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Tag Archives: नैनीताल समाचार

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारिता के छात्रों के लिए एक सन्देश

press freedom

A message for journalism students on Hindi Journalism Day पण्डित युगुल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 में प्रथम हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन (Publication of first Hindi newspaper Udant Martand) आरम्भ किया था. यह अखबार एक साल से ज्यादा नहीं चला पर हिंदी पत्रकारिता के ऐसे बीज बो गया कि हिंदी पत्रकारिता समय के साथ और भी मजबूत होती चली गई. …

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उत्तराखंड की राजधानी का प्रश्न : जन भावनाओं से खेलता राजनैतिक तंत्र

gairsain

Question of the capital of Uttarakhand: Political system playing with public sentiments उत्तराखंड आंदोलन की विशेषता उत्तराखंड आन्दोलन में तमाम खामियों के बावजूद एक बात जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया वह था राजधानी का सवाल और ये इसलिए क्योंकि अन्य राज्यों में जहां राजधानियों के सवाल को लेकर लोग उस क्षेत्र के बड़े शहरों को लेकर आश्वस्त थे वहीं उत्तराखंड …

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खिलता हुआ इंद्रधनुष और भावनाओं की राजनीति

Blooming Rainbow and the Politics of Emotions पलाश विश्वास दफ्तर से बसन्तीपुर लौटते हुए हरिदासपुर से गांव के रास्ते पैदल चलते हुए हल्की बूंदाबांदी और सांझ की धूप में हिमालय की छनव में आसमान के एक छोर से दूसरे छोर तक अर्धचन्द्राकार इंद्रधनुष खिलते दिखा। मेरे मोबाइल से ज़ूम नहीं जो सकता, फिर भी सिर्फ दृष्टि के भरोसे नौसिखिए हाथों …

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हिंदी पत्रकारिता दिवस : उत्तराखंड के जनांदलनों का प्रतिबिंब रहा है ‘नैनीताल समाचार’

nainital samachar

उत्तराखंड नैनीताल समाचार | Uttarakhand Nainital Samaachaar पण्डित युगुल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन आरम्भ किया था । उसी ऐतिहासिक दिन की याद में और हिंदी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। उदन्त मार्तण्ड के बाद से सैंकड़ों हिंदी समाचार …

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हिमालय पुत्र आपकी यात्रा जारी है और हमेशा रहेगी

sunderlal bahuguna

इसी साल 9 जनवरी का दिन था जब सुंदर लाल बहुगुणा के जन्मदिन पर मैं उनसे पहली और आखिरी बार मिला। नैनीताल समाचार और गांधीवादी सर्वोदयी सेवकों से जुड़े होने की समानता के कारण मेरा उनसे मिलना सम्भव हुआ था पर सुंदर लाल बहुगुणा (Sunderlal Bahuguna) के तेज़ की वज़ह से मेरी उनसे हाथ जोड़ने के सिवा कुछ कहने की …

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मेरा जन्मदिन कुलीन वर्ग के लिए एक दुर्घटना ही है

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

एक बड़े सच का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि मार्टिन जान को मेरी याद तो है लेकिन पलाश विश्वास को वे पहचान नहीं पा रहे। दरअसल उत्तराखंड और झारखंड में लोग मुझे पलाश नाम से ही जानते रहे हैं, किसी विश्वास को वे नहीं जानते, क्योंकि राजकिशोर संपादित परिवर्तन में नियमित लिखने से पहले तक मैं पलाश नाम से …

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