जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया

लाइब्रेरी में लहू बहाती लाठी

Jamia LathiCharge

लाइब्रेरी में लहू बहाती लाठी ——————   लाठी की आँख नहीं होती पुस्तकें नहीं पढ़ती सोचती नहीं लाठी लाठी का रिश्ता जिस्म से है सत्ता का हाथ लाठी लहू बहाती लाठी तन/मन पर जख्म छोड़ती जामिया की लाइब्रेरी में घुसी परंपरा निभाई संविधान की धज्जियाँ उड़ी निहत्थों की जमकर धुनाई अपना धर्म निभाती लाठी ☘️