56″ मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना शाहीन बाग आंदोलन!

rAVISHANKAR PRASAD

देश में अपनी बात रखने और विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए भले ही जंतर-मंतर को जाना जाता हो पर आज की तारीख में सीएए के विरोध में शाहीन बाग में हो रहे आंदोलन (Movements are being held in Shaheen Bagh against the CAA) ने जो मुकाम हासिल किया है वह जंतर-मंतर को पीछे

गणतंत्र को सत्ता वर्ग ने सबसे बड़ा मजाक बना दिया है। आम लोगों के लिए न कानून का राज है, न संविधान कहीं लागू है

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

The RULING CLASS has made the Republic the biggest joke. Neither the rule of law nor the constitution is applicable to common people. आज गणतंत्र दिवस है। अपने बचपन में 15 अगस्त और 26 जनवरी साठ के दशक में जिस जोश से मनाया करते थे हम, जिस तरह कागज पर रंग से तिरंगा बनाकर डंडे

अहंकार नहीं आत्मालोचना दिवस है 26 जनवरी

Happy Republic Day

Republic Day is a day of introspection गणतंत्र दिवस आत्मालोचना का दिन है। आसपास देखें, देश में देखें क्या छूट गया है हमारी आँखों से, कौन सी चीज है जो हमारे हाथ से निकल गयी है ! Think what have we lost? सबसे बड़ी त्रासदी यह हुई है कि सम-सामयिक सामाजिक वास्तविकता हमारे हाथ से

क्यों मनाएं गणतंत्र दिवस, जब हमारे संविधान का चीर हरण किया गया है?

Justice Markandey Katju

Why celebrate Republic Day when Cheer Haran has been done to our Constitution? नई दिल्ली, 26 जनवरी 2020. पूरा देश इस समय हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन इस बीच अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू  (Justice Markandey Katju, retired judge of