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Tag Archives: कॉरपोरेट

नेताजी की प्रतिमा को हिटलर की छवि में बदल रहा है कॉरपोरेट फासीवाद

netaji's statue

क्या एक सैन्य राष्ट्र के निर्माण के लिए नेताजी की छवि का इस्तेमाल हो रहा है? कॉरपोरेट फासीवाद (corporate fascism) नेताजी की प्रतिमा (Netaji’s statue) को हिटलर की छवि (picture of Hitler) में बदल रहा है जो नेताजी और आज़ाद हिन्द फौज का अपमान (Netaji and Azad Hind Fauj insulted) तो है ही, इतिहास के भगवाकरण के साथ-साथ अक्षम्य देशद्रोह …

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जानिए क्या आज भी प्रासंगिक है महात्मा गांधी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत

Mahatma Gandhi महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत की प्रासंगिकता | Relevance of Mahatma Gandhi’s doctrine of trusteeship in Hindi | relevance of mahatma gandhis trusteeship doctrine india गांधीवाद के चार प्रमुख आयाम माने जाते हैं: सत्य, अहिंसा, स्वालंबन और ट्रस्टीशिप। गांधीवाद महात्मा गांधी के उन राजनीतिक एवं सामाजिक विचारों पर आधारित है जिनको उन्होंने सबसे पहले व्यवहार में प्रयोग किया तथा उनको …

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कोरोना महामारी का दूसरा दौर : बर्बादियों के जश्न का आगाज़ है यह

Novel Cororna virus

Second Round of Corona Epidemic: It is the beginning of the celebration of waste हम कोरोना महामारी के दूसरे दौर में हैं। यह बेहद खतरनाक और डरा देने वाला दौर है। 30 जनवरी को लगभग 14 महीने पहले जब केरल में कोरोना का पहला केस (First case of corona in Kerala) मिला था, तो, उसे भी सरकार ने गंभीरता से …

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सरकार की प्राथमिकताएं कॉरपोरेट हित हैं, न कि जनहित या लोक कल्याण / विजय शंकर सिंह

Narendra Modi flute

The government’s priorities are corporate interests, not public interest or public welfare : Vijay Shankar Singh What is the economic policy of the government after 2014? सरकार की प्राथमिकताएं आखिर क्या हैं ? विकास हो रहा है तो जीडीपी क्यों गिर रही है। अर्थव्यवस्था में तमाम गिरावट के बाद पिछले छह सालों में केवल यही एक ‘उपलब्धि’ हुयी है कि …

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औपनिवेशिक लूट के नेता का रूप अपना चुके हैं प्रधानमंत्री मोदी, किसानों के संघर्ष से ही बचेगी अर्थव्यवस्था

Narendra Modi PM Kisan Samman Nidhi

किसानों का यह संघर्ष ही भारतीय अर्थ-व्यवस्था के तमाम संकटों के निदान की कुंजी है भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ पूँजीवाद का संबंध (The relation of capitalism with rural economy in India) उपनिवेश और औपनिवेशिक शक्ति के बीच के संबंध का रूप ले चुका है। पिछले तमाम वर्षों में गाँवों में निवेश और गाँवों से धन की निकासी के …

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मौजूदा किसान आंदोलन की दिशा : मोदी सरकार कृषि को पूरी तरह कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने पर आमादा

Farmers Protest

The direction of the current farmer movement भारत में ‘गोदी मीडिया‘ ही नहीं, ‘गोदी राजनीति’ भी अपने चरम पर किसान संसार का अन्नदाता है लेकिन आज की व्यवस्था में वह स्वयं प्राय: दाने-दाने को तरस जाता है. उसकी कमाई से कस्बों से लेकर नगरों में लोग फलते-फूलते हैं पर उसके हिस्से में आपदाएं ही आती हैं. सूखे की मार से …

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