त पंप करने में मदद करता है।

डॉ. अग्रवाल की सलाह थी कि अगर आप इनमें से किसी लक्षण का सामना कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं मोटे अनाज

person holding a bowl with vegetable salad

Coarse grains are very useful for health | मोटे अनाज का महत्व

हमें अक्सर यह भ्रम रहता है कि मोटे अनाज (Coarse Grains in Hindi) हमारी खुराक का एक बड़ा हिस्सा होते हैं। इसीलिए अकसर हम मोटे अनाजों के खानों को लेकर चिंतित नहीं रहते। लेकिन क्या कभी हम सोचते हैं कि हम मोटे अनाज के रूप में ये जो चीजें खाते हैं, मसलन, रोटी, पास्ता, नूडल, बिस्किट, इडली, डोसा, इन सब में कितनी तरह के मोटे अनाज होते हैं सिर्फ दो। गेहूं और चावल।

हमारे रोजमर्रा के भोजन में ज्यादातर यही दोनों मोटे अनाज विभिन्न रूपों में मौजूद होते हैं, जबकि हमें तमाम मोटे अनाज खाने चाहिए जो इससे इतर भी हों। मसलन, जई, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ आदि। लेकिन शहरी भारत के ज्यादातर लोगों को इन तमाम मोटे अनाजों के बारे में या तो पता नहीं है या इनका इस्तेमाल उनकी आदत का हिस्सा नहीं हैं। यही वजह है कि मोटे अनाज के तौर पर हम सिर्फ और सिर्फ गेहूं और चावल के तमाम उत्पाद खाते रहते हैं और सोचते हैं कि मोटे अनाज खाने की हमारी जरूरत पूरी हो गई। जबकि खुराक विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपका अपने हेल्थ की वेल्थ का अंदाजा है तो अपने खाने में इन मोटे अनाजों को सजग होकर शामिल करें।

ओट्स

ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है। ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए। ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है। ओट्स में फोलिक एसिड (Folic acid in oats) होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है।

person holding spoon and round red ceramic bowl with pastries
Photo by Flo Dahm on Pexels.com

ओट्स में पोषक तत्व | Nutrients in Oats

ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, लोहा और विटामिन-बी व ई भरपूर मात्रा में होते हैं। जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीडि़त हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए।

जौ (Barley is also a good source of magnesium and antioxidants)

जौ वह अनाज है जिसमें सबसे ज्यादा अल्कोहल पाया जाता है। यह पच जाने वाले फाइबर का भी अच्छा स्रोत (Good source of fiber) है। यह ब्लड कोलेस्ट्रोल को कम करता है। यह ब्लड ग्लूकोज को बढ़ाता है। जौ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत और एंटीऑक्सीडेंट है। अल्कोहल से भरे होने के कारण यह डायूरेटिक है इस कारण हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है।

रागी (Ragi is a tremendous source of calcium)

रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसलिए जो लोग ऑस्टेपेनिया के शिकार हैं और ऑस्टेपोरेसिस के भी, ऐसे दोनों लोगों के लिए यह फायदेमंद है। यह मोनोपोज के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। जो लोग लेक्टोज की समस्या से पीड़ित होते हैं उनके लिए रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसीलिए रागी का इस्तेमाल छोटे बच्चों के भोजन में भी होता है।

बाजरा (Millet is a hot cereal)

बाजरा एक गर्म अनाज है। इसलिए आमतौर पर इसका स्वागत जाड़ों के दिनों में ही किया जाता है। बाजरा प्रोटीन का भंडार है।

बाजरे में पोषक तत्व (Nutrients in millet)

बाजरे में मैथाइन, ट्राइप्टोफान और इनलिसाइन बड़ी मात्रा में पाया जाता है। यह थायमीन अथवा विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है और आयरन तथा कैल्शियम का भी भंडार है। यह उन लोगों के लिए तो बहुत ही फायदेमंद है जो गेहूं नहीं खा सकते। लेकिन बाजरे को किसी और अनाज के साथ मिलाकर खाना चाहिए।

