आपातकाल की 45वीं बरसी : जेलों में कैद साठ साल से अधिक आयु के कैदियों को अंतरिम ज़मानत या आपातकाल पैरोल दिए जाने की मांग

Justice

45th Anniversary of Emergency: Demand for interim bail or emergency parole to prisoners above sixty years of age in jails आपातकाल की 45वीं बरसी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से जेलों के अमानवीय हालात के खिलाफ की कार्रवाई की मांग देश के विभिन्न संगठनों ने पत्र भेजकर जेलों में कैद साठ साल से अधिक आयु के

सभ्यता और विकास’ नामक वायरस आदिवासियों को मार रहा है पर वे हैं कि मरते ही नहीं!

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

The virus called ‘civilization and development’ is killing the tribals but they are not dying at all! करीब दो हफ्ते से हम तराई के गांवों में प्रेरणा अंशु का मई अंक और मास्साब की किताब गांव और किसान लेकर जा रहे हैं। आज घर के कामकाज और आराम की गरज से नहीं निकला। मैंने पहले

ट्रम्प और मोदी में फर्क क्या है? जुमला और झूठ और फरेब का मनुस्मृति एजेंडा कोरोना संकट की आड़ में लागू किया जा रहा है

Namaste Trump

सविता जी नाराज हो रही थी। डॉ. आनंद तेलतुंबडे जैसे विशुद्ध अम्बेडकरवादी अम्बेडकर परिवार के सदस्य और गौतम नौलखा जैसे प्रतिबद्ध पत्रकार की गिरफ्तारी (The arrest of Dr. Anand Teltumbde and Gautam Navlakha) का कहीं कोई विरिध नहीं हो रहा है। कोरोना के बहाने गरीब मेहनतकश जनता को मारने का चाक चौबंद इंतज़ाम हो गया।