ईद का रंग, मुसाफ़िरों के संग

उनका जो फ़र्ज़ है वो अहल ए सियासत जानें मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुंचे जिगर मुरादाबादी साहब के इस शेर की चलती फिरती

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