ज्वार

    ज्वार भी एक तरह से जाड़ों में पसंद किया जाने वाला अनाज है। इसमें बहुत कम वसा होती है और ये कार्बोहाइडेट का जबरदस्त भंडार है।

ज्वार में पोषक तत्व (Nutrients in sorghum)

इसमें भी आयरन, कैल्शियम का उपयोगी भंडार होता है। यह उनके लिए सही रहता है जो पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीडि़त हैं।

    यह मूत्र प्रक्रिया को सुचारू रूप से बनाए रखने में सहायक है। जिससे हाइपर टेंशन रोगी परेशान रहते हैं।

इस तरह यह तमाम तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। अगर हम मोटे अनाजों के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल न खाकर अपने रोजमर्रा के भोजन में इन मोटे अनाजों को भी शामिल करें तो इनसे होने वाले फायदे कई गुना होंगे।

निवेदन – क्या यह समाचार आपको उपयोगी लगा ? यदि हाँ तो इसे अपने मित्रों, सहयोगियों के साथ फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप पर शेयर करें।

(देशबन्धु में प्रकाशित समाचार का संपादित रूप)

पोषण का प्रभावी स्रोत हैं झारखंड की पत्तेदार सब्जी प्रजातियां

5 Fruits Good for Diabetes in Hindi,मधुमेह, डायबिटीज, 5 फल जो डायबिटीज में खा सकते हैं, मधुमेह उपचार योजना,fruits good for diabetes, डायबिटीज में फल कौन से खाएं, डायबिटिक फ्रेंडली फल,डायबिटीज में फल कौन से खाएं,fruits good for diabetes, fruits good in diabetes, fruits good for diabetics,

The leafy vegetable species of Jharkhand are an effective source of nutrition.       

नई दिल्ली, 06 अप्रैल : गोभी, पालक, मटर, शिमला मिर्च, गाजर और आलू जैसी सब्जियां रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जिनका प्रचलन देशभर में है। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सैकड़ों विशिष्ट सब्जी प्रजातियां पायी जाती हैं, जो पोषण से भरपूर होने के बावजूद वह लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी हैं, जो आलू, गोभी, मटर, पालक, भिंडी, लौकी, कद्दू और इसके जैसी अन्य सब्जियों को मिली है। हालांकि, ऐसी सब्जी प्रजातियां गरीब और पिछड़ेपन का शिकार माने जाने वाले झारखंड के जनजातीय लोगों के भोजन का एक अहम हिस्सा हैं।

Leafy vegetables used by the local tribals of Jharkhand

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पटना एवं रांची स्थित पूर्वी अनुसंधान परिसर के शोधकर्ताओं ने झारखंड के स्थानीय आदिवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पत्तेदार सब्जियों की 20 ऐसी प्रजातियों की पहचान की है, जो पौष्टिक गुणों से युक्त होने के साथ-साथ भोजन में विविधता को बढ़ावा दे सकती हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पोषण एवं खाद्य सुरक्षा (Nutrition and Food Safety) सुनिश्चित करने में भी सब्जियों की ये स्थानीय प्रजातियां मददगार हो सकती हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकतर सब्जियों के बारे में देश के अन्य हिस्सों के लोगों को जानकारी तक नहीं है।

इस अध्ययन के दौरान रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूमि, रामगढ़ और हजारीबाग समेत झारखंड के सात जिलों के हाट (बाजारों) में सर्वेक्षण कर वहां उपलब्ध विभिन्न मौसमी सब्जियों की प्रजातियों के नमूने एकत्रित किए हैं। इन सब्जियों में मौजूद पोषक तत्वों, जैसे- , कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्निशयम, पोटैशियम, सोडियम और सल्फर, आयरन, जिंक, कॉपर एवं मैगनीज, कैरोटेनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का पता लगाने के लिए नमूनों का जैव-रासायनिक विश्लेषण किया गया है।

विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। इन सब्जियों में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट एवं वसा का स्तर बेहद कम पाया गया है। शोध पत्रिका करंट साइंस में प्रकाशित यह अध्ययन अनुराधा श्रीवास्तव, आर.एस. पैन और बी.पी. भट्ट द्वारा किया गया है।

सब्जियों की इन प्रजातियों में लाल गंधारी, हरी गंधारी, कलमी, बथुआ, पोई, बेंग, मुचरी, कोईनार, मुंगा, सनई, सुनसुनिया, फुटकल, गिरहुल, चकोर, कटई/सरला, कांडा और मत्था इत्यादि शामिल हैं। ये सब्जी प्रजातियां झारखंड के आदिवासियों के भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जनजातीय लोग लाल गंधारी, हरी गंधारी और कलमी का भोजन में सबसे अधिक उपयोग करते हैं। वहीं, गिरहुल अपेक्षाकृत रूप से कम लोकप्रिय है।

बरसात एवं गर्मी के मौसम में विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के लोग खाने योग्य विभिन्न प्रकार के पौधे अपने आसपास के कृषि, गैर-कृषि एवं वन्य क्षेत्रों से एकत्रित करके सब्जी के रूप में उपयोग करते हैं। इन सब्जियों को विभिन्न वनस्पतियों, जैसे- झाड़ियों, वृक्षों, लताओं, शाक या फिर औषधीय पौधों से प्राप्त किया जाता है।

सब्जियों को साग के रूप में पकाकर, कच्चा या फिर सुखाकर खाया जाता है। सुखाकर सब्जियों का भंडारण भी किया जाता है, ताकि पूरे साल उनका भोजन के रूप में उपभोग किया जा सके। अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न मौसमों में भिन्न प्रकार की सब्जियां उपयोग की जाती हैं। इनकी पत्तियों, टहनियों और फूलों को मसालों अथवा मसालों के बिना पकाकर एवं कच्चा खाया जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि “इन सब्जियों की उपयोगिता के बावजूद इन्हें गरीबों एवं पिछड़े लोगों का भोजन माना जाता है, और व्यापक रूप से कृषि चक्र में ये सब्जियां शामिल नहीं हैं। जबकि, सब्जियों की ये प्रजातियां खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और आमदनी का जरिया बन सकती हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बेहद कम संसाधनों में इनकी खेती की जा सकती है।”

(इंडिया साइंस वायर)

मेथी से बालों की इन समस्याओं को रोकें

hair loss problem in Hindi

Fenugreek seeds in Hindi for hair | Methi Seeds for Hair in Hindi

मेथी का उपयोग भारतीय महिलाओं द्वारा प्राचीन काल से ही सुंदर बालों के लिए किया जाता रहा है। इस लेख में मेथी के बीज के साथ मेथी दाना के फायदे (Methi Khane ke Fayde), उपयोग, Benefits of methi in Hindi, मेथी के बीज बालों और स्कैल्प के स्वास्थ्य को बढ़ावा कैसे दे सकते हैं, उन्हें हम देखेंगे.  साथ ही उन्हें आपके बालों की देखभाल की दिनचर्या में शामिल करने के सर्वोत्तम तरीके हैं।

assortment batch colors cooking
Photo by Frans Van Heerden on Pexels.com

मेथी के बीज अक्सर पतले बालों  और अन्य संबंधित स्थितियों, जैसे रूसी या एक सूखी, खुजली वाली सर के लिए एक प्राकृतिक घरेलू उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है। फोलिक एसिड में समृद्ध, विटामिन ए, विटामिन के और विटामिन सी, मेथी के बीज हर्बल सप्लीमेंट के रूप में और लंबे समय से घरेलू बाल उपचार में उपयोग किए जाते रहे हैं।

मेथी के बीज आयरन और प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत हैं जो बालों के विकास के लिए दो आवश्यक पोषक तत्व हैं।  वे पोटेशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे मिनरल्स में भी समृद्ध होते  हैं जो  बालों के झड़ने को रोकता हे.

