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Tag Archives: तपेंद्र प्रसाद

बंद करो बकवास..,,, बातों से भूख शांत होती नहीं है।

How many countries will settle in one country

मज़दूर दिवस  पर सभी मज़दूरों को समर्पित एक रचना। A poem dedicated to all workers on Labor Day बंद करो बकवास, श्रम से चूता पसीना, मोती नहीं है। बहुत दिल बहलाये, क्या पाए ? पेट की भूख और सूद की संज्ञा, हमें ख़ूबसूरत नाम नहीं, खुरदुरी हक़ीक़त चहिये, सदियों से घटतौले, पसीने की क़ीमत चाहिए ख्वाबों से भूख शांत होती …

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