मेथी पाउडर के फायदे इन हिंदी| मेथी के क्या फायदे?

बालों के अलावा मेथी दाना के स्वास्थय लाभ (methi dana benefits) अनेक हैं. मेथी में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने, टेस्टोस्टेरोन को बढ़ावा देने और स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लाभ हैं। मेथी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकती है, सूजन कम कर सकती है और भूख नियंत्रण में मदद कर सकती है.

मेथी के दाने बालों के लिए कैसे हैं फायदेमंद

मेथी के बीज स्कैल्प और बालों के स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यधिक लाभकारी माने जाते हैं। वे बालों के सूखने से लेकर गंजापन और बालों के पतले होने जैसे अधिक परेशानियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। आइए.. मेथी के फायदों को, खासकर बालों के लिए, विस्तार से यहाँ देखें.

1.     बालों का गिरना कम करता है

smiling black woman near white bed in bedroom
Photo by Gabby K on Pexels.com

मेथी के बीज स्कैल्प के स्वास्थ्य में सुधार और जड़ से बालों को मजबूत बनाने में बहुत सहायक होते हैं। बालों का झड़ना कम करने के लिए, नीचे दिए गए घरेलू उपाय का इस्तेमाल करें

टिप १

  • मेथी के बीज को रात भर भिगोएँ
  • उन्हें थोड़ा पानी या नींबू के रस के साथ ब्लेंड करें।
  • इसे हेयर  पैक की तरह अपने बालों पर लगाएं और इसे कुछ देर तक छोड़ दें
  • माइल्ड शैंपू से अपने बालों को धो लें.

टिप २

  • 2 बड़े चम्मच मेथी के दानों को पानी में भिगोकर रात भर ठंडे स्थान पर छोड़ दें।
  • बीजों को उसी पानी का उपयोग करके पेस्ट में पीसें, जो चिपचिपा और पतला हो जाएगा (यह फिसलन पदार्थ आपके बालों को चमक प्रदान करने के लिए जाना जाता है)।
  • इसे अपने बालों की जड़ों पर लगाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें। अपने बालों को माइल्ड शैम्पू से धोने से पहले स्कैल्प पर थोड़ी मालिश करें।

पेस्ट करने के लिए, आप नींबू के रस का 1 बड़ा चमचा जोड़ सकते हैं और इसे रूसी मुद्दों के इलाज के लिए उपयोग कर सकते हैं

यह टिप्स आपके बालों को जड़ से हेयर टिप तक मजबूत करता है।

2.    मेथी सीड्स हेयर ग्रोथ के लिए | Fenugreek seeds for hair growth

black woman doing housework in stylish apartment
Photo by Gabby K on Pexels.com

मेथी के बीज पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो न केवल बालों के विकास को बढ़ावा देते हैं बल्कि नियमित रूप से उपयोग किए जाने पर बालों की बनावट में भी सुधार करते हैं। बालों के विकास के लिए एक पैक तैयार करने के लिए, ये करें:

  • आधा कप भिगोए हुए मेथी के बीजों को एक चम्मच एलोवेरा जेल, एक चम्मच नारियल के तेल और कुछ बूंदे मेंहदी के तेल के साथ मिश्रित करें।
  • इसे अपनी स्कैल्प  पर लगाएं
  • 30-40 मिनट तक छोड़ दें
  • माइल्ड शैम्पू से अपने बालों को धो लें

आप इसके परिणाम से आश्चर्यचकित हो जायेंगे. यह अद्भुत टिप आपके बालों के विकास को बहुत तेज़ी से बढ़ावा देने में मदद कर सकता हे.

3.     समय से पहले बाल सफ़ेद होना रोकता है |Methi dana for white hair in Hindi

आज के युवाओं में समय से पहले बालों का सफेद होना एक आम समस्या है। मेथी के बीज पोटेशियम से भरे होते हैं जो समय से पहले बालों के भूरे होने की समस्या से निपटने में मदद करता है। इसके लिए हेयर स्कैल्प निम्न प्रकार से बनाएं:

  • मेथी के बीज और करी पत्ता का पेस्ट बनाएं
  • इसे अपने बालों पर लगाएं और लगभग 30 मिनट के लिए रहने दें
  • इसे हल्के शैम्पू और ठंडे पानी से धो लें

इस टिप से समय से पहले होने वाले सेफ बालों की समस्या को काफी हद तक कम  किया जा सकता हे.

4.    डैंड्रफ के लिए मेथी का हेयर पैक | Fenugreek hair pack for dandruff

रुसी या डैंड्रफ आपके लिए एक  शर्मनाक स्थिति बनाने के साथ साथ आपके स्कैल्प  के स्वास्थ्य को पूरी तरह से बर्बाद कर सकती है और बालों के झड़ने का कारण बन सकती है।

  • इस समस्या से निपटने के लिए भिगोए हुए मेथी दाने और दही का पेस्ट बनाएं।
  • अपने बालों पर लगाएं और  5-20 मिनट तक रहने दें
  • फिर इसे गुनगुने पानी से हलके शैम्पू से धोएं

इस टिप से आप डैंड्रफ की समस्या से काफी हद तक राहत पा सकते हैं. तेज परिणामों के लिए सप्ताह में दो बार दोहराएं।

5.     बालों को चमकदार और रेशमी बनाता है

dreamy young woman with windy hair recreating on seashore against cloudy sky
Photo by Maria Orlova on Pexels.com

ये बीज आपके बालों को कंडीशन कर सकते हैं जैसे कोई और नहीं। यदि आपके बाल रूखे और सूखे हैं, तो मेथी का इस्तेमाल आपको ज़रूर करना चाहिए।

इसके लिए आप यह करें :

  • 10-15 ग्राम मेथी के बीज लें
  • उन्हें रात भर पानी में भिगो दें
  • अगली सुबह, इसे एक पतले पेस्ट में पीस लें
  • इसे अपने बालों पर लगाएं और कम से कम 30 मिनट के लिए छोड़ दें
  • इसे पानी और माइल्ड शैम्पू से धो लें

यह टिप आपके बालों को गहराई से कंडीशन करेगा और चमकदार और रेशमी बनाएगा

निष्कर्ष

person holding a green plant
Photo by Akil Mazumder on Pexels.com

मेथी का उपयोग भारतीय महिलाओं द्वारा प्राचीन काल से ही सुंदर बालों के लिए किया जाता रहा है। मेथी रूसी, खुजली और परतदार स्कैल्प के इलाज में मदद करती है, बालों के झड़ने का इलाज करती है, बालों के विकास को ट्रिगर करती है, उस खोये हुए चमक को आपके बालों में जोड़ती है और आपके खोए हुए बालों को फिर से पाने में भी मदद करती है।

अब जब आप अपने बालों के लिए मेथी  का उपयोग करने के विभिन्न लाभों के बारे में जानते हैं, तो हम आपको सुझाव देते हैं कि ऊपर बताए गए तरीकों में से किसी भी तरीके से अपने दैनिक बालों की देखभाल दिनचर्या में शामिल ज़रूर करें। 

Author’s Note:

नमस्कार! मैं श्वेता किशोर (Sweta Kishore) एक स्वास्थ्य और फिटनेस उत्साही हूं और आप सभी की तरह एक स्वस्थ जीवन शैली चाहती हूँ। इसी कारण एक स्वस्थ जीवन को पाने के लिए काफी कुछ सीखा है मैंने जिसे मैं आप सब के साथ साझा करना चाहती हूँ. TopPaanch एक हिंदी ब्लॉग है जो प्रभावी पोषण और फिटनेस टिप्स प्रदान करता है जो आपको एक संपूर्ण स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने में मदद कर सकता है। मुझे उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। नीचे टिप्पणी में आप सब की अनुभव सुनने की मैं उम्मीद रखती हूँ।

सर्दी के मौसम में बढ़ जाती हैं हड्डियों की बीमारियां

Health News

जागरूकता बढ़ाने के लिए निशुल्क हड्डी रोग जांच शिविर का आयोजन

Organizing free orthopaedic screening camp to increase awareness

बुलंदशहर,  31 दिसंबर 2020: ठंड के मौसम में न सिर्फ युवाओं के बीच जीवनशैली संबंधी बीमारियों (Lifestyle diseases) में वृद्धि होती है बल्कि बुजुर्ग आबादी भी हड्डियों समेत कई समस्याओं से परेशान होती है।

Ignoring bone problems is a concern

एक विज्ञप्ति में नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल में हड्डी और जोड़ सर्जरी/ऑर्थोपेडिक्स निदेशक व हेड, डॉक्टर अतुल मिश्रा (Doctor Atul Mishra, Director & Head, Bone & Joint Surgery / Orthopedics at Fortis Hospital, Noida) ने बताया कि, “यदि लोगों को बीमारी के लक्षणों और शुरुआती निदान की महत्ता के बारे में पता होगा, तो वे आधी लड़ाई वहीं जीत लेंगे। भारतीयों में जोड़ों का दर्द और घुटनों की समस्या बेहद आम है और हड्डियों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना एक चिंता का विषय है। ये समस्याएं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी होती हैं, जैसे कि वजन, कैल्शियम की कमी, बोन डेंसिटी आदि। जबकी जीवनशैली में बदलाव और शुरुआती निदान के साथ इनके मामलों में कमी लाई जा सकती है। इन समस्याओं का कारण और लंबे समय का हल ढूँढना बेहद जरूरी है।”

शुरुआती निदान के लिए नियमित रूप से स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग कराना जरूरी है। लेकिन बीमारियों के मामलों में कमी लाने के लिए लोगों को जागरुक करना सबसे पहली जरूरत है।

In the winter season, bone diseases increase.

डॉक्टर अतुल मिश्रा ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि,

सर्दी के मौसम में, हड्डियों की बीमारियां बढ़ जाती हैं। लोगों को चलने में परेशानी होती है, जोड़ जकड़ जाते हैं, पीठ का निचला हिस्सा और जोड़ों में दर्द होता है। ये समस्याएं विशेषकर बुजुर्गों को परेशान करती हैं। उनके शरीर को गर्म रखना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी, सी और कैल्शियम के सप्लीमेंट्स का सेवन किया जा सकता है। बुजुर्गों को सर्दियों की इन बीमारियों से आसानी से छुटकारा पाने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है। इस शिविर के आयोजन का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरुक करने के साथ उन्हें निशुल्क मेडिकल सुविधाएं प्रदान करना था।”

उन्होंने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के सहयोग से रोटरी क्लब बुलंदशहर ने एक निशुल्क हड्डी रोग जांच शिविर का आयोजन किया। इस शिविर के ज़रिए, हमने आर्थराइटिस और हड्डियों के रोगियों में नज़रअंदाज़ की जाने वाली समस्या के बारे में जागरुकता बढ़ाई। आर्थराइटिस मरीजों को रोबॉटिक असिस्टेंस के साथ नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में जागरुक होने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि यह निशुल्क शिविर स्मार्ट स्कॉलर्स स्कूल, हिमालया पेट्रोल पंप के सामने, भूर, बुलंदशहर में आयोजित किया गया था, जहां स्थानीय लोगों के ब्लड ग्लूकोस स्तर (Blood glucose level) और बोन मिनरल डेंसिटी (हड्डियों की ताकत की जांच- Bone Mineral Density – Bone Strength Test) की मुफ्त में जांच की गई। इसी के साथ उन्होंने निशुल्क परामर्श का लाभ भी उठाया।